विवेक तिवारी की हत्या पीठ थपथपाने का नतीजा – रिहाई मंच

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विवेक तिवारी की हत्या पीठ थपथपाने का नतीजा – रिहाई मंच

आपरेशन क्लीन कहने वाले योगी और डीजीपी मासूम बच्चियों के पिता के कत्ल के गुनहगार

 

एंटी रोमियो स्क्वायड जैसी हिन्दुत्वादी जेहनियत से लैस पुलिस ने ली विवेक तिवारी की जान

लखनऊ 29 सितम्बर 2018। लखनऊ में एप्पल सेल फ़ोन कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की पुलिस आरक्षी प्रशांत चैधरी द्वारा सर में गोली मारकर की गई हत्या के लिए विभिन्न निजी संस्थाओं द्वारा योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया जारहा है ।रिहाई मंच ने भी बेहरोर हरियाणा में पहलू खान हत्या मामले में अदालत में गवाहों के बयान दर्ज करवाने जाते समय एडवोकेट असद हयात की गाड़ी पर फायरिंग की घटना को सत्ता संरक्षित करार देते हुए कहा कि पुलिस और सरकारी गुंडे आम नागरिक से लेकर हर उस इंसाफ की आवाज का कत्ल करने पर उतारु हैं जो उनके असंवैधानिक कामों के खिलाफ है।

रिहाई मंच ने कहा लखनऊ में विवेक तिवारी की हत्या योगी सरकार के उसी आपरेशन क्लीन का हिस्सा है जिसमें आम नागरिकों से उनके जीने का अधिकार छीना जा रहा है। फर्जी मुठभेड़ों के बाद अपराधी पुलिस वालों की पीठ थपथपाने वाले योगी और डीजीपी उन मासूम बच्चियों के पिता के कत्ल के गुनहगार हैं , जो अपने पिता की लाश को देकखर केहरहि थीं पापा मेरी बिरथ डे पर आपने जो सरप्राइज का वादा किया था वो कैसे पूरा करोगे , इत्यादि ।

फर्जी मुठभेड़ पर सवाल उठने पर आपरेशन क्लीन चलता रहेगा बोलने वाले डीजीपी बताएं कि पुलिस की ज़ेहनियत को कब क्लीन करेंगे।क्योंकि रखवालों की नीयत अगर बिगड़ चुकी है तो यह देश की शान्ति और जनता के विश्वास के लिए बहुत बड़ा घात है , जिसके बाद देश की तबाही का अभी आप लोगों को अंदाजा भी नहीं है .

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा जिस प्रकार एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी को गोमती नगर जैसे वीवीआईपी क्षेत्र में पुलिस आरक्षी प्रशांत चैधरी ने गोली का निशाना बनाया और उनका चरित्र हनन किया, ये वही कुठिंत मानसिकता है जो योगी एंटी रोमियो स्क्वायड के जरिए संचालित करते हैं।

विवेक एक प्रतिष्ठित कंपनी के एरिया मैनेजर थे और देर रात आईफोन की लांचिंग के बाद अपनी सहकर्मी सना खान को उनके घर छोड़ने जा रहे थे। ऐसे में यह आरोप कि उन्होंने आरक्षी पर कार चढ़ाने की कोशिश की यह पुलिस को बचाने की कोशिश है।

इसीलिए हिरासत के दौरान लगातार दोषी आरक्षी से मीडिया में बयान दिलवाया जाता रहा। हत्यारोपी आरक्षी के मुताबिक कार से विवेक तिवारी ने तीन बार उसे कुचलने की कोशिश की तो ऐसे में गाड़ी के टायर में गोली मारकर उसे रोकने पर मजबूर किया जा सकता था।

इसके अलावा पुलिस विवेक तिवारी की कार को संदिग्ध बता रही है तो क्या पुलिस यह बताएगी कि किसी कार में लड़का-लड़की होने से कैसे कोई संदिग्ध हो जाता है? जिस तरह से दोषी आरक्षी के बचाव में कुतर्क किए जा रहे हैं उससे आशंका पैदा होती है कि पुलिस निष्पक्ष नहीं करेगी .

इसलिए मामले की किसी अन्य एजेंसी से जांच करवाई जाए ताकि विवेक तिवारी के परिवार को इंसाफ मिल सके। इस मामले की चष्मदीद सना को जिस तरह से घर में नजरबंद करने की कोशिश हुई ठीक ऐसी ही कोशिश अलीगढ़ में मुठभेड़ के नाम पर मारे गए लोगों के परिजनों को हाउस अरेस्ट कर लिया गया था ।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि पहलू खान की हत्या के मुकदमें का बयान दर्ज करवाने के लिए बेहरोर जाते समय एडवोकेट असद हयात, पहलू खान के बेटों इरशाद, आरिफ, गवाहान अजमत और रफीक पर निमराना में उनकी गाड़ी को रोकने की कोशिश और फिर फायरिंग की गई। यह साफ करता है कि गौगुंडों को सरकार और पुलिस का पूरा संरक्षण है।

पहलू खान हत्या मामले में इंसाफ के रास्ते में रुकावट डालने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी पुलिस विवेचना में गौगुंडों के दबाव और सत्ता के इशारे पर इस हत्याकांड के केस को कमजोर करने का प्रयास किया गया। हत्यारों को आसानी से जमानत मिल जाने से ऐसे तत्वों के हौसले बुलंद हैं।

यादव ने आरोप लगाया कि पहलू खान मामले में हत्यारोपियों को मिली छूट की वजह से ही अलवर में नवम्बर 2017 में उमर खान और फिर जुलाई 2018 में रकबर खान की संगठित भीड़ के द्वारा हत्या की गई। उन्होंने कहा कि खट्टर शासन में पुलिस और साम्प्रदायिक संगठनों की मिलीभगत के कारण हरियाणा में अल्पसंख्यक, दलित और वंचित वर्ग के लोग सुरक्षित नहीं हैं।

राजीव यादव ने मांग की कि हरियाणा सरकार पहलू खान के परिजनों और इस हत्या के मामले से जुड़े अधिवक्ताओं और गवाहों को सुरक्षा प्रदान करे अन्यथा इस मुकदमें को किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित किया जाए।ऐसा न किये जाने पर यह मान लिया जाना चाहिए कि सरकार और गुंडों की मिलीभगत से देश का माहौल बिगाड़ने की पूरी कोशिश कि जारही है .
राजीव यादव
रिहाई मंच
9452800752

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