बॉक्सर लवलीना ने की मानसिक प्रताड़ना की शिकायत, कहा- आठ दिन पहले मेरी ट्रेनिंग रोक दी गई

ओलंपिक पदक विजेता महिला बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन फिलहाल राष्ट्रमंडल खेलों ,कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने के लिए बर्मिंघम में हैं।

खेलों में उनके मैच में अभी आठ दिन का समय शेष है। हालांकि, आठ दिन पहले लवलीना ने मैनेजमेंट पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। लवलीना ने कहा है कि उनके कोच के साथ बुरा व्यवहार किया जा रहा है, जिसकी वजह से वह बहुत परेशान हैं।

राष्ट्रमंडल खेलों में उनके मैच से आठ दिन पहले उनकी ट्रेनिंग रुक गई है।लवलीना ने ट्विटर पर लिखा- आज मैं बड़े दुख के साथ कहती हूं कि मेरे साथ बहुत प्रताड़ना हो रही है। हर बार मेरे कोच, जिन्होंने मुझे ओलंपिक में पदक लाने में मदद की, उन्हें बार-बार हटा कर मेरी ट्रेनिंग और मेरे कॉम्पिटिशन में दखल डालते हैं और मुझे प्रताड़ित करते हैं। इनमें से मेरी एक कोच संध्या गुरुंग द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित भी हैं। मेरे दोनों कोच को कैंप में भी ट्रेनिंग के लिए हजार बार हाथ जोड़ने के बाद बहुत लेट से शामिल किया जाता है।

लवलीना ने लिखा- मुझे इससे ट्रेनिंग में बहुत परेशानियां उठानी पड़ती हैं और मानसिक प्रताड़ना तो होती ही है। अभी मेरी कोच संध्या गुरुंग कॉमनवेल्थ विलेज के बाहर हैं और उन्हें एंट्री नहीं मिल रही है और मेरी ट्रेनिंग मेरे मैच के आठ दिन पहले रुक गई है। मेरे दूसरे कोच को भी वापस भेज दिया गया है। मेरी इतनी विनती के बाद भी ये हुआ, इससे मुझे बहुत मानसिक प्रताड़ना हुई है। मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मैं अपने गेम पर कैसे फोकस करूं। इसके चलते मेरी पिछली वर्ल्ड चैंपियनशिप भी खराब हुई थी। इस राजनीति की वजह से मैं राष्ट्रमंडल खेलों में अपने प्रदर्शन को खराब नहीं करना चाहती हूं। आशा करती हूं कि मैं मेरे देश के लिए इस राजनीति को तोड़कर पदक ला पाऊं। जय हिंद।

लवलीना ने पिछले साल टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए कांस्य पदक जीता था। उन्होंने ओलंपिक में 69 किग्रा भार वर्ग में चीनी ताइपे की पूर्व विश्व चैंपियन निएन चिन चेन को 4-1 से हराकर ओलंपिक में अपना पदक पक्का किया था।लवलीना ने ये आरोप किस पर लगाए हैं, अब तक यह साफ नहीं हो पाया है। हालांकि, इससे यह साफ है कि खेल गांव में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी बीएफआई ने खिलाड़ियों और स्टाफ की जो पहली लिस्ट भेजी थी, उसमें संध्या गुरुंग का नाम नहीं था।

इसके बाद बीएफआई ने एक अपडेटेड लिस्ट भेजी थी, उसमें भी संध्या को नहीं रखा गया था। बाद में लवलीना की मांग पर संध्या का नाम भारतीय खेल प्राधिकरण को भेजा गया। ऐसे में साई ने संध्या को भेजने के लिए हामी भर दी थी। अब जब संध्या बर्मिंघम पहुंचीं तो उन्हें खेल गांव में एंट्री नहीं दी जा रही है।

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