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मोदी जी के पांच सवाल उनकी गोद में

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मोदी जी के पांच सवाल उनकी गोद में

गुरुवार को पुलवामा ज़िले के लेथपोरा में एक चरमपंथी हमले में 40 सीआरपीएफ़ जवान शहीद होगये अब यह भी बहस छिड़ गयी है कि वो शहीद हुए या उनकी मृत्यु हुई है , क्योंकि अब कई पेरामिलट्री के जवान ऑनलाइन आकर बता रहे हैं कि उनको मरणोपरांत शहादत का दर्जा नहीं मिलता है .और ना ही उनको आर्मी जैसी सुविधाएँ ही मिलती हैं, जबकि सांसद और विधायक ज़िंदगी भर सुविधाएं लेते रहते हैं .यह अन्याय है न ……
प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.फिलहाल एक मुद्दे ने देश के लेखक , पत्रकार , विचारक , तथा शुभ चिंतक को धर्म संकट में डाल दिया है कि देश में किसको राष्ट्रभक्त या किसको देशद्रोह कहा जाये या लिखा जाए .

आगे बढ़ने से पहले यह भजन देखलें ..कितना sateek है आजके हालात पर

हे जी रे
रामचंद्र कह गए सिया से
इस कलयुग आएगा
हंस चुगेगा दाना तुनका
हंस चुगेगा दाना तुनका
कौआ मोती खाएगा

हे जी रे

सिया पूछे भगवान
कलयुग में धर्म – कर्म को
कोई नहीं मानेगा
तो प्रभु बोले
धर्म भी होगा कर्म भी
होगा
लेकिन शर्म नहीं होगी
बात बात में मात-पिता को
बेटा आँख दिखाएगा
हंस चुगेगा दाना तुनका

राजा और प्रजा दोनों
में
होगी निसिदिन खेचातानी
खेचातानी
कदम कदम पर करेंगे
दोनों
अपनी अपनी मनमानी
मनमानी
जिसके हाथ में होगी
लाठी
भैंस वही ले जाएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का
……
सुनो सिया कलयुग में
काला धन और
काले मन होंगे

चोर उच्चक्के नगर सेठ
और प्रभु भक्त निर्धन
होंगे

जो भी होगा लोभी भोगी
वो जोगी कहलाएगा
हंस चुगेगा दाना तुन का
…….

मंदिर सूना सूना होगा
भरी रहेगी मधुशाला

पिता के संग संग भरी सभा
में
नाचेगी घर की बाला
हे कैसा कन्यादान पिता
ही
कन्या का धन खा जाएगा
हंस चुगेगा दाना तुन का
…….

सड़कों से कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में उन्माद मचाने वाले देश भक्त एक धर्म विशेष या जाती विशेष के लोगों को नफरत का निशाना बना रहे और धमका रहे हैं , और पाकिस्तान के साथ युद्ध के लिए सरकार और फ़ौज पर दबाव बना रहे हैं , यह काम सरकार और फ़ौज का है ये उन्ही को करने दिया जाए .

जाली देश भक्ति से सांप्रदायिक दंगों की चपेट में देश के चले जाने का खतरा बढ़ रहा है , जिससे देश की एकता और अखंडता को खतरा है . जो दुश्मन की मंशा को बल देता है .दुश्मन यही चाहता है .
देश में बढ़ती साम्प्रदायिकता , डर , नफ़रत और जातिवाद का माहौल देश को कमज़ोर नहीं करदेगा ? क्या यह सब करने वाले देशभक्त होसकते हैं ? या …

वो लोग देश भक्त हैं , जो देश में सांप्रदायिक सोहाद्र ,आपसी प्रेम और भाईचारा बनाने में व्यस्त हैं , देश के जवानो के परिवारों को सहायता कररहे हैं . देश में अम्न और दोस्ती की फ़िज़ा को बना रहे हैं और साथ ही देश के आर्थिक , राजनितिक , सामाजिक तथा कूटनीतिक माहौल को सुदृढ़ बनाने में मसरूफ हैं .ये आप ही बताएं ? कौन है देश भक्त

सड़कों , मोहल्लों और कॉलेजों में उन्माद मचाने से क्या देश की आंतरिक सुरक्षा मज़बूत होगी ? या कमज़ोर ? देश में यदि अराजकता , साम्प्रदायिकता और धार्मिक या जातीय दंगे भड़कते हैं तो इससे देश की आर्थिक व्यवस्था सुधरेगी या कमज़ोर होगी ?

जब देश के भीतर law and order की situation को संभालने में हमारी फ़ौज और पेरा मिलटरी को सीमाओं से बुलाया जाएगा तो क्या इससे हमारी सरहदें सुरक्षित होंगी या असुरक्षित ? आज देश की बुनयादी ज़रूरत और सेवा एवं देश भक्ति यह है कि देश की अवाम को एकजुट रखा जाए , देश की फ़ौज और पेरा मिलटरी के जवानो और उनके परिवारों को बेहतर से बेहतर सहूलतें दी जाएँ , इसके लिए इनके बजट में इज़ाफ़ा किया जाए .

देश की आर्थिक स्तिथि को मज़बूत बनाई जाए इसके लिए विदेशी पूँजी निवेश बढ़ाने का माहौल बनाया जाए . ज़ाहिर है इसके लिए देश में राजनितिक , सामजिक व सांप्रदायिक स्थिरता का होना अत्यंत ज़रूरी है .

२ दिन पहले जब संसद की सर्व दलीये बैठक में PM मोदी अनुपस्थित रहे और राजनितिक रैली करते दिखे तो देश के विचारकों को यह अटपटा लगा ,और इस बात की चर्चा सोशल मीडिया पर शुरू होगई कि Pm का बैठक से नदारद रहना उनको सवालों के घेरे में खड़ा करता है .देश के एक संवेदनशील और अत्यंत प्रमुख मुद्दे पर सर्व दलीये बैठक से PM का ग़ायब रहना देश कि जनता को अजीब लगा , क्या आपको भी लगा या नहीं ? पता नहीं ?

पुलवामा में आतंकी हमले से चंद रोज़ पहले ख़ुफ़िया विभाग कि ओर से दी गयी आतंकी हमले की जानकारी के बाद गृह मंत्रालय द्वारा CRPF की 2500 नफरी को एयर लिफ्ट न किये जाना संस्थागत मजबूरी थी या कुछ और मुझे नहीं पता ..जनता शायद ज़्यादा जानती होगी ? चूंकि जनता सब कुछ जानती है ?आतंकी threat के बाद air lifting ही ज़्यादा बेहतर बताया गया है .

क्या आज देश की जनता को ये सवाल नहीं उठाने चाहिए कि प्रधान मंत्री , गृह मंत्री , सुरक्षा सलाहकार , और J & K राजयपाल ने पुलवामा हमले कि ज़िम्मेदारी अब तक क्यों नहीं ली .जब एक थाने के अंतर्गत होने वाली घटना के लिए थानेदार को ज़िम्मेदार ठहराकर उसको ससपेंड ,टर्मिनेट या ट्रांसफर करदिया जाता है तो देश के 40 जवानो की मौत के लिए ज़िम्मेदार किसे ठहरना चाहिए ? आप ही तय करदो …या कुछ दिन बाद करदेना …

आपको बतादें खुफिया एजेंसियों ने सात दिन पहले ही अलर्ट जारी किया था कि कश्मीर में सुरक्षाबलों को डिप्लॉयमेंट और उनके आने-जाने के रास्ते पर आतंकी IED से हमला कर सकते हैं.क्या यह ग्रह मंत्रालय की जानकारी में नहीं था ?इसके बावजूद CRPF के जवानो को एयर लिफ्ट क्यों नहीं किया गया ?

कांग्रेस का दावा है कि मोदी सरकार में 18 बड़े आतंकी हमले हुए हैं. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ”मोदी सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा पर समझौता बिना रोक टोक के जारी है.” इसी कड़ी में यह देखें …

उड़ी हमला: 18 सितंबर, 2016 को जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास स्थित भारतीय सेना के कैम्प पर हमला किया गया था. इस हमले में 19 जवान मारे गए थे. इस हमले को दो दशकों का सबसे बड़ा हमला बताया गया था , मगर उसके बाद क्या ? .

पठानकोट हमला: दो जनवरी, 2016 को चरमपंथियों ने पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हमला किया था. इसमें 7 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे जबकि 20 अन्य घायल हुए थे. जवाबी कार्रवाई में चार चरमपंथियों की भी मौत हुई थी.हमारे एयर बेस में आतंकी हमला देश की कमज़ोरी को दर्शाता है न ?

गुरदासपुर हमलाः 27 जुलाई ,2015 को पंजाब को गुरदासपुर के दीनापुर में हमलावरों ने तड़के ही एक बस पर फ़ायरिंग की और इसके बाद पुलिस थाने पर हमला कर दिया. हमले में एसपी (डिटेक्टिव) समेत चार पुलिसकर्मी और तीन नागरिक मारे गए.इसके लिए ज़िम्मेदार कौन ?

अमरनाथ यात्रियों पर हमलाः 10 जुलाई, 2017 को अमरनाथ जा रहे श्रद्धालुओं पर अनंतनाग ज़िले में एक चरमपंथी हमला हुआ. इस हमले में 7 लोग मारे गए थे. यह सब उस हुकूमत में हुए जिसके प्रधान मंत्री जी 5 वर्ष पूर्व की सरकार से 5 सवाल कररहे थे .याद हैं आपको वो 5 सवाल ?

पढ़ें:
मोदी जी का सवाल no .1 _यह जो आतंकवादी हैं , नक्सलवादी हैं इनके पास बारूद और हथ्यार कहाँ से आता है ? विदेश से आता है . और सीमाएं सम्पूर्ण रूप से आपके क़ब्ज़े में हैं.क्या कररहे हैं आप प्रधान मंत्री जी ?

No .2 आतंकवादियों के पास धन कहाँ से आता है .हवाला से और मनी ट्रांसक्शन से आता है .पूरा बैंक सिस्टम भारत सरकार के क़ब्ज़े में है .प्रधान मंत्री जी आप यह क्यों नहीं रोकते हैं ?

No . 3 विदेश से घुस पैठिए आतंकवादी आते हैं घटनाएं करते हैं और चले जाते हैं , जबकि सीमा सुरक्षा बल , कोस्टल सिक्योरिटी , वायु सेना सब आपके हाथ में है फिर भी ये घटनाएं क्यों होती हैं ?

No .4 देश का कम्युनिकेशन का पूरा सिस्टम भारत सरकार के हाथ में है , कोई भी email करता है या टेलीफोन करता है कोई भी कम्युनिकेशन करता है , तो सरकार उसको interupt करसकती है और आतंकी गति विधियों का प्रधान मंत्री जी आप पता लगा सकते हैं ,आपने इस सम्बन्ध में क्यों नहीं एक्शन लिया ?
No .5 ये जो आतंकवादी विदेशों में जाकर बैठ जाते हैं वहां से आतंकी गति विधियां करते रहते हैं उनको प्रत्यारोपण (Implant) के द्वारा हिंदुस्तान लाने का अधिकार होता है आपकी विदेश नीति में क्या वो ताक़त है ?

एक बार इन पाँचों चीज़ों पर कुछ करके दिखाईये आतंकवाद जड़ मूल से उखड जाएगा ..राज्यों के अधिकार हथ्याने की राजनीती का खेल छोड़ दीजिये प्रधान मंत्री जी , भाइयो बहनो दिल्ली की सल्तनत के पास मेरे इन सवालों के जवाब नहीं हैं ……..ये थे तत्कालीन मुख्यमंत्री गुजरात ,भाई मोदी जी के तत्कालीन कांग्रेस सरकार से सवाल ,,,

क्या आज इन पाँचों सवालों का समाधान होगया है या इनका जवाब तैयार होगया है? अगर नहीं …तो आज के प्रधान मंत्री जी से आपको ये सवाल पूछने चाहिए ….

यदि आप नहीं पूछना चाहते तो न सही हम तो पत्रकारिता का धर्म समझकर पूछ रहे हैं ..और प्रधान मंत्री जी आप भी देश की सवा करोड़ जनता के इन सवालों का जवाब दीजिये ,,अन्यथा ये जनता है ..

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