आज़ादी है उन्माद

डॉ सुनीता चौहान

आज़ादी

आज़ादी है उन्माद
मस्त गगन में उड़ने की कवायद।
कोई चाहे संस्कारों से छुटकारा
और परंपराओं का निर्वाह है ना गवारा
किसी को परिवार व समाज़ के संबंध हैं चुभते
तो कोई कानून तोड़ना है चुनते
आज़ादी है उन्माद
मस्त गगन में उड़ने की कवायद।

पर यदि कोई वृक्ष
अपनी जड़ों को बंधन माने
सोचे-विचारे, कि कैसे ये डोर टूटे
तब अलग होकर स्वयं जाने
कि कैसे यह जीवन छूटे
जिसको समझ रहे थे आज़ादी
वो तो असल में है बर्बादी-२
आज़ादी है उन्माद
मस्त गगन में उड़ने की कवायद।

कुछ भी बोलने, करने व पहनने की आज़ादी
चाह रही है सारी आबादी
उस पर कुछ नेता अलबेले
अंधियारे में दे रहे धकेले
और कुछ नहीं बस
गुमराह जनता को करके बर्बस
बढ़ाना चाहते हैं अपना वर्चस्व
आज़ादी है उन्माद—

तो क्या निरंकुशता, उद्दंडता और नग्नता ही है असली आज़ादी
अनुशासनहीनता ही है, क्या असली स्वतंत्रता
समाज, परिवार और कर्तव्यों से भागना
है नहीं आज़ादी, ज़रूरी है यह जानना,
अगर स्वतंत्रता दिवस है मनाना ।
आज़ादी है उन्माद…..

स्वतंत्रता दिवस पर
हमें चाहिए, आर्थिक निर्भरता से आज़ादी
बीमारियों से आज़ादी
भ्रष्टाचार से आज़ादी
कुपोषण, रिश्वत व घूसखोरी से आज़ादी
पेपर लीक करने वालों से आज़ादी
बेईमान अफसरों से आज़ादी
चोर, लुटेरों और बलात्कारियों से आज़ादी
प्रदूषण से आज़ादी
अशिक्षा और सांस्कृतिक गुलामी से आज़ादी
बेरोज़गारी और दूषित विचारों से आज़ादी
देश द्रोहियों और सनातन विरोधियों से आज़ादी
तभी तो होगी सच्ची आज़ादी-२

पतंजलि योग समिति के विभिन्न प्रकल्प
ऐसी सच्ची आज़ादी का लेकर संकल्प
करते और कराते योग
बतलाते वनस्पतियों के सही उपयोग
कराते आयुर्वैदिक औषधियों का भोग
अच्छे स्वास्थ्य का बनाते जोग ।
बनाकर भारतीय शिक्षा बोर्ड
थाम रहे शिक्षा में संस्कारों की डोर
तो आओ चलें उस ओर
खुशहाल ज़िंदगी हो जिस ओर
भारत को फिर बनाएं सोने की चिड़िया
लेकर समझदारी की पुड़िया
आजादी है न कोई गुड़िया
कि मनचले लें सकें बलैया
आज़ादी तो है वो मुक़ाम
कि छूट जाएं मुश्किलें तमाम ।
आओ स्वस्थ, समृद्ध, प्रबुद्ध और प्रभावान बनें
मां भारती को अमर करें
मां भारती को अमर करें।

।।।।जय हिन्द, जय भारत।।।।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.