क्या ट्रम्प छेड़ सकता है भारत के खिलाफ ट्रेड वॉर ?

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क्या ट्रम्प छेड़ सकता है भारत के खिलाफ ट्रेड वॉर ?

जबकि अमरीका और चीन के बीच कारोबारी जंग काफी दिनों से चल रही है , ज़ाहिर है चीन रफ्ता रफ्ता पूरे एशिया पर अपना कारोबारी पंजा जमा चूका है , जो अमेरिका केलिए चिंता का विषय है

NEW DELHI :आपको बता दें मंगलवार की सुबह अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया जिसमे लिखा था , कि उनके निशाने पर केवल चीन ही नहीं है बल्कि भारत भी है। याद रहे ट्रंप की नीतियों के कारण भारत और अमरीका के बीच लगभग एक वर्ष से तनाव है।

ट्रंप ने मंगलवार को ट्वीट किया कि भारत अमरीकी उत्पादों पर भारी टैक्स लगा रहा है। इसे लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने चीन के साथ ट्रेड वॉर की शुरुआत की थी तो इसी तरह के दावे किए थे।

पिछले महीने भारत ने अमरीकी उत्पादों पर टैक्स लगा दिया था और यह भारत की जवाबी कार्रवाई थी। अमरीका ने एक जून को भारत को कारोबार में दी विशेष छूट वापस ले ली थी और कहा था कि इसके ज़रिए भारत अमरीकी बाज़ार में 5।6 अरब डॉलर का सामान बिना टैक्स के बेच रहा था।

आज कल दुनिया भर का ध्यान केवल अमरीका और चीन के ट्रेड वॉर पर है। दूसरी तरफ़ ट्रंप प्रशासन 2018 से ही भारत के साथ कारोबारी टकराव के रास्ते पर है। मार्च 2018 में जब ट्रंप ने इस्पात और एल्युमिनियम के आयात पर टैक्स लगाने की घोषणा की तो इसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ा।

मार्च में ही ट्रंप प्रशासन ने एक और बड़ा फ़ैसला लेते हुए भारत को ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 के तहत मिली विशेष छूट को ख़त्म कर दिया। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि भारत अमरीकी उत्पादों को अपने बाज़ार में बराबर और उचित पहुँच नहीं दे रहा है इसलिए यह फ़ैसला लिया गया।

भारत में एक जून से ट्रंप प्रशासन का यह फ़ैसला लागू हो गया। इसका मतलब ये था कि भारत भी कोई जवाब कार्रवाई करेगा। भारत ने भी कुछ ख़ास अमरीकी उत्पादों पर टैक्स लगा दिया। हालाँकि ट्रंप के इस अडयाल रवैये से भारत से निर्यात होने वाले 5।6 अरब डॉलर के कारोबार प्रभावित हो रहे हैं।

इधर भारत ने भी टैक्स के ज़रिए अमरीका के कृषि उत्पादों को टारगेट किया है। पीटरसन इंस्टिट्यूट फोर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स (PIIE ) के सीनियर रिसर्च स्कॉलर चैड बॉन ने एक मैगज़ीन को बताया , ”भारत के पलटवार से अमरीकी बादाम का निर्यात प्रभावित हुआ है। भारत कैलिफ़ोर्निया से 60 करोड़ डॉलर का बादाम आयात करता है और वॉशिंगटन से सेब का आयत भी बड़ी मात्रा में होता है ।”

इस हिसाब से देखें तो का भारत अमेरिकी वस्तुओं के कारोबार में नौवां बड़ा ट्रेड पार्टनर है। अगर दोनों देशों में करोबारी टकराव गहराता है तो अमरीकी कारोबार बड़े स्तर पर प्रभावित होगा जो अमेरिका की गिरती इकॉनमी को मरे पर सो धरे का काम करेगी ।

बीते वर्ष अमरीका ने भारत को 33.1 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया था जबकि भारत से 54.4 अरब डॉलर का आयात किया था। ज़ाहिर है इसमें अमरीका को 21.3 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हो रहा है।

अमरीका ने पिछले साल 7.9 अरब डॉलर के महंगे धातु और पत्थर का निर्यात भारत से किया था। ये सबसे महंगे निर्यात की श्रेणी में आते हैं। इसी तरह अमरीका ने 6.2 अरब डॉलर के खनिज ईंधन का भी निर्यात भारत से किया था।इसके अलावा 3.0 अरब डॉलर का एयरक्राफ़्ट उत्पाद और 2.2 अरब डॉलर की मशीनरी का निर्यात किया था। दूसरी तरफ़ पिछले साल अमरीका ने 11 अरब डॉलर के महंगे धातु और पत्थर का आायत किया था।

इसके अलावा 6.3 अरब डॉलर के मेडिकल उत्पाद, 3.3 अरब डॉलर की मशीनरी, 3.2 अरब डॉलर के खनिज ईंधन और 2.8 अरब डॉलर की गाड़ियां भारत से आयात की गयी थीं ।इस प्रकार अमेरिका भी भारत के उत्पादों का बड़ा खरीदार है , अब यदि दोनों के बीच कारोबारी जंग शुरू होती है तो इससे भारत की विदेशी मुद्रा में काफी कमी आसकती है जो भारत के लिए भी अच्छा नहीं होगा ।

अमेरिका द्वारा स्टील और एल्युमीनियम पर भरी टैक्स लगाने से भारतीय आयात भी प्रभावित हुए हैं। इसका असर इलेक्ट्रिकल उत्पाद, मशीनरी और केमिकल्स पर बह पड़ा है । शोध करता बॉन कहते हैं, ”टैक्सों के बढ़ने से भारतीय उत्पादों का निर्यात अमरीकी बाज़ार में मुश्किल होगा और इससे अमरीकी उपभोक्ता भी प्रभावित होंगे।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अंतरराष्ट्रीय व्यापार को फिर से आकार देने की कोशिश कर रहे हैं। वो कह रहे हैं इस युद्ध में अमरीका की जीत होगी। वो विदेश नीति में टैक्स को टूल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।ट्रंप का यह ट्वीट तब आया है जब दोनों देशों के बीच आधिकारिक रूप से कारोबार पर बातचीत होनी है। भारत ने अमरीका के 28 उत्पादों पर पिछले महीने पाँच जून से जवाबी टैक्स लगाया है।

भारत के इस फ़ैसले का विरोध अमरीका ने विश्व व्यापार संगठन में भी किया है। दूसरी तरफ़ भारत ने भी अमरीका के अतिरिक्त उत्पाद शुल्क का मुद्दा डब्ल्यूटीओ में उठाया है।

डब्ल्यूटीओ में भारत के पूर्व राजदूत जयंत दासगुप्ता ने लाइव मिंट से कहा है कि ट्रंप प्रशासन ने बातचीत से पहले ट्वीट कर दबाव बानने की रणनीति चली है। उनका कहना है कि ट्रंप ने पिछले महीने मोदी से बातचीत के पहले भी इसी तरह का ट्वीट किया था और उन्होंने इसी पैटर्न को आगे बढ़ाया है।

अमरीकी राष्ट्रपति ने ट्वीट किया था, ”मैं भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से मिलने जा रहा हूं। उनसे बात करूंगा कि भारत लंबे समय से अमरीका के ख़िलाफ़ टैक्स ले रहा है। यहां तक कि हाल ही में इसे बढ़ा दिया है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और भारत इसे वापस ले।”

ट्रम्प हर बार हार्ले डेविडसन बाइक पर भारत के 50 फ़ीसदी टैक्स का ज़िक्र करते हुए भारत को टेर्रिफ का किंग कहते हैं ।1990 के दशक के बाद से अमरीका और भारत के रिश्तों में मज़बूती बढ़ती गई। अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बाद से दोनों देशों के राष्ट्र प्रमुखों ने एक दूसरे को स्वाभाविक साझेदार माना।

भारत और रूस के कूटनीतिक और रणनीतिक साझेदारी और कारोबारी रिश्ते काफी मज़बूत रहे हैं , जबकि अमरीका के क़रीब आने में लंबा वक़्त लगा ।अब राष्ट्रपति ट्रंप के कारण एक बार फिर से दोनों देशों के रिश्तों में अविश्वास बढ़ा है। जिससे भारत और रूस के बीच कारोबार बढ़ने की उम्मीद बढ़ सकती है ।

आपको याद होगा ट्रंप , भारत को एचबी-1 वीज़ा और मेटल्स टैरिफ़ पर पहले ही झटका दे चुके हैं। अमरीका और भारत की दोस्ती को लेकर कहा जाता है कि अमरीका एक ऐसी शक्ति है जिस पर भरोसा करना मुश्किल होता है और भारत इसी वजह से इस दोस्ती को लेकर अनिच्छुक रहता है।जबकि अंतर राष्ट्रीय राजनीती के मद्दे नज़र भारत को अमेरिका गट का देश कहा जाता है ।

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