वेडिंग कार्ड के नाम पर भेजी जा रही एपीके फाइल से रहें सावधान

जयपुर, 05 अक्टूबर । शादी के सीजन के साथ ही साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया के जरिए शादी के निमंत्रण, होटल का पता, वेडिंग कार्ड और प्री-वेडिंग फोटो-वीडियो के नाम पर संदिग्ध एपीके फाइल और फिशिंग लिंक भेजकर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम विंग आर4सी ने इस तरह की साइबर ठगी को लेकर आमजन को सतर्क किया है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि साइबर ठग संदिग्ध फाइल डाउनलोड करवाकर मोबाइल में हानिकारक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं। इसके जरिए निजी जानकारी, एसएमएस, ओटीपी, बैंकिंग विवरण और अन्य संवेदनशील डेटा चोरी किए जाने का खतरा रहता है। ठग संदेश में ‘शादी का कार्ड और होटल का पता भेजा है’ या ‘प्री-वेडिंग की फोटो-वीडियो हैं, जरूर देखना’ जैसे संदेश भेजकर फाइल खोलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

पुलिस के अनुसार शादी का कार्ड, फोटो या वीडियो देखने के लिए एपीके फाइल डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होती। सामान्यत: शादी के निमंत्रण पीडीएफ, जेपीजी या पीएनजी इमेज के रूप में भेजे जा सकते हैं। ऐसे में एपीके एक्सटेंशन वाली कोई भी संदिग्ध फाइल मिलने पर उसे डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए।

साइबर ठग शादी के निमंत्रण, होटल बुकिंग या वेडिंग कार्ड देखने के नाम पर फिशिंग लिंक भी भेज सकते हैं। लिंक खोलने पर फर्जी वेबसाइट मोबाइल नंबर, बैंकिंग जानकारी या अन्य निजी विवरण भरने के लिए कह सकती है। कुछ मामलों में संदिग्ध सॉफ्टवेयर डाउनलोड कराने का प्रयास भी किया जाता है।

साइबर अपराधी किसी परिचित का व्हाट्सऐप खाता हैक कर उसके नाम से भी संदिग्ध फाइल या लिंक भेज सकते हैं। परिचित के नंबर से संदेश आने के कारण लोग बिना पुष्टि किए लिंक खोल देते हैं। इससे मोबाइल में मौजूद फोटो, संपर्क, पासवर्ड, एसएमएस और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने का प्रयास किया जा सकता है। संक्रमित मोबाइल से संबंधित व्यक्ति के संपर्कों को भी ऐसे संदेश भेजे जा सकते हैं।

राजस्थान पुलिस ने लोगों से शादी के कार्ड या फोटो के नाम पर आने वाली एपीके फाइल डाउनलोड नहीं करने, मोबाइल में अनजान स्रोत से ऐप इंस्टॉल करने का विकल्प बंद रखने और संदिग्ध लिंक मिलने पर पहले संबंधित व्यक्ति से फोन कर पुष्टि करने की सलाह दी है। किसी अनजान लिंक पर बैंकिंग जानकारी या ओटीपी साझा नहीं करने को भी कहा गया है।

यदि गलती से संदिग्ध ऐप डाउनलोड हो जाए तो तुरंत इंटरनेट बंद कर मोबाइल को विमान मोड पर करने, संदिग्ध ऐप हटाने और विश्वसनीय सुरक्षा उपकरण से मोबाइल की जांच कराने की सलाह दी गई है। जरूरत पड़ने पर एम-कवच 2 या ई-स्कैन बॉट रिमूवल टूल का उपयोग किया जा सकता है।

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