अदालत के फ़ैसले से बच्ची अनाथ , ऐसा क्यों ?

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किशोर न्याय अधिनियम, 2015 को लेकर बन गयी एक नज़ीर

हिन्दू पर्सनल लॉ , किशोर न्याय अधिनियम, 2015 पर पड़ा भारी , SC की बेंच ने धर्म को दिया सुप्रीम स्थान

नई दिल्ली Supreme Court ://
जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच ने अहम् फैसला लेते हुए महाराष्ट्र के चाइल्ड केयर में पल रही ढाई साल की बच्ची को आखिरकार उसके घर तक पहुँचाने का रास्ता साफ़ कर दिया । यह बच्ची अपने जन्म के पांच महीने बाद ही माँ की गोद से जुदा हो गयी थी और मुंबई के चाइल्ड केयर होम में रहने को मजबूर थी। शुक्रवार को मामले से जुड़ी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस बच्ची को गोद लेने वाले पेरेंट्स (कृपाल अमरीक सिंह और उनकी पत्नी बलविंदर कौर) को इसकी अंतरिम कस्टडी (Interim Custody) लेने का आदेश सुनाया जो .. । महाराष्ट्र हाई कोर्ट के फैसले के बाद अनाथ हुई बच्ची के मामले पर जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच ने खेद भी व्यक्त किया .

अदालत के आदेश से बच्ची अनाथ


अदालत ने इस मामले में बाल न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम से लेकर पैदा होने वाली त्रासद स्थिति (tragic situation ) और न्यायिक प्रणाली की स्थिति का भी जिक्र किया। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच ने कहा कि आम तौर पर, एक बच्चा प्राकृतिक घटनाओं जैसे (जब माता-पिता दोनों की मृत्यु हो जाती है) के चलते अनाथ हो जाता है । “लेकिन इस बच्ची के मामले में, अदालत के आदेश से एक बच्ची अनाथ हो गई , अपने अधिकारों से महरूम हो गयी यह काफी दुखद और विचारणीय है” : ।

बच्ची को अपने पास नहीं रखना चाहती थी मां


कोर्ट ने बच्ची को गोद लेने वाले पेरेंट्स कृपाल अमरीक सिंह और उनकी पत्नी बलविंदर कौर को अंतरिम कस्टडी (उबूरि तहवील ) देकर बच्चे को मुंबई के चाइल्ड केअर से घर लेना जाने की अनुमति दी। बच्ची को जन्म देने वाली मां भी इस फैसले के हक में थी। याद रहे बच्ची की पैदाइश के बारे में उसकी माँ ने इसके जन्म की दो वजह बताई थी एक तो उसको नौकरी देने वाले Employer ने रेप को अंजाम दिया और दुसरे अपने ही एक दोस्त के साथ संबंध की बात कही थी।

बच्ची को बेचने की थी आशंका

https://www.livelaw.in/top-stories/supreme-court-adoption-personal-law-procedural-guidelines-private-adoptions-biological-parent-176003


दरअसल यह पूरा प्रकरण कुछ इस तरह है कि ,एक लड़की का जन्म 8 जनवरी, 2019 को हुआ था।जिसके बाप का कोई पता नहीं था ,बच्ची कि पैदाइश के आठ दिन बाद, ‘चाइल्डलाइन’ नाम की NGO ने महाराष्ट्र सरकार के तहत आने वाली बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सूचित किया कि मां बच्ची की देखभाल नहीं कर रही है। एनजीओ ने यह भी बताया कि उसकी मां बच्ची को किसी को गोद देने या किसी आश्रम में रखने के लिए तैयार है । एनजीओ ने आशंका जताई कि मां बच्ची को बेच सकती है या कोई और क़दम उठा सकती है ।उसके बाद ही CWC ने गोद लेने वाले माँ बाप कृपाल अमरीक सिंह और उनकी पत्नी बलविंदर कौर को इस बच्ची को सौंप दिया था .

सीडब्ल्यूसी ने जन्म देने वाली मां को महीने में एक बार बच्ची के साथ उसके सामने पेश होने का निर्देश भी दिया था । लेकिन 22 जनवरी, 2019 को, मां ने कृपाल अमरीक सिंह और उनकी पत्नी के पक्ष में एक Notified एडॉप्शन डीड के माध्यम से अपने बच्चे को गोद देने की सहमति दे दी। इसके बाद वे लोग बच्ची को पंजाब ले गए। NGO को पता चला कि बच्चे को 40,000 रुपये में बेचा गया है तो उसने सीडब्ल्यूसी यानी Child Care Committee को सूचित किया। इसके बाद कृपाल अमरीक सिंह और बच्ची की मां के खिलाफ 18 जून, 2019 को केस दर्ज हो गया। सीडब्ल्यूसी ने बालिका को एक वात्सल्य ट्रस्ट (Affection Trust) को सौंपने का निर्देश दिया।………….

पिछले डेढ़ साल से कस्टडी लेने का प्रयास


जैविक मां या बच्ची को जानने वाली माँ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह बहुत ही मजबूर परिस्थितियों में गोद लिया गया बच्चा था और उनको जो भी दिशा-निर्देश दिए गए थे, उनका पालन किया था – अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अपने मवक्किल की तरफ से याचना की “लेकिन अगर गोद लेना गलत पाया गया और अगर कुछ भी हल नहीं किया जा सकता है, तो मुझे मेरा बच्चा वापस किया जाना चाहिए”,।

बता दें कि अमरीक सिंह का परिवार पिछले डेढ़ साल से बच्ची की कस्टडी के लिए बार-बार सीडब्ल्यूसी और बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा रहा है। लेकिन हाईकोर्ट इस बात पर अड़ा रहा कि इन परिस्थितियों में सीडब्ल्यूसी ने सही काम किया। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अमरीक सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की , और इसके लिए उन्हें तलाश थी किसी ऐसी team की जो Supreme court में उनकी याचिका को मज़बूती से रख सके ,उन्होंने दिल्ली के जाने माने Advocates से संपर्क साधना शुरू किया अंततय: अमरीक सिंह ने Advocate Syed Mehdi Imaam , Advocate Pervez Dabas और Advocate Uzmi Jameel Husain की टीम से परामर्श के बाद इत्मीनान जताया ,और भरोसा भी | वकीलों की इस टीम ने case supreme court में पेश करने के लिए तथ्यों और सुबूतों को इकठ्ठा किया .जिसके आधार पर JJ Act के सम्बन्ध में देश में एक नज़ीर क़ायम हो गयी और अब Supreme Court के इसी फैसले को शायद नाज़ीर बनाते हुए दिल्ली सरकार ने पालक देखभाल योजना शुरू कि और इसके बाद लोग अनाथ और निराश्रित बच्चों को गोद ले सकेंगे .इस योजना के तहत दिल्ली सर्कार ने बाल कल्याण समिति को गोद लेने वालों के चयन कि ज़िम्मेदारी दी है .याद रहे दिल्ली में यह योजना पहली बार लागू हो रही है . Times Of Pedia (TOP) Special Correspondent Exclusive Report

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