बांग्ला साहित्य की मशहूर लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी नहीं रहीं

Date:

प्रगतिशील लेखक संघ (दिल्ली राज्य) बांग्ला साहित्य की मशहूर लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी के निधन पर अपार शोक व्यक्त करता है. महाश्वेता देवी का जाना एक अपूरणीय क्षति है. उनके अवसान से भारतीय भाषाओं की एक ऐसी लेखिका चली गयी है जो सामाजिक और राजनीतिक प्रतिबद्धता को लेखन का पहला कर्म समझती थी. वो भारतीय लेखन परंपरा की प्रगतिशील धारा की सशक्त हस्ताक्षर थी. वो समाज में हाशिए पर पड़े समूह की लेखिका थीं. उन्होंने हमेशा रोज़मर्रा की ज़िंदगी को नज़दीक से महसूस कर उसे लेखन का हिस्सा बनाने की वकालत की.

प्रगतिशील लेखक संघ का मानना है कि दबे-कुचले वंचित तबके की इस दमदार आवाज़ का खामोश हो जाना इस मुश्किल दौर में भारत के प्रगतिशील आंदोलन के लिए बड़ा आघात और एक मार्गदर्शक का चले जाना है. महाश्वेता देवी का पूरा परिवार प्रगतिशील समाजवादी आंदोलन में सक्रिय रहा है. उनके परिवार की सामाजिक-राजनीतिक प्रतिबद्धता को इस बात से समझा जा सकता है कि उनके चाचा ऋतिक घटक जो कि एक फिल्मकार थे, ने ताउम्र साम्यवादी रुझान वाली फिल्में बनाईं और उनके पति बीजोन भट्टाचार्य जो एक मशहूर रंगकर्मी थे, इप्टा के संस्थापक सदस्यों में थे.  

महाश्वेता देवी ने इस देश की तीन पीढ़ियों की बौद्धिकता को अपने वैचारिक लेखन से सींचा है. अब वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन हज़ार चरौसी की मां और जंगल के दावेदार जैसी उनकी रचनाएं आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक दस्तावेज़ के रूप में मौजूद होंगी. उन्होंने अपने पीछे समाजिक सरोकार वाले लेखन की जो परंपरा छोड़ी है उसे प्रगतिशील लेखक संघ और आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है.

जेनरल सेक्रेटरी- तारेंद्र किशोर    अध्यक्ष- केवल गोस्वामी

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

हिन्दुराष्ट्र वाला हिंदुस्तान ऐसा होगा?

.......अब अगर इसको हिंदु राष्ट्र बनाये जाने की बात...

भारत बना दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार

edited by maroof raza, senior journalist भारत रूस से तेल...

Religion, Wisdom, Demographics and the Misuse of Faith

“The wisdom that comes from God teaches love, justice,...

कमज़ोर होता लोकतांत्रिक दायरा और पीएम की उपलब्धियां

राम पुनियानी इस साल 10 जून को मोदी निरंतर भारत पर शासन...