कैसे मढ़ा जाता है एक का दुसरे पर इलज़ाम , देखें एक झलक

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कैसे मढ़ा जाता है एक का दुसरे पर इलज़ाम , देखें एक झलक

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम मढ़ा फ़र्ज़ी बयान: “कश्मीर पर भारत अपना हक़ छोड़ दे”

योगी आदित्यनाथ की सेना (Yogi Adityanath ki Sena) नामक फेसबुक पेज ने एक तस्वीर पोस्ट की जो किसी हिंदी ई-पेपर के क्लिप से लिए गए लेख की तरह दिखती है। लेख का शीर्षक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का बताते हुए एक कथन था- “कश्मीर पर भारत अपना हक छोड़ दे, कश्मीर के लोग आजादी चाहते हैं।” यह पोस्ट 5,800 से ज्यादा बार शेयर किया गया है।

एक ट्विटर उपयोगकर्ता @RaviNEGI4BJP जो खुद को भारतीय जनता पार्टी का सदस्य बताते हैं और रेल मंत्री पियुष गोयल के कार्यालय का ट्विटर हैंडल जिन्हें फॉलो करता है, ने जून 2018 में वही समाचार पत्र का क्लिप शेयर किया था। इसके साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा था – “…कंजरी अली का बस चले तो दिल्ली को भी बेच दे।”

 

ऑल्ट न्यूज़ ने नकली क्लिप की संभावित उत्पति ट्विटर पर पाई। 2014 में, ऋषि बागरी ने इसी तरह की क्लिप को बदले हुए शीर्षक के साथ पोस्ट किया था जिसमें केजरीवाल की तस्वीर के जगह पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की तस्वीर थी।
https://twitter.com/rishibagree/status/431643428229632000/photo/1?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E431643428229632000&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.altnews.in%2Fhindi%2Ffake-quote-ascribed-to-delhi-cm-kejriwal-claims-he-said-india-should-give-up-kashmir%2F

Rishi Bagree @rishibagree

Guess Why no invite 2 Modi ?

1See Rishi Bagree ‘s other Tweet??

दोनों क्लिपों को एकसाथ देखने पर, असमानता स्पष्ट हो जाती है। यह न केवल एक ही लेख है, बल्कि दाईं ओर का लेख – “पाकिस्तान में जलाए गए भारतीय ध्वज” – भी वही है

 

 

चूँकि एक ही समाचार के दो क्लिप प्रसारित किए जा रहे हैं, तो दो संभावना है कि या तो यह क्लिप पूरी तरह से फोटोशॉप है या फिर असली न्यूज़ क्लिप को एक से ज्यादा बार बदला गया हो। ऑल्ट न्यूज़ ने यह पता लगाने के लिए कि यह यह फोटोशॉप है या नहीं, कुछ की वर्ड्स जैसे “कश्मीर पर बातचीत के लिए न्योता” लेकर गूगल पर खोज की तो हमें दैनिक जागरण का 5 फरवरी, 2014 का एक लेख मिला। यह लेख और वायरल क्लिप में काफी समानता है। इस लेख के तुरंत बाद 7 फरवरी, 2014 को ऋषि बागरी ने अलग शीर्षक वाले क्लिप के साथ ट्वीट किया।

 

जागरण की रिपोर्ट पढ़ने से पता चलता है कि इसके ऑनलाइन ई-पेपर संस्करण को फोटोशॉप कर के फेर-बदल किया गया है। दैनिक जागरण का लेख पूरा उस क्लिप से मेल खाता है बस कुछ शब्दों के साथ हेर-फेर की गई है। लेख में “भारत” के जगह “केजरी” कर दिया गया है। जब उस वायरल क्लिप और जागरण के लेख को एकसाथ रखा गया तो अंतर साफ़ देखा जा सकता है।

 

 

इस तरह हमने पाया कि ई-पेपर क्लिप नकली थी जिसे गलत सूचना का प्रचार करने के लिए बनाकर फैलाया गया था। 2016 में Mobilenews24.com जैसी वेबसाइटों ने भी इस पर लेख लिखे थे लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया था। यही नहीं एक बार फिर ऋषि बागरी ने 2016 में भी इसी पेपर के क्लिप को ट्वीट किया था।

Sunil Joshi(A Rebel)
@suniljoshi002
Another GreatWork #सेक्युलरबाप #AAPtard @TheDeepUpreti कश्मीर पर भारत अपना हक़ छोड़ दे,कश्मीर पाक का:@ArvindKejriwal http://mobilenews24.com/national/nawaz-sharif-invited-kejriwal/ …

2:25 PM – Jul 11, 2016
See Sunil Joshi(A Rebel)’s other Tweets
Twitter Ads info and privacy
एक ट्विटर उपयोगकर्ता जिन्हें पियुष गोयल का कार्यालय और नकली समाचार वेबसाइट पोस्टकार्ड न्यूज ट्विटर अकाउंट फॉलो करते हैं, ने पिछले साल इस समाचार क्लिप को शेयर किया था।

 

जय जगन्नाथ@jagannathdas801

See जय जगन्नाथ’s other Tweets

पहली बार नहीं

विघटनकारी सूचनाएं फैलाने के लिए सोशल मीडिया में प्रसारित, बनाए हुए ई-पेपर क्लिप की यह कोई पहली घटना नहीं थी। जुलाई 2017 में, भाजपा सांसद प्रताप सिन्हा ने टाइम्स ऑफ इंडिया के लेख को बदले हुए शीर्षक के साथ ट्वीट किया था। इससे पहले जून में, बनाए हुए समाचार पत्र क्लिप का उपयोग करके पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के नाम से नकली उद्धरण दिया गया था। उसी महीने, एक अन्य फर्जी ई-पेपर क्लिप को हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रोहित वेमुला के नाम से प्रसारित किया गया था।

इंटरनेट पर दैनिक समाचार के उपभोक्ताओं के रूप में, हम ई-पेपर क्लिप पर विश्वास करने के अभ्यस्त हैं क्योंकि उनमें वास्तविकता अंतर्निहित रहती है। फिर भी, सोशल मीडिया में चलने वाले, बनाए या हेर-फेर किए हुए समाचार क्लिप के उदाहरणों के मद्देनज़र, खुद से एक तथ्य-जांच जरूरी है। इस तरह की क्लिप की प्रामाणिकता देखने के लिए, क्लिप के लेख से कोई भी वाक्य लेकर उसे गूगल पर खोजा जा सकता है। ई-पेपर वाले अधिकांश मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट के ऑनलाइन संस्करण होते हैं और यदि खबर वास्तविक होगी तो ये दिखाई देंगे।

गलत जानकारी फैलाना आसान है, मगर एक त्वरित तथ्य-जांच से नकली समाचार के आगे संचलन पर रोक लगेगी।

अपने पाठकों के लिए उदाहरण के तौर पर उपरोक्त पोस्ट altnews.com से सभार लेकर डाली है , किरपा करके देश और इंसानियत हक़ में इसको समझें और दूसरोंको भी समझाएं ,अन्यथा देश टूट जाएगा .

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