आर्थिक तंगी से उपजे तनाव और आत्महत्या की घटनायें

Date:

गिरीश मालवीय

लॉकडाउन ने भारतीय परिवारो की बचत को ध्वस्त कर दिया है, सबसे बुरी हालत इस वक्त मिडिल क्लास की है इन दिनों कई मिडिल क्लास परिवार उधार ले-लेकर अपना काम चला रहे है। आज एक रिपोर्ट आई है जिसमे कहा गया है कि भारतीय परिवार पर कर्ज बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 37.3 फीसदी तक पहुंच गया है। यह इससे पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में 32.5 प्रतिशत था।

परिवार के कर्ज का अनुमान बैंकों, हाउसिंग फाइनांस कंपनी, गैर-बैंकिंग फाइनांस कंपनियों के लिए उसकी देनदारियों का जीडीपी में जो अनुपात है उससे लगाया जाता है। इस बार एक वित्तवर्ष में लगभग 5 प्रतिशत का उछाल आया है यह स्थिति खतरनाक है क्योंकि भारतीय परिवार की बचत घट रही हैं रोजगार में लगे लोगो की संख्या काफी हद तक घटी है।

इन सब परिस्थितियों के लिए मोदी सरकार के गलत आर्थिक निर्णय ही जिम्मेदार है पारिवारिक कर्ज का स्तर जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से बढ़ रहा है। लेकिन वास्तव में इसकी शुरुआत नोटबन्दी जो 8 नवम्बर 2016 से हुई है।

इस साल अप्रैल में पर्सनल लोन में 12.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई. वाहन के लिए लिये गए कर्ज में 11.7 प्रतिशत की वृद्धि, क्रेडिट कार्ड के जरिए लिये गए कर्ज में 17 प्रतिशत की और सोने के जेवरों को गिरवी रखकर लिये गए कर्ज में 86 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि देखी गयी है।

पहले जो लोन लिए जाते थे वह कंज़्यूमर ड्यूरेबल पर लिए जाते थे इससे इकनॉमी को भी गति मिलती थी अप्रैल में कंज़्यूमर ड्यूरेबल के लिए लिये जाने वाले पर्सनल लोन में 18 प्रतिशत की कमी आई।

यानी अधिकांश लोन इलाज के खर्च में घर का खर्चा चलाने में मकान दुकान का किराया भरने में इस्तेमाल हो रहे हैं दूसरी लहर के दौरान लिए गए कर्ज चुकाने का असर उपभोग पर पड़ेगा। यानी आर्थिक वृद्धि का पूरा चक्र ही मंद हो रहा है।

मिडिल क्लास इस बार कर्ज के ऐसे भंवर में फंसा है जिसमें से उसका निकलना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है। आप देख ही रहे हैं कि आर्थिक तंगी से उपजे तनाव में कई परिवारों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ऊपर से पेट्रोल डीजल के महंगे दामों के कारण महंगाई सुरसा के मुँह की तरह बढ़ रही हैं। मिडिल क्लास के लिए आने वाला दौर चुनोतियाँ से भरा हुआ है।

Disclaimer (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति टाइम्स ऑफ़ पीडिया उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार टाइम्स ऑफ़ पीडिया के नहीं हैं, तथा टाइम्स ऑफ़ पीडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

जौहर यूनिवर्सिटी, जंतरमंतर पर धरना और आमरण अनशन

अब देश में शिक्षा और शिक्षा केंद्रों की रक्षा...

लोकतंत्र का अपहरण: जब सत्ता सवाल से और….

कपिल बर्मन (जाग्रत भारत) लोकतंत्र का अपहरण: जब सत्ता सवाल...

सांप्रदायिक शक्तियों ने माहौल को पूरी तरह खराब कर दिया है: मदनी

प्रेस विज्ञप्ति नफ़रत की आँधियों में हम मोहब्बत के चिराग़...

जौहर विश्वविद्यालय कौम की अमानत……

जौहर विश्वविद्यालय कौम की अमानत, इसकी सुरक्षा सरकार की...