केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा–केवल राजनीतिक फायदे के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे विपक्षी दलों के नेताओं का दोहरा चरित्र उजागर हुआ

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्‍ठ नेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा है कि कांग्रेस और गैर भाजपा दल केवल सरकार के प्रयासों के विरोध के लिए ही देश में विरोध प्रदर्शनों में शामिल होती हैं। उन्‍होंने कहा कि विपक्षी दलों के कार्यों से पता चलता है कि वे अपने राजनीतिक‍ अस्तित्‍व को बचाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।

नये कृषि कानूनों का कांग्रेस पार्टी द्वारा विरोध किए जाने की चर्चा करते हुए श्री प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी 2019 के अपने चुनाव घोषणा-पत्र में कृषि कानूनों के संशोधन की बात कह चुकी है। उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस, राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी और अन्‍य विपक्षी दलों द्वारा राजनीतिक लाभ प्राप्‍त करने के लिए इन कानूनों का विरोध किया जा रहा है। इससे उनके दोहरे चरित्र का पता चलता है।

प्रसाद ने कहा कि राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता शरद पवार 2005 में ही कृषि कानूनों में संशोधन की वकालत कर चुके हैं और अब राजनीतिक लाभ के लिए इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं।

प्रसाद ने कहा कि किसानों के बीच यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि नरेन्‍द्र मोदी सरकार बड़ी कम्‍पनियों के साथ साठ-गांठ करके किसानों को बर्बाद करना चाहती है। उन्‍होंने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान भी ठेके पर आधारित कृषि की सिफारिश की गई थी। उन्‍होंने यह भी कहा कि अनेक राज्‍य सरकारों ने अपने यहां ठेका कृषि लागू की थी और इनमें कई कांग्रेस शासित राज्‍य भी शामिल थे।

श्री प्रसाद ने कहा कि ठेका खेती के प्रावधानों के अन्‍तर्गत किसानों की भूमि न तो लीज पर दी जा सकती है, न बेची जा सकती है और न ही गिरवी रखी जा सकती है। ठेके में भूमि शामिल नहीं होगी और केवल उनकी उपज की बिक्री से ही सरोकार होगा। उन्‍होंने कहा कि कृषि कानूनों के बारे में सभी हितधारकों के साथ विस्‍तृत बातचीत के अलावा प्रशिक्षण और विचारों के आदान-प्रदान कार्यक्रम चलाए गए थे। इस वर्ष जून से अब तक इस विषय पर एक लाख सैंतीस हजार वेबीनार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिनमें लगभग बानवे लाख बयालीस हजार किसानों ने हिस्‍सा लिया।

प्रसाद ने कहा क‍ि इस वर्ष नवम्‍बर तक साठ हजार करोड़ रुपये मूल्‍य के तीन सौ अठारह लाख टन धान की खरीद की गई। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि इसमें से दो सौ दो लाख टन धान की खरीद केवल पंजाब से की गई थी।

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