ख़ुदाई ख़िदमतगार देश की मज़लूम और ग़रीब जनता के बीच निस्वार्थ सेवा में विलीन

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ख़ुदाई ख़िदमतगार का बुनयादी उसूल संयम और सत्यता 

गुलाम देश में सब कुछ तो ठीक नहीं था, लेकिन जो सबसे मज़बूत और अच्छी बात थी वो थी हमारी साँझी विरासत , एकता और सद्भाव जिसके कारण यहां की भूखी,ग़रीब और निहत्थी जनता ने साम्राजयवादी अँगरेज़ हुकूमत को देश से खदेड़ दिया था और आज़ादी का परचम लहराया .

१७२० से १९४७ तक आज़ादी की इस जंग में लाखों हिन्दुस्तानियों ने अपनी जान की क़ुर्बानियां दी थीं जिसमें हिन्दू ,मुसलमान ,सिक्ख ,ईसाई, दलित सभी शामिल थे. उन्ही में से एक नाम है सरहदी गाँधी खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार खान का . इनकी बहादुरीऔर देश प्रेम के वाक़यात मशहूर हैं यहाँ संक्षेप में उनकी तंज़ीम खुदाई खिदमतगार का ज़िक्र करना हमारा मक़सद है

सरहदी  गाँधी ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान की  खुदाई खिदमतगार की स्थापना गाँधी जी के सत्याग्रह मूवमेंट को आगे बढ़ाने और देश में सम्रज्य्वादी ताक़तों को निकाल भगाने की नियत से की गयी थी ताकि देश की जनता आज़ादी और के साथ निडर होकर सांस ले सके .खुदाई खिदमतगार का बुनयादी उसूल संयम और सत्यता या सच्चाई था जिसपर खान साहिब ज़ोर देते थे .उनका कहना था कि ये ऐसे हथ्यार हैं इनके सामने कोई फ़ौज और पुलिस नहीं टिक सकती .

खुदाई खिदमतगार देश की मज़लूम और ग़रीब जनता के बीच निस्वार्थ भाव से सेवा करती थी रब की राजा के लिए काम करने में विश्वास रखती थी .

उसी के नक़्श ए क़दम पर चलते हुए देश में लगभग एक दशक पहले कुछ देश प्रेमियों ने खुदाई खिदमतगार को वापस ज़िंदा करने के लिए दिन ो रात की अनथक मेहनत और कोशिश से इसको आज देश के कई हिस्सों में जनता को शिक्षित करने और विकास कार्यों के लिए बिना तफ़रीक़ (निष्पक्ष ) रूप से सेवा करने के लिए समर्पित किया है .

जिसमें एक नाम है फैसल खान का जो खुद सिविल इंजीनियर हैं और उत्तर प्रदेश के क़ायम गंज शहर के पठान परिवार से सम्बन्ध रखते हैं .

फैसल खान की लम्बे अरसे से चल रही कोशिश और लगन के नतीजे में कई शिक्षा संस्थान , शेल्टर हाउसेस , सद्भावना केंद्र और सांस्कृतिक संस्थानों की स्थापना की है और देश के हिन्दू मुस्लिम , दलित तथा सभी वर्गों के लोगों को साथ जोड़कर सांप्रदायिक सद्भाव का माहौल बनाने में भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं जो आज देश की बड़ी ज़रूरत है

इसी दौरान हाल ही में खुदाई खिदमतगार ने जामिया नगर में “सबका घर” नाम से एक सर्व धर्म समभाव का प्रतीक बनाया है जिसमें हिन्दू मुस्लिम दलित तथा सिक्ख समुदाय के लोग आते हैं और एक साथ मिल जुलकर रहने की क़वाइद को प्रैक्टिस में ला रहे हैं .

हाल ही में करनाल के बल्हेड़ा गाँव में  शेख़ुल  हिन्द मौलाना महमूदुल हसन के नाम पर एक रूरल स्टडी सेन्टर की भी शुरुआत करदी गयी है जिसमें सभी धर्मों, वर्गों तथा समुदायों के लिए शिक्षा संबंधी जानकारी उप्लब्ध करवायी जायेगी।

नफरत के इस दौर में जब हर तरफ समाज को धर्मों , वर्गों और समुदायों में बांटा जारहा हो ऐसे में खुदाई खिदमतगार की यह कोशिश किसी तिर्यक से काम नहीं होगी . और सभी धर्मों के लोगों को एक साथ रहने का तज़र्बा देश में साझा विरासत और गंगा जमुनी तहज़ीब को ज़िंदा करने में मील का पत्थर साबित होगा ऐसी हमारी तमन्ना है और दुआ भी .

आखिर में हम खुदाई खिदमतगार की पूरी टीम को उनकी ख़िदमात के लिए मुबारकबाद पेश करते हैं और टाइम्स ऑफ़ पीडिया में एक स्पेस रेगुलर खुदाई खिदमतगार के नाम से सुनिश्चित करने का भी सुझाव अपने बोर्ड की समिति में रखने का वचन लेते हैं .top news bureau

 

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