मीडिया संस्थानों के नाम खुला पत्र

प्रिय,

24 मार्च 2020 के बाद अपने देश के नागरिकों को बहुत ही बुरे दौर से गुजरना पड़ा है, जब कोविड-19 से बचाव के लिए पूरे देश में लॉकडाउन उन की घोषणा की गई। चूंकि कोरोना संक्रमण से न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया जूझ रही है, इसलिए इसका पूरे विश्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। भारत की एक बड़ी आबादी पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति में जीवनयापन कर रही थी, जिसे इस लॉकडाउन ने आर्थिक एवं सामाजिक रूप से बहुत ही पीछे कर दिया। इस लॉकडाउन का प्रभाव न केवल गरीबों पर बल्कि मध्यम वर्ग पर भी पड़ा है। देश की आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप्प पड़ गई। इससे मीडिया संस्थान भी अछूते नहीं रहे।

एक ओर मीडिया अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए लगातार समाचारों को जुटाने एवं उसे प्रकाशित और प्रसारित करने में लगा रहा तो दूसरी ओर उसे राजस्व की भारी कमी से भी जूझना पड़ा। निःसंदेह मीडिया संस्थानों के लिए विज्ञापन राजस्व का एक प्रमुख जरिया है, जो कि लगभग बंद सा हो गया था। ऐसे समय में जब पत्रकार अपने को जोखिम में डालते हुए अखबारों एवं टेलीविजन के लिए खबरें जुटाते रहे, तब बड़े पैमाने पर उन्हें नौकरी से निकाले जाने और उनके वेतन में कटौती की घटनाएं भी सामने आई। देश में कई पत्रकारों ने इस दरम्यान कोरोना संक्रमण से अपनी जान भी गंवाई हैं और गंभीर आर्थिक संकट को भी झेला है।

अब जब अनलॉक के बाद लगभग सारी गतिविधियों की छूट मिल गई है और अखबारों एवं टेलीविजन में विज्ञापनों की संख्या भी बढ़ गई है, तब मीडिया संस्थानों की यह जिम्मेदारी बनती है, वह पत्रकारों के हित में कुछ ठोस निर्णय लें –

1. लॉकडाउन के दरम्यान निकाले गए सभी पत्रकारों को उनके पद पर पुनः नियुक्ति दें – यदि वे इस दरम्यान कहीं और काम करने के कारण या अन्य कारणों से पुनः न आना चाहें, तो यह उनकी मर्जी हो।

2. जिन पत्रकारों के वेतन में कटौती की गई थी, उनके वेतन को पुनः पूर्व की स्थिति में लाते हुए वेतन वृद्धि की जाए।

3. कुल काटे गए वेतन को एक तयशुदा किश्त के आधार पर आगामी वेतन के साथ अगले एक-दो साल में दिया जाए।

4. पत्रकारों के साथ-साथ संस्थान में कार्यरत अन्य कर्मचारियों के लिए भी उपरोक्त निर्णय लिए जाएं।

5. पत्रकारों को कोरोना संक्रमण के बाद इलाज कराने में परेशानी न हो, इसके लिए कोरोना संबंधी बीमा एक साल के लिए संस्थान कराएं, यदि पत्रकारों के मौजूदा किसी बीमा योजना में कोविड-19 कव्हर न हो रहा हो।

6. कोरोना संक्रमण के कारण जिन संस्थान के पत्रकारों की मृत्यु हुई है, उन संस्थानों द्वारा उनके परिवार को एक सम्मानजनक राहत राशि दिया जाए।

हम उम्मीद करते हैं कि मीडिया संस्थान अपने सामाजिक दायित्वों में उपरोक्त मुद्दों को शामिल करते हुए अपने-अपने संस्थान के संपादकीय टीम एवं अन्य सेक्शन के कर्मचारियों के प्रति मानवीय संवेदना दिखाते हुए उचित निर्णय लेंगे।

उचित निर्णय की अपेक्षा के साथ,

लज्जाशंकर हरदेनिया, भोपाल एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन

राजु कुमार, पत्रकार, भोपाल एवं सदस्य, इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन 

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