ओखला प्रेस क्लब के ज़रिये दुकानों और मकानों पर उर्दू में नामों की तख्तियां और साइन बोर्ड लगाने की मुहीम का आग़ाज़
ज़बान किसी भी क़ौम की पहचान होती है . मुशाहिदा (observation) है की जब आप किसी की माद्री ज़बान में बात करते हैं तो सामने वाला मुतास्सिर हुए बिना नहीं रह पाता . ख़ास तौर से जब आपकी ज़बान वो नहीं है जो सामने वाले से आप बोल रहे हैं . बहरहाल ज़बानें सभी अच्छी होती हैं मगर उर्दू के बारे में मशहूर है इसमें अक़्वाम को जोड़ने का माद्दा है , मिठास है , दिलकशी है … क्योंकि यह ज़बान लश्करी ज़बान है और मुख्तलिफ खित्तों , मुल्कों , ज़बानों और तहज़ीबों का मजमुआ है .
हालांकि इसको मिटाने में खुद अहल ए ज़बान ने ही कोई कसर न छोड़ी मगर चाँद पर बदली उसकी रौशनी को ख़तम नहीं कर सकती . अब ऐसी ही एक कोशिश इस ज़बान की आब्यारी की ओखला प्रेस क्लब की जानिब से की गयी है . जिसमें कई मारूफ़ उर्दू की शख्सियत मैदान ए कार ज़ार में हैं . उर्दू पर बहुत कुछ कहा गया लिखा गया लेकिन बक़ौल मुनव्वर राणा …
सगी दो बहनो का जो रिश्ता है उर्दू और हिंदी में
कहीं दुनिया की दो ज़िंदा ज़बानो में नहीं मिलता
वहीँ मनीष शुक्ल कहते हैं कह …..
बात करने का हसीं तौर तरीक़ा सीखा
हमने उर्दू के बहाने से सलीक़ा सीखा
नयी दिल्ली, 26 मई – ओखला प्रेस क्लब ने रोज़ मर्रा की ज़िंदगी और तिजारत से उर्दू ज़बान को हटाये जाने पर अफ़सोस का इज़हार करते हुए देशभर में दुकानों, दफ्तरों और घरों में उर्दू लाने के लिए एक क़रारदाद पास की है । यह अज़्म ओखला प्रेस क्लब ने दुकानों और घरों पर दूसरी ज़बानों के साथ उर्दू में भी नामों की तख्तियां और साइनबोर्ड लगाने की मुहीम की शुरुआत करते हुए ज़ाहिर किया ।
ओपन प्रेस क्लब की कोर कमेटी के सदस्यों में चेयरमैन वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अतहरुद्दीन (मुन्ने भारती), वरिष्ठ पत्रकार सोहेल अंजुम, जावेद अख्तर, डॉ. खालिद रज़ा ख़ान, यूएनआई के आबिद अनवर, खुर्रम शेह्ज़ाद शामिल हैं। मिल्लत टाइम्स ने शम्स तबरेज़ क़ासमी , सैफुल्लाह सिद्दीकी और ज़हीरुल हसन ने मिलकर ‘अपने घर, दुकान में उर्दू में बोर्ड लगाएं, उर्दू को बढ़ावा दें ‘ नाम से अभियान शुरू किया है ।
ओखला प्रेस क्लब की कोशिश न सिर्फ़ जामिया नगर निवासियों, दुकानदारों, कार्यालयों, तालीमी इदारों और मस्जिदों और दरगाहों में उर्दू में बोर्ड लगाना है, बल्कि इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर भी चलाना है। इसकी शुरुआत करते हुए ओखला प्रेस क्लब कोर कमेटी के सदस्यों ने अपने घरों में उर्दू में नाम का बोर्ड लगाया है और जगह-जगह इस अभियान को जन अभियान बनाने के लिए पोस्टर लगाए जा रहे हैं. ओखला प्रेस क्लब के सदस्य भी उर्दू में बोर्ड बनाने में सहयोग दे रहे हैं।
गौरतलब है कि जामिया नगर को “मिनी इंडिया ” भी कहा जाता है क्योंकि यहां देशभर के मुसलमानों का एक पढ़ा-लिखा कारोबारी , सियासी और मुतवस्सित तब्क़ा रहता है. आलमी शोहरतीयाफ़्ता जामिया मिलिया इस्लामिया भी यहीं वाक़ेय है . इसके अलावा भारत की मिल्ली तंज़ीमों और इदारों के सदर दफ़ातिर भी यहीं हैं।
यहां कई राजनीतिक दलों के कार्यालय भी हैं. जामिया नगर भी पढ़े-लिखे लोगों की बस्ती मानी जाती है, लेकिन दुख की बात यह है कि चाहे कोई सरकारी अधिकारी हो या यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, डॉक्टर हो या इंजीनियर, वकील हो या टीचर, इनके घर पर उर्दू ज़बान में नामों की तख्ती नहीं दिखती . जो उर्दू के प्रति बेहिसी का जीता जागता सबूत है. जबकि ओखला में उर्दू कवियों, लेखकों, कथा लेखकों, उपन्यासकारों और कलाकारों की कोई कमी नहीं है। यदि कोई कमी है तो उर्दू में लिखे नामो , पतों और साइन बोर्डों की है .
ओखला प्रेस क्लब के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार मुन्ने भारती ने कहा कि इस बेहिसी और मायूसी को दूर करने के लिए ओखला प्रेस क्लब ने उर्दू को घर-घर तक पहुंचाने का अज़्म किया है और इसके लिए कोशिश शुरू कर दी गयी है .
ओखला प्रेस क्लब के सभी ज़िम्मेदारां चाहते हैं कि न केवल दिल्ली में बल्कि पूरे देश में कारोबारी इदारों , दफ्तरों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, घरों और दुकानों पर उर्दू तख्तियां लगाई जाएं ताकि लोगों में उर्दू के प्रति दिलचस्पी पैदा हो. उर्दू की जानिब अवाम का रुझान बढे , और उर्दू का सरकारी इदारों में चलन शुरू हो ।इसके उर्दू को पढ़ने सीखने और सिखाने का सिलसिला देश भर में शुरू हो .
ओखला प्रेस क्लब इस अभियान को समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों के ज़रिये पूरे देश में फैलाने के लिए उर्दू से मोहब्बत रखने वालों और उर्दू के चाहने वालों से सहयोग की अपील करता है .ओखला प्रेस क्लब की किसी भी ऐसी मुहीम में जिसके ज़रिये मुल्क , मिल्लत और इंसानियत की तरक़्क़ी हो सके टाइम्स ऑफ़ पीडिया अपना पूरा ताव्वुन करने के लिए पुरअज़्म है .
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