कांग्रेस के लिए संजीवनी हो सकता है यह …

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Omendra Saxena

आप मानते हैं ना की लोकसभा चुनाव सर पर है, धड़ाधड़ धड़ाधड़ लोक लुभावने मंत्र पढ़े जा रहे हैं शिलान्यास हो रहे हैं लोकार्पण हो रहे हैं। अब वो चाहे काम कंप्लीट है या ना है मगर लोकार्पण करना जरूरी है।।यह इसी बार नहीं हो रहा हर बार चुनाव से पहले चाहे विधानसभा के हो या लोकसभा के यही होताआया है और अंत में मतदाता ठगा सा खड़ा रह जाता है।

कोटा की बात करें,तो आजादी के बाद पहले चुनाव से पिछले अंतिम चुनाव तक जनसंघ और टूटकर बनी भाजपा का दबदबा रहा है, इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस कभी खाता ही नहीं खोल पाई हो, कांग्रेस ने भी खाते खुले हैं उनके भी सांसद बने हैं नेमीचंद, शांति धारीवाल, राम नारायण मीणा, इज्येराज सिंह जैसे कई नाम है .

मगर ज्यादा बार कब्जा जनसंघ और भाजपा का ही रहा है। यही हाल वर्तमान मे कोटा बूंदी लोकसभा सीट का है जहां पिछली तीन बार से भाजपा के ओम बिरला काबिज हैं और उन्हें हराकर किसी अन्य बंदे का आना नामुमकिन नहीं तो नाको चने चबाना जैसा जरूर होगा।

क्योंकि कांग्रेस के पास उस कैलिबर का कैंडिडेट या नेता ,मैदान में तो कम से कम नहीं है । वैसे भी कांग्रेस से छिटक-छिटक कर लोग भाजपा की शरण में जा रहे हैं ऐसे में कब कौन कांग्रेस से किनारा कर लेगा अचरज की बात नहीं होगी, किंतु ऐसा नहीं है कि यह बात केवल कांग्रेस में ही है भाजपा का एक धड़ा भी अपने आप को उपेक्षित महसूस करता हुआ अपने ताने-बाने में बुनने में जुटा हुआ है।

जीत की ओर जाते हुए अचानक हर का मुंह देख चुके प्रहलाद गुंजल इस उठा पटक के बहुत बड़े शिकार रह चुके हैं जिन्हें उन्हीं की पार्टी के वरद हस्त प्राप्त नेताओं ने हराने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। दो बार चोट खाए हुए गुंजल और उनके समर्थनों की बात करें या उनके मन को टटोले, तो भाजपा से मोह भंग सा लगना प्रतीत होता है।

कांग्रेस के पास लोकसभा सांसद पद के उम्मीदवार के लिए एक दो नाम जरुर उछले हैं जिन मे बूंदी के गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र के अशोक चांदना का नाम सबसे ऊपर गिनाया जा सकता है, वही रामनारायण मीणा का नाम भी चलाया जा सकता है जबकि वह हारे हुए कैंडिडेट में शुमार हो चुके हैं।

ऐसे में यदि कोटा बूंदी लोकसभा सीट पर BJP को कड़ी टक्कर देनी है,  तो गुर्जर समाज का समर्थन आज की तारीख में जरूरी हो गया है कांग्रेस के लिए। और ऐसे में एक ही नाम निकल कर आता है अगर उस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल अपना वरद हस्त रख दें और सांसद पद के लिए उनके नाम पर सहमति दे दें तो शायद भाजपा से कुंठित चल रहे प्रहलाद गुंजल इस उम्मीदवारी में 100% खरे उतर सकते हैं।।

मैं हार जीत की कतई बात नहीं कर रहा मगर एक भीषण समर भीषण संग्राम कोटा बूंदी लोकसभा सीट पर लोगों को देखने को मिल सकता है। बस जरूरत है प्रहलाद गुंजल को अपने खेमे में लाने की पुरजोर कोशिश करने की और यह भागीरथी प्रयास कौन कर सकता है यह एक बार देखना होगा।

कांग्रेस हाई कमान को भी चाहिए कि गिरती सांसों को ऑक्सीजन की जरूर अगर महसूस हो रही है तो प्रहलाद गुंजल नाम की रामबाण औषधि कोटा बूंदी लोकसभा सीट के लिए संजीवनी सिद्ध हो सकती है। यह मेरे निजी विचार हैं इसमें वाद-विवाद की आवश्यकता नहीं है आपके विचार मुझसे भिन्न हो सकते हैं मगर मुझे अपनी बात अपने विचार रखने का उतना ही हक है जितना देश की हर नागरिक को।

लेखक राजस्थान से DD के लिए Photo Journalist की हैसियत से अपनी सेवाएं देते रहे हैं

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