
…….अब अगर इसको हिंदु राष्ट्र बनाये जाने की बात है तो शायद यह मुग़लों की ideology को प्रोत्साहित करने का विचार लगता है, इसके पीछे क्या राज़ है यह एक अलग Reasearch का subject है
बारह वर्षों में देश की बड़ी उपलब्धियों में धारा 370 का हटाए जाना, तीन तलाक़ क़ानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, UAPA यानी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरीडोर, केदारनाथ धाम और उज्जैन में महाकाल धाम जैसी धार्मिक जगहों के विकास, सोमनाथ महोत्सव, और Express ways जैसे कारनामों को खास तौर पर गिनाया जाता है। यहाँ मंदिरों में VIP दर्शन और आम हिन्दु के दर्शन को उपलब्धि से बाहर रखकर देखिएगा, और Expressways आपकी सुविधा के लिए बने हैं या यह गुलामी का एक मॉडल है? इसपर अलग से पूरी एक वीडियो बनाएंगे !!!
फिलहाल हिन्दू राष्ट्र की ओर तेज़ी से अग्रसर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने अपने राज्य के हर ज़िले में संस्कृत स्कूल बनाना, दून यूनिवर्सिटी में हिंदू अध्ययन केंद्र शुरू करना, स्कूली पाठ्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता को शामिल करना और हिंदू तीर्थस्थलों के लिए पर्यटन को बढ़ावा देना अपनी उपलब्धियों की फेहरिस्त में शामिल किया है। कुल मिलाकर मंदिरों का निर्माण, मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज, धामों का विकास जैसे कार्य नवीन भारत की उपलब्धियों में शामिल किये गए हैं.
सरकार की उपलब्धियों में नाम बदलना भी शामिल है, देश में नाम बदलने की सूची में हालिया भोपाल की बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का प्रस्ताव भी मध्य प्रदेश विधान सभा में पास होगया है। और इसका नया नाम बदलकर ‘माँ वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय ‘ रखा जाएगा।
हालांकि इसका विरोध हो रहा है और इसका तर्क यह है कि बरकतुल्लाह भोपाली महान स्वतंत्रता सेनानी थे। लेकिन वर्तमान सरकार पर इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है. लेकिन यह सत्य है तो है कि उनके नाम से संस्थान की ऐतिहासिक पहचान जुड़ी हुई है। लेकिन स्वतंत्रता सेनानी होने का महत्त्व तो उसको होगा जिसका जुड़ाव स्वतंत्रता संग्राम से होगा.
एक और दिलचस्प कहानी यह है कि उत्तराखंड में एक तरफ UCC लागू करने की पहल करने वाले मुख्यमंत्री शायद इसको हिन्दू राष्ट्र का पहला पूर्ण राज्य बनाना चाहते हैं. क्या वो यह भूल रहे हैं कि हिन्दू राष्ट्र के लिए मनुस्मृति संविधान के तौर पर लागू की जायेगी. जबकि UCC यानी समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद सभी नागरिकों (चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों) के लिए एक सामान कानून बनाया जाना अभी बाक़ी है.
लेकिन भारत जैसे विशाल देश में जहाँ अनगिनत धर्म, पंथ और मान्यताएं मौजूद हैं, वहां समान नागरिक क़ानून लागू करना आग को हथेली पर रखने जैसा नहीं होगा? मुख्य रूप से भारत में हिंदू, इस्लाम, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई, और यहूदी धर्म के मानने वाले मौजूद हैं।
इसके अलावा, भारत में कई स्थानीय और आदिवासी परंपराएं भी शामिल हैं.अब ऐसे बहु धार्मिक, बहु जातीय , बहु भाषीय और अनेकता में एकता वाले देश में सामान क़ानून लागू करने की बात कितनी प्रासंगिक और Practical होगी यह आपको बताना है ?
हिन्दू राष्ट्र से पहले यह तय करना होगा कि क्या हिन्दू कोई धर्म है ? क्योंकि हिन्दू बुद्धिजीवियों और धर्म गुरुओं का मत है कि हिन्दु संस्कृति है धर्म नहीं और धर्म तो सनातन है. सनातन धर्म को मानने वालों का प्रतिशत देश में क्या है इसका कोई सही आंकड़ा हमारे पास नहीं है मगर बहुत कम है.
ऐसे में सवाल यह है, क्या भारत का नया संविधान संस्कृति के आधार पर बनेगा या धर्म के आधार पर? अब अगर संस्कृति के आधार पर इसको हिन्दू राष्ट्र बनाया जाता है तो बाक़ी संस्कृतियों का क्या होगा ?
क्योंकि जैन , बौद्ध , सिक्ख और पारसी संस्कृति हिन्दू संस्कृति से अलग है, पूजा पद्धति अलग है. और अब्राहमिक मज़हबों का Culture और संस्कृति तो बिलकुल ही भिन्न है? जिसमें मुसलमान, ईसाई और यहूदी आते हैं.
एक और बड़ा विवाद देश के नाम को लेकर है, हमारा देश का असली नाम हिंदुस्तान है या भारत ? आर्यावर्त वेदों के समय आर्यों की भूमि होने की वजह से भारत का नाम आर्यावर्त था। बौद्ध और जैन ग्रंथों में भारत को जंबूद्वीप कहा गया है। विष्णु पुराण के अनुसार, नाभिराज के पुत्र रिषभदेव के काल में भारत को ‘अजनाभवर्ष’ भी कहा जाता था। राजा भरत के नाम पर इस देश का नाम ‘भारतवर्ष’ रखा गया. मध्यकाल में जब तुर्क, मुग़ल और ईरानी विजेता आये तो उन्होंने इसको हिंदुस्तान कहा. अंग्रेज़ों ने इसे INDIA कहा.
अब अगर इसको हिंदु राष्ट्र बनाये जाने की बात है तो शायद यह मुग़लों की ideology को प्रोत्साहित करने का विचार लगता है, इसके पीछे क्या राज़ है यह एक अलग Reasearch का subject है. बाक़ी तो असली बात और राज़ की बात तो देश का गोदी मीडिया या Policy Makers ही बेहतर बता पाएंगे.
लेकिन फिलहाल देश के 80% वालों को सत्ता के मज़े लेने वालों ने बढ़िया व्यस्त किया हुआ है, और वो भी इसी में मस्त हैं कि अपनी तो एक ही फूट रही है मुल्लाओं की तो दोनों ही फोड़ी जा रही हैं !! उनके लिए शायद यही संतोषजनक है
दोस्तों बहुत दयनीय स्थिति में है देश, इसके भविष्य के बारे में देश जागरूक जनता को ही सोचना होगा, यह सत्ता के अंधे भिकारी और लालची ,,,, हमारे खुशहाल वतन, लहलहाती खेतियाँ, ऊंचे ऊंचे पहाड़, नहरें, नदियां, जंगलात, समुन्द्र, खूबसूरत इमारतें, सांस्कृतिक धरोहर, स्कूल, अस्पताल, सब कुछ बर्बाद करके भारत को भी वीरान, और तबाह कर देने की योजनाएं बनाते दिखाई दे रहे हैं. जो माहौल देश का हालिया बरसों में बनाया गया है इसका परिणाम विनाश के सिवा कुछ नहीं दिखाई देता ?
नवीन भारत की उपलब्धियों की आड़ में देश को जिस दिशा में ले जाया जा रहा है वो देश के दुश्मनों की बड़ी साज़िश लगती है. वैसे हिन्दु राष्ट्र अगर हिंदुस्तान नहीं होगा तो क्या पाकिस्तान होगा, हिंदुस्तान को हिन्दु राष्ट्र होना चाहिए ….लेकिन यह तो बता दें कि देश में यूनिफार्म सिविल कॉड यानी UCC वाला नया संविधान लागू होगा या मनुस्मिर्ति ? जी वही मनुस्मिर्ति जिसमें शूद्रों द्वारा वेद सुनने उसका ज्ञान देने या उच्च जाति के नाम का अपमान करने पर कठोर दंड का प्रावधान है, मनुस्मिर्ति के अनुसार ,” राजा को उसकी जीभ कटवा देनी चाहिए क्योंकि शूद्र पाप योनि में जन्मा है।
सत्यता के लिए देखें मनुस्मिर्ति (अध्याय 8, श्लोक 271)। हमारा मानना है कि अगर देश में सभी धर्मों और जातियों के बीच एकता होगी और हर नागरिक के साथ इंसाफ़ होगा तो देश विकसित होगा और खुशहाल भी …
एक होगे तो चाँद और सूरज रहोगे !
बिखरे हुए तारों से क्या बात बनेगी? !!