Bihar Election2020:मुद्दे खामोश मौत की चर्चा ………….

देवेंद्र यादव कोटा राजस्थान

….और विकल्प परिवारवाद और जातिवाद में परिवर्तित हो गया !


बिहार चुनाव- 2020 “: जेपी आंदोलन के छात्र नेता बने आज ……जानें इतिहास

भारतीय राजनीति में, जेपी आंदोलन ने 1977 में पहली बार कांग्रेश और इंदिरा गांधी का विकल्प देश को दिया था, लेकिन देश में कांग्रेस का विकल्प स्थाई रूप से नहीं टिक पाया, विकल्प बनते आए और बिखरते गए !


बात बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर हो रही है इसलिए बिहार की राजनीति पर ही बात होनी चाहिए !जेपी आंदोलन से बिहार के अंदर एक साथ तीन नेता लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान का उदय हुआ !


लालू प्रसाद यादव प्रदेश की राजनीतिक सियासत मैं मुख्यमंत्री बनकर बिहार राजनीति के सिरमौर बने वही नीतीश कुमार और रामविलास पासवान केंद्र की सियासत मैं अपना रुतबा जमाने में कामयाब रहे, यह सिलसिला लंबे समय तक चला लेकिन एक समय बाद राजनीति ने करवट ली और नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति की तरफ कूच किया और वह राज्य के मुख्यमंत्री बने और लालू प्रसाद नीतीश कुमार का स्थान लिया यानी लालू यादव ने केंद्र की राजनीति का रुख किया !

जेपी आंदोलन से उत्पन्न छात्र नेता बिहार और देश की सियासत में महत्वपूर्ण स्थान रखने के बावजूद, बिहार को संपन्न राज्य में परिवर्तित नहीं कर पाय बल्कि बिहार की राजनीति परिवारवाद और जातिवाद के दलदल में इतनी फस गई है कि, देश के दो बड़े दल कांग्रेस और भाजपा इस दलदल में फस कर अपने अपने अस्तित्व को बचाने और जिंदा रखने के लिए बिहार के क्षेत्रीय दलों से क्षेत्रीय दलों की शर्तों पर चुनावी समझौता करने के लिए विवश हो गए !


बिहार चुनाव 2020 ने जनता के सरोकार के मुद्दे इस समय गायब नजर आ रहे हैं, इसका स्थान फिल्म एक्टर सुशांत सिंह की मौत ने ले रखा है !


भाजपा के कला और संस्कृति विभाग ने, ” हम नहीं भूले हैं और नहीं भूलेंगे ” स्लोगन के साथ एक पोस्टर अभियान बिहार में शुरू कर दिया है, वैसे तो बिहार के अप्रवासी मजदूर भी, पोस्टर और स्लोगन तो जारी नहीं कर पाए मगर उनके दिलों के अंदर भी, शायद, उनके पैदल चलते पढ़े पैरों के छाले उन्हें भी याद दिलाते होंगे और मन में बोलते होंगे , ” हम ना भूले हैं और नहीं भूलेंगे “

बिहार के इस चुनाव में एक बार फिर से लालू नीतीश और पासवान के युवा दौर की यादें ताजा होंगी क्योंकि इस चुनाव में तीन युवा नेता तेजस्वी यादव , चिराग पासवान और कन्हैया कुमार बिहार की सत्ता के खिलाफ चुनावी जंग में चुनौती देने के लिए तैयार हैं !


अभी चुनाव की घोषणा होना बाकी है चुनावी समीकरण क्या होंगे क्या वह बदलेंगे और मुद्दे क्या-क्या होंगे यह चुनाव की घोषणा और चुनाव के वक्त नजर आएंगे इंतजार कीजिए !

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