इंजीनियरिंग सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी भी: प्रियंका सिंह

उन्नाव, 15 सितंबर (हि. स.)। इंजीनियरिंग का उद्देश्य केवल तकनीकी ज्ञान हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसे समाधान तैयार करना है जो लोगों का जीवन आसान बनाने के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। इंजीनियरों के पास आज एआई समेत ऐसी तकनीकों और संसाधनों की पहुंच है, जिनकी पिछली पीढ़ी कल्पना ही कर सकती थी। इंजीनियरिंग में जिज्ञासा और लगातार सीखने की प्रक्रिया सबसे अहम है। यह बातें मंगलवार को आरडीएसओ की डायरेक्टर (सिग्नल) प्रियंका सिंह ने नेशनल इंजीनियर्स डे के तहत उन्नाव में स्थित चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही।

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश में नेशनल इंजीनियर्स डे-2026 के अवसर पर एक्सपर्ट सेशन के साथ ‘हैक टू इनोवेट’ साइबर सिक्योरिटी हैकाथॉन का आयोजन किया गया। इसमें 20 से अधिक विश्वविद्यालयों के करीब 200 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों पर काम करते हुए तकनीकी प्रोटोटाइप और समाधान तैयार किए।

‘हैक टू इनोवेट’ की शुरुआत 13 सितंबर को 10 घंटे के ऑनलाइन सीटीएफ (कैप्चर द फ्लैग) से हुई थी। प्रदर्शन और स्कोर के आधार पर लीडरबोर्ड से शीर्ष 20 टीमों का चयन किया गया। चयनित टीमों ने 14 सितंबर से कैंपस में आयोजित 24 घंटे के ग्रैंड फिनाले में हिस्सा लिया। उन्हें निर्धारित समय में साइबर सिक्योरिटी की विभिन्न समस्याओं के लिए प्रभावी तकनीकी समाधान विकसित करने थे। 15 सितंबर को हैकाथॉन का मूल्यांकन और प्रोटोटाइप पिचिंग हुई, जहां टीमों ने अपने समाधान इंडस्ट्री के विशेषज्ञों और अकादमिक शोधकर्ताओं के सामने प्रस्तुत किए।

प्रतियोगिता में एआई आधारित थ्रेट डिटेक्शन, एपीआई सिक्योरिटी, डेटा लीक डिटेक्शन, क्लोन और फेक ऐप डिटेक्शन, डीपफेक, डिजिटल फॉरेंसिक्स, एंड्रॉयड एप्लिकेशन सिक्योरिटी, वेयरेबल डिवाइस सिक्योरिटी और फेक सोशल मीडिया अकाउंट डिटेक्शन जैसे विषयों पर चुनौतियां दी गईं। इसके अलावा प्रतिभागियों ने क्रिप्टोग्राफी, रिवर्स इंजीनियरिंग, क्लाउड और बाइनरी एक्सप्लॉइटेशन से जुड़ी समस्याओं पर भी काम किया। हैकाथॉन में कुल दो लाख रुपये तक के रिवार्ड्स रखे गए हैं।

कार्यक्रम में आरडीएसओ की डायरेक्टर (सिग्नल) प्रियंका सिंह, आईआईटी कानपुर के प्रो. डॉ. देबप्रिय बसु रॉय, एथर एनर्जी के को-फाउंडर स्वप्निल जैन, यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के प्रो. यूर. इंग. डॉ. जोआओ पोंसियानो, यूनिवर्सिटी ऑफ मिलान के प्रो. पाओलो सेरावोलो और माइक्रोन टेक्नोलॉजी के गुरूशरण सिंह ने इंजीनियरिंग, एआई, वैश्विक मानकों और उद्योग की बदलती जरूरतों पर विचार साझा किए।

यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के प्रो. यूर. इंग. डॉ. जोआओ पोंसियानो ने कहा कि एकेडमिक और इंजीनियरिंग स्टैंडर्ड्स का महत्व लगातार बढ़ रहा है। मानकों के माध्यम से अलग-अलग देशों के इंजीनियर एक समान प्रणाली के तहत काम कर सकते हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग शिक्षा में नैतिकता को भी जरूरी बताते हुए कहा कि इंजीनियरों को ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ ऐसे विकास के लिए काम करना चाहिए, जिससे पूरे समुदाय को लाभ मिले।

सीयू यूपी के मैनेजिंग डायरेक्टर जय इंदर सिंह संधू ने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास इंजीनियरिंग छात्रों को कक्षा की पढ़ाई के साथ उद्योग की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ना है। ‘हैक टू इनोवेट’ जैसे मंच विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान, क्रिटिकल थिंकिंग और इनोवेशन को वास्तविक समस्याओं पर लागू करने का अवसर देते हैं। संस्थान ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करने पर जोर दे रहा है, जहां छात्र केवल रोजगार पाने के लिए नहीं, बल्कि नई तकनीक और नवाचार के माध्यम से समस्याओं के समाधान विकसित करने के लिए तैयार हों।

सीयू यूपी के वाइस चांसलर प्रो. डॉ. विनीथ नायर, प्रो वाइस चांसलर प्रो. डॉ. टीपी सिंह समेत फैकल्टी सदस्य और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ सौम्या मुखोपाध्याय और निखिथ तुम्मालापल्ली ने विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया। सौम्या ने सिक्योरिटी कंसल्टिंग, रेड टीमिंग, वेब-एपीआई सिक्योरिटी और क्लाउड पेनिट्रेशन टेस्टिंग, जबकि निखिथ ने थ्रेट रिसर्च, थ्रेट हंटिंग, मालवेयर एनालिसिस और रिवर्स इंजीनियरिंग से जुड़े अनुभव साझा किए।

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