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ह्यूस्टन में मोदी और इमरान के तेवर

ह्यूस्टन में मोदी और इमरान के तेवर

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ह्यूस्टन में हाउडी मोदी कार्यक्रम में PM का भव्य स्वागत के मायने

इमरान खान बोले 9/11 हमलों के बाद अमरीका का साथ देकर बड़ी भूल की

जैसा की आपने भी देखा होगा रविवार को ह्यूस्टन (अमेरिका ) में आयोजित HOWDY MODI (हाउडी मोदी) कार्यक्रम में 50 हज़ार से ज़्यादा भारतियों ने मोदी का स्वागत किया , इस प्रोग्राम में US प्रेजिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प भी मौजूद थे । अमेरिका की सर ज़मीन पर अपने प्रधान मंत्री का भव्य स्वागत से मन की मुद्राएं गदगद हुईं सीना हमारा भी भले 56 नहीं हो पाया मगर 2 इंच बढ़ा ज़रूर । जो बढ़ना ही चाहिए था ।

इस कार्यक्रम में वहां मौजूद लोगों के नारे और मोदी ट्रम्प की बॉडी लैंग्वेज से ऐसा आभास हो रहा था मानो किसी बॉलीवुड फिल्म की महूरत पर फिल्म के डायरेक्टर और हीरो का स्वागत हो रहा हो , प्रोग्राम का आयोजन भले किसी ने भी किया हो किन्तु कार्यक्रम सराहनीये था ।

भारत देश में जब हर तरफ मंदी और गिरावट का दौर है , बेरोज़गारी चरम पर है ,खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान पर पहुँचने को हैं , देश का reserve amount सरकार ने निकाल लिया है जो किसी भी आपातकाल स्तिथि की निशान दही करता है , पड़ोसियों के साथ रिश्ते इंतहाई ख़राब हैं ,देश की बड़ी और सरकारी कंपनियों के कर्मचारी जंतर मंतर पर धरने पर बैठ रहे हैं , निजी कम्पनियाँ बंद होरही हैं ।

ऐसे में howdy मोदी पर कार्यक्रम का आयोजन कितना उचित था और इसके क्या मायने थे यह तो आयोजक ही बता सकते हैं ।लाखों डॉलर्स खर्च करने के बाद इस अवसर पर अमेरिकी गीत के बाद भारतीय राष्ट्रीय गीत को किसी प्रोफेशनल से गवा लिया होता तो शायद वहां मजूद अमरीकी भी कम से कम उसकी धुन से ही भाव विभोर होजाते ।

क्योंकि उनके समझ में गीत की पंक्तियाँ तो आ नहीं सकती थीं , किन्तु आवाज़ , अंदाज़ और धुन ज़रूर आकर्षित करते , फिर उसको किसी दिव्यांग से गवाना यह भी समझ से बाहर था , उनको यदि सम्मान ही देना था तो किसी और तरह किया जा सकता था । दिव्यांग अगर प्रोफेशनल हो और आवाज़ मधुर हो तो मन मोह लेता है, जिस दिव्यांग से राष्ट्रीय गीत गवाया गया होसकता है वो किसी दुसरे Profesion में Experties रखते हों लेकिन howdy मोदी समारोह में तो नहीं जम रहा था , Howdy Modi event के दौरान राष्ट्रीय गान में मायूसी थी जोश नहीं था ।

खैर , आपको बतादें PM नरेंद्र मोदी ने रविवार को ह्यूस्टन में पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा था कि “भारत के फैसलों (कश्मीर पर) से उन्हें दिक्कत है, जिनसे अपना देश नहीं संभल रहा। ये वो हैं जो चरमपंथ को पालते-पोसते हैं।”

उन्होंने कहा, “भारत और प्रधानमंत्री मोदी की ओर से कल बहुत एग्रेसिव बयान सुना और मैं वहीं मौजूद था। मुझे नहीं पता था कि मुझे ये बयान सुनने को मिलेगा। वहाँ मौजूद लोगों को ये बयान अच्छा लगा लेकिन ये बहुत ही आक्रामक था।”

दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान ने 9/11 हमलों के बाद अमरीका का साथ देकर बड़ी भूल की।खान ने कहा कि पिछली सरकारों को वो वादा नहीं करना चाहिए था, जिसे वो पूरा नहीं कर सकती थी।

पाक PM इमरान खान ने विदेशी संबंधों की परिषद (सीएफआर) में यह भी कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कम से कम ये उम्मीद करते हैं कि वो भारत से कर्फ्यू हटाने का आग्रह करें।

आपको याद होगा पूर्व अमरीकी रक्षा सचिव जेम्स मैटिस ने हाल ही में टिप्पणी की थी कि वे पाकिस्तान को उन सभी देशों के बीच सबसे खतरनाक मानते हैं, जिनसे अभी तक उनका पाला पड़ा है। इस बारे में पूछे जाने पर इमरान ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैटिस पूरी तरह समझते हैं कि पाकिस्तान कट्टरपंथी क्यों बना।”

 

इमरान खान ने बिना लाग लपेट के कहा कि पाकिस्तान ने 11 सितंबर 2001 को अमरीका में अलकायदा के हमलों के बाद चरमपंथ के ख़िलाफ़ जंग में अमरीका का साथ देकर बड़ी भूल की।इस ब्यान से वो क्या मैसेज देना चाह रहे थे साफ़ नहीं कर सके ।

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