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प्रेस कांफ्रेंस क्यों नहीं करते मोदी, जानें इसका राज़

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जवाबदेही से बचना चाहते हैं मोदी :जयशंकर गुप्त

सेंटर फॉर डेमोक्रेसी CFD की ओर से 2 दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

पिछले दिनों गाँधी पीस फाउंडेशन नई दिल्ली में Centre for Democracy (CFD) की ओर से एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया . जिसका शीर्षक था “भारतीय लोकतंत्र के सामने चुनौतियाँ” , इस अवसर पर देश भर से भुद्धि जीवियों , पत्रकारों , इतिहासकारों , संगठनों , समाजवादियों तथा राष्ट्रवादियों ने भाग लिया .

24-25 march 2018 को आयोजित संगोष्ठी के अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार जय शंकर गुप्त ने इंद्रा गाँधी के दौर की इमरजेंसी और मोदी के दौर की आपातकाल की तुलना करते हुए कहा इंद्रा गाँधी के 1970 का कार्यकाल में किसानो , नौजवानो और ग़रीबों को लगा था , शायद अब हमारे हालात बदलेंगे . लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

जयशंकर गुप्त ने कहा दरअसल मोदी प्रेस कांफ्रेंस इसलिए नहीं करना चाहते की उनके पास पत्रकारों के सवालों के जवाब नहीं हैं , और प्रेस कांफ्रेंस के बाद जवाबदेही भी बन जाती है ,जबकि 4 वर्षों में उन्होंने TV पर भी कोई इंटरव्यू नहीं दिया है , सिवाए अपने पसंद के एक दो TV चैनल को छोड़कर . जबकि यह भी सच है की मीडिया को पूरी तरह से मैनुपुलेट भी किया गया है .

उसी दौरान गुजरात के एक हॉस्टल में भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्रों द्वारा किया गया आंदोलन काफी उग्र होगया था और इसी वजह से गुजरात की कांग्रेस सरकार गिर गई , इसके बाद बिहार में आंदोलन शुरू हुआ जिसका हिस्सा जयप्रकाश नारायण बने और रफ्ता रफ्ता पूरे देश में इंद्रा गाँधी की कांग्रेस सरकार के विरुद्ध माहौल बन गया और नतीजा यह की पूरे देश से कांग्रेस सत्ता खो बैठी और जनता पार्टी की सरकार बनी .

आज मोदी सरकार के खिलाफ भी कुछ इसी तरह का माहौल बनने वाला है , उनके द्वारा किये गए चुनावी वादों में से कोई भी पूरा नहीं हुआ है उल्टा देश में संविधान और लोकतंत्र पर खतरे के बादल लगातार मंडरा रहे हैं .लेखकों , पत्रकारों की हत्याएं होरही हैं , देश का नौजवान और किसान आत्महत्याएं कर रहा है .बेरोज़कारी और मंहगाई बढ़ी चली जारही है . सरकारी और ग़ैर सरकारी रोज़गार के अवसर ख़त्म होते जारहे हैं .देश में साम्प्रदायिकता का माहौल है .धर्म के नाम पर पाखण्ड है .जातिवाद पनप रहा है इत्यादि.

इस अवसर पर कई समाज सेवी , और वरिष्ठ पत्रकारों ने अपनी अपनी बात रखी,और वर्तमान सरकार में तेज़ी से बढ़ती असंवैधानिक और ग़ैर लोकतान्त्रिक घटनाओं को देश के लिए बड़ा चैलेंज बताया .तथा इससे निमटने के लिए एक सियासी विकल्प तलाशने के बारे में भी विचार किया गया . 11 सदस्यी समिति का गाथा किया गया जो आगे देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए कार्येकर्म बनाएगी तथा देश में जगह जगह इस प्रकार के संगोष्ठियों का आयोजन करेगी जो देश तथा मानवता के हित में माहौल बना सकें .

कार्येक्रम का संचालन CFD के महामंत्री N D पंचोली ने किया , तथा अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी तथा CFD के चेयरमैन कुलदीप नय्यर ने की ।

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