MP में महिलाओं को कर दिया ज़िंदा दफ़न?

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MP में महिलाओं को कर दिया ज़िंदा दफ़न? मज़दूर को पिलाया गया पेशाब?

…….और फिर चारों तरफ़ चीख पुकार मचने लगी ,अत्यंत ख़ौफ़नाक था उस वक़्त का माहौल

MP mein Mahilaon ko zinda dafan?

देश में रोज़ नित नए प्रकार के ज़ुल्म देखने को मिल रहे हैं .ऐसे अमानवीय कृत्य कि हैवान और शैतान भी शर्माने लगे हैं . हम अक्सर इस प्रकार की रिपोर्टिंग से बचना चाहते हैं , मगर पेशेवराना ज़िम्मेदारी के चलते और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की नियत से कभी कभी रिपोर्ट भी करते हैं .ताकि सरकारें अपने दायित्व को समझें .

बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के रीवा जिले में ऐसी ही एक हैरान कर देने और इंसानियत को शर्मसार करने वाली इंतहाई ख़ौफ़नाक घटना सामने आई . रीवा में 2 महिलाओं को जमीन में जिंदा दफ़्न कर दिया गया. मामले की शिकायत थाने में दर्ज कराई गई है.

अब पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है. अब इस प्रकार की घटनाएं सिर्फ़ बीजेपी शासित प्रदेशों में ही होती हैं ऐसा नहीं है . बल्कि यह घटनाएं भ्रष्टाचार , धुर्वीकरण और नफ़रत के माहौल के चलते कहीं भी हो जाती हैं .

दरअसल, ये महिलाएं निजी जमीन पर सड़क बनाने का विरोध कर रही थीं. विरोध करने पर दबंगों ने 2 महिलाओं को मिटटी का ट्रोला डालकर जिंदा दफन करने की कोशिश की . ग्रामीणों की मदद से मुरम में दबी महिलाओं को काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया और उनकी जान बचाई गई. मुरम से निकलने में थोड़ी भी देरी होती तो महिलाओं की जान चली जाती.

क्यों इन महिलाओं को जिंदा गाड़ दिया ?

मामला रीवा जिले के मनगवां थाना क्षेत्र के गगेव चौकी अंतर्गत हिनौता जोरौट गांव का है. दबंग निजी जमीन पर सड़क बना रहे थे. सड़क निर्माण का विरोध करना महिलाओं को महंगा पड़ गया.

पट्टे की जमीन मे बन रही सड़क का विरोध करने पर दबंगो ने महिलाओं को मुरम के नीचे दबाकर जिंदा दफन कर देने का प्रयास किया.

आसपास मौजूद लोगों ने महिलाओं को बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला. घटना के वक्त केवल महिलाएं और बच्चे ही मौजूद थे. चारों तरफ से चीख पुकार मचने लगी . अत्यंत ख़ौफ़नाक माहौल बन गया था .

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, निजी जमीन में दबंग जबरन सड़क बनाने के लिए मुरम डाल रहे थे. निर्माण कार्य में एक जेसीबी और दो हाईबा लगाए गए थे. इसका ममता पाण्डेय और आशा पाण्डेय सहित अन्य विरोध कर रहे थे.

जैसे ही सड़क में मुरम डालने के लिए डंपर आगे बढ़ा, तो महिलाएं उसके पीछे खड़ी हो गईं. उसी दौरान डम्पर चालक ने मुरम से भरी ट्राली इन महिलाओं के ऊपर खोल दी और महिलाएं मुरम के नीचे दब गईं.

आनन-फानन में आसपास मौजूद लोगों ने मुरम से महिलाओं को बाहर निकाला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगेव इलाज के लिए लेकर गए.

महिलाओं को प्राथमिक उपचार देकर छोड़ दिया गया, अब इनकी हालत खतरे से बाहर है. इस मामले की शिकायत पीड़ित महिलाओं ने थाने में दर्ज कराई है.

एएसपी विवेक लाल ने बताया कि सड़क निर्माण का महिलाएं विरोध कर रही थीं .पूरे मामले की थाने में शिकायत दर्ज की गई है अब पुलिस जांच कर रही है. साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.

मध्य प्रदेश में ही पिछले दिनों एक बार फिर से पेशाब पिलाने जैसी घटना के दोहराये जाने का समाचार मिला . जो अमानवीय और हैवानियत भरा कृत्य हो सकता था. यह वारदात मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक दलित मजदूर के साथ हुई है.

आरोपी ने पहले गरीब मजदूर को जमकर पीटा, इसके बाद उसे जूते में भरकर पेशाब पिलाये जाने की घटना का समाचार सामने आया .पीड़ित का आरोप है कि उसका कुसूर यह था कि आधी दिहाड़ी लेने से उसने इनकार कर दिया था तभी आरोपी ने जमकर उसकी पिटाई की और ‘जूते में पेशाब’ भरकर उसे पिलाई.

मध्यप्रदेश के शिवपुरी ज़िले
मध्यप्रदेश के शिवपुरी ज़िले में दलित मज़दूर को पेशाब पिलाने और प्रताणित किये जाने की घटना

इस अमानवीय घटना की खबर के सार्वजनिक होने के बाद भीम आर्मी एक्टिव हो गई . और इस मामले की जांच के लिए पुलिस पर दबाव बनाया और तब जाकर FIR हुई . हालांकि पुलिस ने पेशाब पिलाने जैसी किसी भी घटना से इनकार किया है.

दयनीय बात यह है कि अब क़ानून की रक्षा करने वाली संस्था पुलिस पर भीम आर्मी जैसी स्वयं सेवी संस्था की सेवा लेनी पड़ती है फिर जाकर FIR होती है . इंसाफ़ होता है या नहीं यह पीड़ित परिवार बता सकेंगे या जनता बताएगी .

जब इंसाफ़ करने वाली संस्थाएं इंसाफ़ दिलाने में नाकाम रहती हैं .इसके बाद समाज सेवी संस्थाएं निकलकर आती हैं ,लेकिन अगर वो सत्तापक्ष की नहीं हैं तो उनका भी दमन शुरू होता है .

सत्ता और पूँजीवाद के दबाव में यह सारे ना इंसाफ़ी और असंवैधानिक तथा अमानवीय काम होते हैं .

इसके बाद शुरू हो जाता है राजनितिक खेल , और फिर सत्तापक्ष और विपक्ष के दो पाटों के बीच पीड़ित लम्बे समय तक Troma में रहता है.

अन्त्यतय: क़ुदरत की तरफ़ से ही कुछ हालात बनते हैं और ज़ालिम को सज़ा मिलती है . मगर इस बीच लॉ ऑफ़ लैंड का भरोसा जनता के दिल से निकल चुका होता है .

और फिर एक बात आम हो जाती है कि जिसकी लाठी उसकी भैंस ,हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता पैसा देकर छूट जाएंगे , या हमारा सम्बन्ध पार्टी के बड़े पदाधिकारियों से है .पुलिस में हमारी सेटिंग है ये सब जुमले चलने लगते हैं .

मध्यप्रदेश के शिवपुरी ज़िले में दलित मज़दूर को पेशाब पिलाने और प्रताणित किये जाने की घटना के बाद कांग्रेस ने मोहन सरकार को घेरा है.

और अब इस घटना के बाद कुछ दिन राजनितिक खेल चलेगा , उसके बाद एक नया मुद्दा निकल आएगा . बस इसी में ही जनता को उलझाए रखा जाएगा , और राजनेता पिछले दरवाज़े से जनता को और देश को लूटते रहेंगे .

फ़िलहाल शिवपुरी के एसपी अमन सिंह राठौर की मानें तो , “पेशाब पिलाने वाली घटना असत्य है.पीड़ित राजेश जाटव के खिलाफ गांव की ही एक महिला ने छेड़छाड़ की एफआईआर दर्ज कराई थी .

एसपी अमन ने बताया इसे विवादित बनाने के लिए यह सब किया गया है. इस सिलसिले में लोगों के बयान लिए गए तो पेशाब पिलाने की घटना असत्य पाई गई है.

इनपुट्स MP तक

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