शम्भुलाल मनचले आतंकी को हीरो बनाने वाली संस्थाओं का क्या होगा ?

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आपको पता है न पुलिस अक्सर बदनामी का शिकार रहती है मगर कभी कभी पुलिस कुछ ऐसे काम अंजाम दे जाती है की उसके ऊपर से सामूहिक तौर पर छाये बदनामी के बादल छट जाते हैं  , इसका प्रमाण राजस्थान के राजसमंद में एक बंगाली मज़दूर अफ़राज़ुल की निर्मम हत्या के अपराधी शम्भू लाल के केस में देखने को मिला जो उस दरिंदे ने एक युवती से अवैध संबंधों को छुपाने और समाज में बदनामी से बचने के लिए अंजाम दी ,और उसको सांप्रदायिक रंग देदिया था इस मामले में पुलिस ने 400 से अधिक पेज की चार्जशीट जमा करके यह सिद्ध करदिया की पुलिस हमेशा ग़लत नहीं होती , और पुलिस अगर ईमानदारी से काम करे तो समाज और देश में सांप्रदायिक सद्भाव का माहौल बनाया जासकता है .और क़ानून हाथ में लेने वालों के होंसले पस्त होंगे .

मनचले और वेह्शी हीरो के मामले में अब सच्चाई की परतें खुलने लगी हैं लेकिन सवाल यह पैदा होता है की उसको हीरो बनाने वाली संस्थाएं और लोग कहाँ हैं उस अपराधी को आर्थिक मदद करने वाली संस्थाओं पर जनता कार्रवाई की मांग करने लगी है !

 

क्या पुलिस उनपर भी कार्रवाई करने की योजना रखती है जिन्होंने कोर्ट परिसर में घुसकर तांडव किया और उसकी ईमारत पर चढ़कर भगवा झंडा लहराया , धरा 144 को तोड़ते हुए मानवता के दुश्मन और आतंकी के समर्थन में जमा भीड़ ने न्यायालय , संविधान , पुलिस और क़ानून की खुल्ले आम धज्जियाँ बखेरीं ,क्या उनपर देश द्रोह का मुक़द्दमा नहीं होना चाहिए , में इस तरह के सहयोगियों या संस्थाओं को हिंदुत्ववादी नहीं कहता बल्कि ये आतंकवादी और अराजकतावादी ग्रुप हैं जो देश को बर्बाद करना चाहते हैं .इसी देश में दर्जनों हिन्दू संस्थाओं और लाखों देशवासियों ने इस घटना की घोर निंदा की !

कितना विडंबनात्मक है की खुले आम जुर्म करने वालो के सहयोगी तांडव करते हुए पुलिस के 10 अधिकारी और 21 सिपाहियों को ज़ख़्मी करदेते हैं , अति दयनीय है इस प्रकार की घटना . धर्म को बदनाम कररहे हैं ये लोग .

 

अब जनता ये सवाल कररही है कि अपराधी के सहयोगी किस खाने में रखे जाएंगे ? क्या उन सबको सजा होगी जो खुले आम पुलिस पर पथराव कररहे थे .जो लोग कोर्ट परिसर में तांडव मचा रहे थे उनको न पुलिस क खौफ़ था और क़ानून का , ये वही लोग हैं जिनके आक़ा टीवी चैनलों पर देश के अल्पसंख्यकों को वन्दे मातरम ज़बरदस्ती कहलवाने के लिए मजबूर किया करते हैं , यहाँ भी वही नारा था हिन्दुस्तान में रहना होगा वन्दे मातरम् कहना होगा !

 

देश में इस प्रकार कि घटनाएं जहाँ दुनिया में हमारी पहचान को मिटाने का काम कररही हैं वहीँ देश के विकास और शान्ति के लिए बड़ा चेलेंज हैं यदि समय रहते इन दुर्घटनाओं पर रोक न लगी तो देश का ताना बाना टूटकर एक उलझन बन जाएगा जिसको सुलझाना सरकारों की बस से बाहर होगा.

 

दरअसल गंगा जमनी तहज़ीब , अनेकता में एकता , वसुधेव: कुटुम्भकम , सारी मानवता एक परिवार है , सद्भाव , बुद्धम  शरणम  गच्छामि मतलब जीवन का लक्ष्य बुद्धत्व है ,आत्मसाक्षात्कार है ,”मैं कौन हूँ ?” किस लिए पैदा किया गया हूँ इत्यादि ,यह सब हमारे देश की सभ्यता , संस्कृति का हिस्सा है ,जिसको बदलकर अब भिन्नता , बटवारा ,धार्मिक कट्टरता ,लांछन्न , दुनिया परिवार नहीं व्यापर बन गयी है ,आत्म साक्षात्कार की जगह सामने वाले में ऐब निकालना , स्वार्थ , मोह ,लालच और नफ्सा नफ़सी वाली हालत ला दी गयी है,जिसकी वजह से दुनिया नर्क बनी जारही है !

 

साउथ इंडिया एजुकेशन सोसाइटी कि ओर से आयोजित एक प्रोग्राम में केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज बोलते हुए भारत की संस्कृति के विषय में बता रही थीं कि भारत कि संस्कृति में उदार चरितनाम: वसुधेव कुटुंभ्कम का प्रयोग पृथ्वी पर सभी जन को एक परिवार बताता है  और कह रही थी कि संस्कृत में सर्वे शब्द का बहुत प्रयोग हुआ है,यानी सबकी बात की या सर्व जन की बात की गयी है  जैसे सर्वे भवन्तु सुखिन: ,सर्वे सन्तु निरामया: यानी सब सुख से रहे सब निरोग रहे .इसमें कोई शक नहीं संस्कृत के श्लोक में बहुत अच्छी बात कही गयी है किन्तु धरातल पर भारतीय संस्कृति का विनाश किया जारहा है जो दरिंदे देश की संस्कृति का विनाश कर रहे हैं वो देश भक्त या देश प्रेमी कैसे हो सकते है ? जिनपर अभी तक सरकार अंकुश नहीं लगा पाई है .

शम्भू लाल जैसे मनचलों और गुंडों को हीरो बनाकर देश की आज़ादी पर मर मिटने वालों की क़ुर्बानी को भुलाने की साज़िश होरही है देश में ।देश की आज़ादी देश की संस्कृति और सभ्यता सब कुछ मिटाने की ठानी है दुश्मन ने , और उपद्रवियों को हीरो का नाम भी देश से दुश्मनी की निशानी है , जो देश के संविधान को क़ानून और मानवता को मिटाने पर उतारू हो और वो हीरो बना दिया जाए यह सिर्फ दुश्मनो की चाल होसकती है , शंभू मनचले को चार्जशीट करके राजस्थान पुलिस ने जो काम किया है इससे पुलिस की साख बनी है और प्रशासन पर जनता का विश्वास भी जगा है ।काश जस्टिस लोया के मामले में भी इन्साफ की कोई किरण जाग जाए और जिस तरह उनकी संदिग्ध हालत में मौत हुई उसपर इन्साफ होपाता तथा सोहराबुद्दीन फेक एनकाउंटर केस और उसी कड़ी में जस्टिस लोया के मर्डर केस में दूध का दूध और पानी का पानी होजाये तो देश में भय मुक्ति का माहौल बनेगा और विकास की राह हमवार होगी .editor ‘ s desk

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