देश भर में दलित संस्थाओं का रुख आंदोलन में हुआ तब्दील , बीजेपी सकते ने

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भारत बंद:देश भर में दलित संस्थाओं का रुख आंदोलन में हुआ तब्दील , मुस्लिम संस्थाओं का सहयोग जारी, कई शहरों में कर्फ्यू, बीजेपी सकते ने

केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में देश भर में दलित संगठनों और उनके समर्थकों के प्रदर्शन का जनजीवन पर व्यापक असर पड़ा है।मोदी सरकार पर अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार रोकथाम अधिनियम को कमजोर करने का आरोप लगाकर दलित संगठनो द्वारा 2  अप्रैल को भारत बंद किया गया था ।

 

दलितों का सोमवार को भारत बंद का असर देश के 12 राज्यों में देखा गया। इनमें से उन राज्यों में सबसे ज्यादा हिंसा और प्रदर्शन देखने को मिला, जहां इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं। इनमें मध्यप्रदेश और राजस्थान शामिल हैं। प्रदर्शन ने हिंसक मोड़ ले लिया और प्रदर्शनों के दौरान 14 लोगों की मौत हो गई। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 7, यूपी और बिहार में तीन-तीन, वहीं राजस्थान में एक की मौत हो गई। इसके अलावा कई जिलों में तनाव के कारण कर्फ्यू लगाया गया है। प्रदर्शन को देखते हुए देश में कई जगहों पर कर्फ्यू लागू कर दिया गया है और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। केंद्र सरकार ने यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और बिहार से हिंसा पर रिपोर्ट मांगी है और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती कदम उठाने और कानून- व्यवस्था बनाये रखने का निर्देश दिया है।

 

हिंसा की चपेट में देश के कई शहर हैं। जयपुर अलावर , मेरठ, रांची, आगरा, भिंड में भी प्रदर्शन का ख़ासा असर देखने को मिला है। केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के संसदीय क्षेत्र हाजीपुर में भी बड़े पैमाने पर आगजनी हुई है। यहां पर प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों में आग लगा दी और दुकानों में तोड़फोड़ की। गाजियाबाद में बड़ी संख्या में लोग सड़क पर निकले और केन्द्र पर दलितों के हितों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।कई दलित नेताओं ने भारत बंद का समर्थन किया जबकि प्रकाश आंबेडकर ने कहा की बंद के कोई नेतृत्व नहीं था , वहीँ देश भर में दलित संस्थाओं के साथ मुस्लिम संस्थाओं ने भी इस बंद में हिस्सा लिया .

बिहार के जहानाबाद, दरभंगा, आरा, अररिया, सहरसा, मधुबनी जिलों में बंद समर्थक रेल पटरियों पर बैठ गए, जिससे रेलों के परिचालन पर भी प्रभाव देखा जा रहा है। बंद समर्थकों ने कई ट्रेनें को भी रोका  । इसके अलावा पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर सहित विभिन्न जिलों में लोग जामकर सड़कों पर उतरे और आगजनी की, जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। सूत्रों ने बताया इस बंद को राजद, सपा, कांग्रेस,SDPI , हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, भाकपा (माले) और शरद यादव का समर्थन मिला है।

 

तलवारें, लाठियां, बेसबाल बैट व झंडे लिए सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने जालंधर, अमृतसर व बठिंडा में दुकानों व अन्य इमारतों को जबर्दस्ती बंद करा दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने सोमवार सुबह अमृतसर जिले में एक ट्रेन को रोकने की कोशिश की, लेकिन रेलवे अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद उन्होंने ट्रेन को जाने दिया। दलित नेताओं का आरोप है की आंदोलनकारियों में कुछ असामाजिक जातिवादी तत्व घुस गए जिन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसात्मक करदिया ,नेताओं ने इसको बीजेपी की साज़िश कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया .याद रहे पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड की 10वीं व 12वीं कक्षाओं की अंतिम प्रेक्टिकल परीक्षा सोमवार को होना तय थी, अब इसे 11 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा।

 

पंजाब सरकार ने सोमवार को होने वाले विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर एहतियाती उपाय के तौर पर रविवार को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने का आदेश दिया था। पंजाब में सभी राज्यों की तुलना में सबसे अधिक दलित आबादी होने के बावजूद कोई बड़ी अप्रिय घटना यहाँ नहीं हुई । राज्य की 2.8 करोड़ आबादी में 32 फीसदी दलित हैं।

 

वहीं केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दलित प्रदर्शनकारियों से शांति की अपील की है। ज़ाहिर है प्रदर्शन इतना भयानक होगया था की बीजेपी खुद सकते में आगई या बैकफुट पर आगयी और आनन् फानन SC के फैसले पर पुनर विचार के लिए स्पेशल सुनवाई कराई गयी ,रविशंकर प्रसाद ने कहा कि केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है। कानून मंत्री ने कहा कि वरिष्ठ वकील सरकार के पक्ष को कोर्ट के सामने रखेंगे।

 

याद रहे सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट 1989 में सीधे गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला किया था. कोर्ट ने कहा था कि SC/ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की जगह शुरुआती जांच हो. साथ ही केस दर्ज करने से पहले डीएसपी स्तर का अधिकारी पूरे मामले की प्रारंभिक जांच करेगा. कोर्ट ने कहा, कुछ मामलों में आरोपी को अग्रिम ज़मानत भी मिल सकती है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ एकजुट हुए दलित संगठनों की दलील है कि कोर्ट के इस फैसले से ये एक्ट कमज़ोर होगा.जबकि विशेषज्ञों का मानना यह भी है कि इस क़ानून का Misuse होरहा है , दूसरी ओर दलितों पर भी अपमानित करने और उनपर ज़ुल्म करने के समाचार आये दिन मिलते ही रहते हैं .कुल मिलकर सामजिक सुरक्षा मुद्दे पर सरकारों का Failure भी कहा जारहा है . टाइम्स ऑफ़ पीडिया (टॉप) ब्यूरो

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