बाबा के उसूलों को जिया जाए, जन्मदिन का ड्रामा नहीं

 

Rakesh manchanda

👏😌राकेश मनचंदा

चौदह अप्रैल को हम बरसों से अंबेडकर जयंती मनाते आ रहे हैं। पर क्या यह एक दिन की रस्म अदायगी, फोटो और भाषणबाज़ी की रस्म अदाएगी नहीं है ? बस एक दिन नहीं, 365 दिन की हमारी जीवनशैली में क्रियान्वित होना चाहिए हमारा संविधान।

संविधान की जरूरत क्यों? आज जब हर दुसरे देश में ट्रंप स्टाईल के तानाशाह और उनके भक्त, जिसकी लाठी उसकी भैंस की तर्ज पर संविधान और क़ानून तोड़ रहें हैं . ऐसे बाबा के जन्मदिन एवं संविधान संस्कृति की रचना का मूल्य समझना जरूरी है।

आप जानते हैं , परिवार हो या दुनिया बिना नियम बिना ट्रेफिक लाइट के, दुर्घटना मुक्त जीवन कभी मुमकिन नहीं! गैर-बराबरी की दुनिया में संविधान ही संतुलित न्याय एवं ताकत का मार्ग नज़र आता है।

बाबा साहेब अकेले नहीं थे। उनके साथ 299 भारतीय रचनाकारों की टीम थी – राजेंद्र बाबा, नेहरू, पटेल, अमृत कौर, मौलाना आजाद, और कितने ही गुमनाम नाम भी। उन सबने मिलकर दुनिया भर के अनुभव लिए – ब्रिटेन से, अमेरिका से, आयरलैंड से – और भारत के लिए संविधान बनाया।

भीमराव अंबेडकर की 299 सदस्यीय टीम ने संविधानिक कानून का कायदा इसलिए नहीं दिया कि हम साल में एक दिन झंडा हिलाकर,जय भीम का नारा देकर सो जाएं !बल्कि हमें चाहिए सामाजिक सुरक्षा और इन्साफ का 365 दिन, 24×7 अमल में आने वाला निज़ाम। संविधान सिर्फ दिखाने के लिए या दिवस मनाने के लिए नहीं, बल्कि इसको लागू करना और करवाना हर नागरिक की ज़िम्मेदारी क़ानून बनाकर सरकार तय करे.

बाबा आंबेडकर के उसूलों और संविधान हमारे जीवन में हर रोज़ जिया जाना ज़रूरी है ? मैंने किसी का हक तो नहीं छीना? किसी पर जुल्म तो नहीं किया और अगर ज़ुल्म किसी पर होते देखा टी क्या मैं चुप रहा ?

संविधान और बाबा साहिब का जन्म दिन एक दिन का ड्रामा नहीं, बारह महीने और तीसों दिन की जंग है, संविधान का एप्लिकेशन। इंसाफ का भूखा, हर नागरिक 100% अमल में आने तक हर पल इस संविधान को ज़िंदा करने की जद्दोजहद करे. यही सपना था बाबा अंबेडकर और उनकी लिडरशिप में सभी 299 संविधान रचनाकारों का।

अब संविधान को अलमारी में नहीं, बल्कि हर नागरिक को जेब और मस्तिष्क में रखना जरूरी है। और सरकारों को हर नागरिक के अधिकारों के हित में बिना भेदभाव धरातल पर उतारने की ज़रुरत है, केवल एक दिन का नाटक ठीक नहीं , यही असली जयंती है, बाबा भीमराव अंबेडकर की.

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