इनको निकाल फेंकोगे तो बचेगा क्या? सिर्फ़ जहन्नम

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हरियाणा के एक मंत्री अनिल विज का ब्यान आता है जिसमें वो कहते हैं “ गुरमेहर का समर्थन करने वालों को देश से निकाल फेंका जाए” , उनको पाक भेज दिया जाए ?

,,,केसी विडम्बना है की गुरमेहर जो हिंसा और जंग की विरोधी है अम्न ओ शांति और अहिंसा की बात कर रही है,देश पर मर मिटने वाले सपूत कि बेटी है , और उसका कहना है की जंग और हिंसा नहीं होनी चाहिए । इसके ऊपर लानछन् , क़त्ल और दुष्कर्म की धमकिया , यही कलयुग है , शायद ।

शांति व अम्न की बात करना जिन लोगों की नज़र में अपराध है इसका मतलब है वो हिंसा अशांति चाहते हैं जिसके लिए वो इस प्रकार का माहौल बनाते हैं कि देश में साम्प्रदायिकता को बढ़ावा मिले और याद है न देश में साम्प्रदायिकता से अशांति आएगी और अशांति विकास में रुकावट होती है यानी विकास ठप्प होजायेगा तो अंततय देश पिछड़ जाएगा और यही तो चाहता है कोई देश का दुश्मन

… , तो हिंसा और नफरत तथा सप्रदायवाद को बढ़ाने वाले लोग या संस्थाएं कहीं न कहीं देश के दुश्मन के एजेंट का ही काम कर रही हैं ऐसे लोगों पर तुरंत प्रभाव से पाबंदी होनी चाहिए ।क्या संघ परिवार और बीजेपी या ABVP इससे सहमत नहीं है कि दॆश में सद्भाव होना चाहिए , पड़ोसियों से जंग नहीं होनी चाहिए ? हमले का जवाब होना चाहिए यह अलग बात है ….

तो क्यों नहीं देश में सभी वर्गों ,समुदायों और जातियों को जोड़कर चलने कि बात करते हो आप लोग ,क्यों नहीं सोहाद्र ,प्यार और सद्भाव कि बातें होती हैं ….हमेशा हर तरफ से नफरत , नफरत और भड़काव की ही बातें क्यों होती हैं ।

 

बताईये इसमें क्या बुरी बात है कि मेरे पिता को पाकिस्तान ने नहीं जंग ने मारा है, और जंग नहीं होनी चाहिए ,क्या सरकार जंग चाहती है ,क्या संघ अपने पडोसी मुल्कों के साथ जंग का हामी है अगर हाँ तो जंग के बाद सिर्फ वीरानी , बिखरी हुई लाशें और मलबों का ढेर होता है चरों तरफ , उजड़ी हुई मांगे , सूने सुहाग और वीरान गोदें होती हैं जंग के बाद ।भुकमरी, बेरोज़गारी , बेकारी और लूट का माहौल होता है हरतरफ ,यही चाहती है बीजेपी और संघ परिवार , या कोई और सियासी पार्टी ….. यही चाहते हैं आजके नाम निहाद देशभक्त ?

अगर नहीं तो खुदा के लिए अम्न और शांति की बात करने वालों ,सद्भाव ,समभाव , समानता कि बात करने वालों को गले लगाओ नामनिहाद देश भक्तो ,,,,(नाम निहाद इसलिए कह रहा हूँ की देशभक्त कहलाने के लिए क़ुरबानी देनी पड़ती है और क़ुरबानी किसी ने अभी तक कोई दी नहीं है ) और सुनो देश को बचाओ जंग और नफरत के माहौल से , देश के ओ बचाओ अलगाव और जातिवाद से , देश को बचाओ धर्म के नाम पर नफरत , क्षेत्र ,वर्ग , जाती और पूंजीवाद से यह सब दुश्मन है इंसानियत के , अम्न के विकास के ।

क्या में तुम्हारी नज़र में देश द्रोह हूँ क्योंकि अम्न और प्यार तथा सद्भाव की बात करता हूँ , इन्साफ ,ईमान और हक़ की बात करता हूँ तो मुझे फख्र है इसपर और फख्र इस बात पर कि में हामी हूँ अम्न के पुजारियों का , में साथी हूँ हर उस देश कि बेटी और नौजवान का जो देश को जंग से बचाने और अम्न ओ शान्ति कि राह हमवार करता हो ।

अनिल विज जी आप ग़ौर करें अपने ब्यान पर जिसमें आप अम्न और अहिंसावादी लोगों को देश से बाहर फेंकने कि बात कर रहे हैं ,जिस रोज़ देश में अम्न ओ सद्भाव की बात करने वाले न होंगे उस रोज़ देश जहन्नुम से कम न होगा और उसके लिए शायद आप जैसे लोग ही रह जाएंगे ,हालांकि में तो दुआ करता हूँ आपके और आप जैसे लोगों के लिए भी की आपको दोनों जहां का रब ,जहन्नुम से बचने की राह पर ले आये और दुवीलोक में सफल बनाये ….तो हम कह रहे थे की जंग और नफरत के विरोधी तो गुरमेहर के साथ बाहर फ़ेंक दिए होंगे देश से आपके बकोल ….

देश को आप लोग कहाँ लेजा रहे हो ज़रा सोचो ….नफरत और द्वेष में इतने आगे मत निकलो कि वापस आना मुश्किल हो , सियासत और सत्ता के लिए नफरत की भी कोई सीमा होती होगी ?…इसका ख्याल रखा जाए ..और अनिल जी आप तो काफी सीनियर नेता हैं …..
… अच्छा आप तो देश को यह बता दीजिये की ISI और बीजेपी का आपस में क्या सम्बन्ध है ?अभी नहीं तो कभी भी बता ज़रूर दीजिये क्योंकि देश की सवा करोड़ से कुछ कम जनता इसका जवाब आप ही जैसे बड़बोला नेताओं से अभी खामोशी से मांग रही है यदि यह सड़क पर आगई तो आप खुद ही जानते हैं क्या हश्र होगा उन लोगों का जो देश के गद्दार हैं , और देशभक्ति का नाटक करते हैं चाहे वो जो भी हो ।

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