अरुण जेटली स्मृति व्याख्यान में शामिल हुए पीएम मोदी, संबोधन के दौरान शिंजो आबे को किया याद.

Date:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ‘अरुण जेटली मेमोरियल लेक्चर’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी उपस्थित रही।

इस दौरान लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन मेरे लिए अपूर्णीय क्षति और असहनीय पीड़ा का दिन है। मेरे घनिष्ठ मित्र और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री श्री शिंजो आबे अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। आबे मेरे तो मेरे तो साथी थे ही, वे भारत के भी उतने ही विश्वस्नीय दोस्त थे।

आज भारत के विकास की जो गति है जापान के सहयोग से हमारे यहां जो कार्य हो रहे हैं, इनके जरिए शिंजो आबे भारत के जन-मन में सालों तक बसे रहेंगे।पीएमओ ने बताया था कि इस व्याख्यान में सिंगापुर की सरकार के वरिष्ठ मंत्री थरमन षणमुगरत्नम मुख्य विषय ‘‘समावेशिता के माध्यम से विकास, विकास के माध्यम से समावेशिता’’ पर भाषण देंगे।

व्याख्यान के बाद आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के महासचिव माथियास कॉर्मन और कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया एक पैनल चर्चा में शामिल होंगे। दरअसल, वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की ओर से अरुण जेटली के राष्ट्र के लिए अमूल्य योगदान को मान्यता देने के क्रम में प्रथम ‘अरुण जेटली स्मृति व्याख्यान’ आयोजित किया गया है।

प्रधानमंत्री 8 से 10 जुलाई तक आयोजित होने वाले तीन-दिवसीय कार्यक्रम कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत करेंगे। वह जिन प्रख्यात अर्थशास्त्रियों से मिलेंगे उनमें, जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय की ऐनी क्रुएगर, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निकोलस स्टर्न, हार्वर्ड केनेडी स्कूल के रॉबर्ट लॉरेंस, आईएमएफ के पूर्व कार्यवाहक प्रबंध निदेशक जॉन लिप्स्की, भारत के लिए विश्व बैंक के निदेशक जुनैद अहमद आदि शामिल हैं।

पीएमओ ने कहा कि केईसी का आयोजन वित्त मंत्रालय के सहयोग से आर्थिक विकास संस्थान द्वारा किया जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

आरएसएस-भाजपा और अमेरिका की दासता की ओर बढ़ता भारत

स्वतंत्रता के बाद भारत की  विदेश नीति गुटनिरपेक्षता के...

वेबवार्ता द्वारा हिंदी पत्रकारिता दिवस पर भव्य आयोजन

पत्रकारिता के सामने अनेक चुनौतियां हैं, जिनका समाधान ज़रूरी:...

शिक्षकों को भूसा इकठ्ठा करने पर क्यों लगाया?

उत्तर प्रदेश का शहर बरैली पिछले कई बरसों से...

Human Rights vs Funding: 558 UP Madrasas Case

Human Right never intersects with financial transactions: understanding law...