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रतन लाल कैन ने लोक सभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से मांगा त्याग पत्र 

रतन लाल कैन ने लोक सभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से मांगा त्याग पत्र 

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प्रेस विज्ञप्ति

रतन लाल कैन ने लोक सभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से मांगा त्याग पत्र

सितम्बर २०१८ में लोक सभा द्वारा पुनः पारित अनुसूचित जाति एवम अनुसूचित जन जाति  (अत्याचार निवारण) अधिनियम,१९८९  पर मध्य प्रदेश के इंदौर के भारतीय जनता पार्टी के व्यापारी प्रकोष्ट के एक कार्यकर्म को सम्बोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि अभी अभी हमने अनुसूचित जाति अनुसूचित एवम जन जाति के लोगो को नया कानून के रूप में उन्हे बड़ी चॉकलेट दी है जिसे अभी तुरंत छीनना ठीक नहीं है, इस लिए थोड़े समय बाद समझा-बुझाकर हम वह चॉकलेट वापस ले लेंगे आप को उस का विरोध नहीं करना चाहिए।

 

इस के अतिरिक्त बिहार में राष्ट्रीय स्वम् सेवक संघ के प्रज्ञा प्रवाह के समापन कार्यकर्म में कहा कि क्या आरक्षण देने से देश का उद्धार हुआ है? संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर केवल दस साल के आरक्षण चाहते थे। हर दस साल की समय समय पर सीमा बढ़ा दी गयी। एक बार २० साल के लिए बढ़ा दी गयी।

क्या केवल आरक्षण देने से देश का उधार संभव हो सकेगा। डॉ. बी आर अम्बेडकर विचार मंच (पंजीकृत) के महा मंत्री रतन लाल कैन ने एक पत्र लिख कर लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन से उनका त्याग पत्र मांगते हुए कहा कि उन्होने अध्यक्ष के पद का दुरूपयोग करते हुए की हमारी भवनानों को आहात किया है।

आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में अपने व्यक्तव्य दिए है । यह लोक सभा अध्यक्ष के पद का दुरूपयोग है। इसलिए या तो तुरंत त्याग पत्र दें या क़ानूनी कार्यवाही के लिए तैयार रहें। इस संदर्ब में लोकसभा अध्यक्ष ने दिनांक 9 अक्टूबर, 2018 को मंच के प्रतिनिधि मंडल को बुलाया और अपनी सफाई देते हुए कहा कि मेरे इंदौर क्षेत्र के नागरिको का मानसिक स्तर इतना कमजोर है कि हमें उन्हें इस प्रकार के उदहारण दे कर समझाना पड़ता।

 

हमने कहा कि यह इंदौर नागरिको का अपमान है। इस व्यक्तव्य से अनुसूचित जाति एवम अनुसूचित जन जाति की भवनानों को आहात किया है। बिहार मैं दिए गए विवादित ब्यान पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि एक बार २० वर्ष के लिए आरक्षण समय सीमा बढ़ाई गयी, इस के लिए उन्हों के पास कोई दस्तावेज नहीं है। यह गलती से निकल गया  तो आप लिखित में खेद प्रगट करदे तो मंच अपने सदस्यों दिखाकर इस बाबत कोई प्रेस विज्ञप्ति निकल देंगे परन्तु उन्होंने कहा कि इस विषय पर कोई प्रेस विज्ञप्ति नहीं देना। यदि मुझे लिखित रूप से अपना बयान भी देना पड़े तो मैं दो लाइन का ही उत्तर दूंगी।

 

लोक सभा अध्यक्ष ने अपनी सफाई में  कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया है। चार लाईनो के उत्तर में कथित वक्तव्यों से इंकार किया है। अन्तोगत्वा मंच के महामंत्री रतनलाल कैन ने भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद को एक पत्र लिखकर लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन के विरुद्ध संविधान विरोधी व् आरक्षण विरोधी दिए गए वयक्तयों से जनभावनाओं के आहत पहुंचाने पर मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है।

 

क्योकि सदन से बहार दिए गए ब्यान पर कोई कानूनी कार्यवाही से छूट नहीं है। यधपि राष्ट्रपति किसी पार्टी विशेष का नहीं होता परन्तु राष्ट्रीय स्वम् सेवक संघ के त्रिकोण में होने की वजह से स्वकृति दिए जाने की कोई सम्भावना नहीं है। अतः श्रीमती सुमित्रा महाजन पर मंच द्वारा कानूनी कार्यवाही करने पर विचार किया जा रहा है।

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