नोटों से वोटों तक की उलटी गिनती

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मेरे  पास  पुराने  500 के  नोटों  के  7500 रूपये  थे  ,बैंकों और एटीएम पर लंबी लाइनें देखकर हिम्मत नहीं जुटा      पा रहा था कि नोट बदलवा लूँ ,पेट्रोल का टैंक फुल था ,ज़रूरतें सामने खड़ी थीं ,में जिस इलाक़े में रहता हूँ वहां दुकानदारों ,सब्ज़ी वाले जानते हैं साहब इसी कॉलोनी में रहते हैं आटा , दाल ,चीनी वगेरा का काम चल गया हालांकि उन्होंने यह भी इशारा करदिया ज़्यादा दिन तक उधार नहीं देसकते ,मगर फ़ोन recharge करने , दवा खरीदने , टायर में पंक्चर लगवाने के लिए , स्टेशनरी शॉप से बच्चों की  कॉपी किताब वगेरा खरीदने में काफी दिक़्क़त का सामना रहा । इस बीच एटीएम लूटने और बैंकों के अधिकारियों के साथ मार पीट की खबरें लगातार मिल रही थीं ।

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आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है की देश नोट बंदी के बाद अचानक आर्थिक संकट से दो चार होने की स्तिथि में पहुँच गया है जिससे निकलने की फिलहाल सरकार के पास भी कोई बेहतर सूरत नहीं है सरकार द्वारा रोज़ नए फैसले इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि नोटबंदी का फैसला या तो किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव में लिया गया है या फिर विपक्ष कि कमर तोड़ने कि योजना का हिस्सा होसकता है ताकि ब्लैक मनी जो चुनाव के दौरान लगाई जाती है उसको ठप करदिया जाए यह सही है बीजेपी और सहयोगी पार्टियों को अपनी ब्लैक मनी accommodate करने का पूरा मौक़ा योजनाबद्ध तरीके से मिल गया । अमित  शाह  जैसे कई नेताओं द्वारा अपने काले धन को ठिकाने लगाने के लिए देश भर में अरबों रुपयों की ज़मीन खरीदे जाने का समाचार आज के अखबारों में छपा है ।उधर सुब्रमण्यम स्वामी लगातार अरुण जेटली की पॉलिसीस को निशाना बनाते हुए कह रहे हैं की देश फाइनेंस  मिनिस्टर  की नाकामियों को भुकत रहा है ।

 

केंद्र सरकार की ओर से नोटबंदी का फैसला लागू किए जाने पर ऑल इंडिया बैंकर्स यूनियन ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर उर्जित पटेल का इस्तीफा मांगा है। यूनियन ने उन पर बिना तैयारी के फैसला लागू करवाने का भी आरोप लगाया।
सीनियर बैंकर ने 500 रुपये की जगह 2000 रुपये का नोट पहले उतारने पर भी सवाल किया और कहा, ‘आरबीआई गवर्नर ने 2000 के नोट पर साइन किए। उनकी टीम को इस बात का अहसास क्यों नहीं हुआ कि 2000 रुपये के नोट का साइज 1000 रुपये के नोट से छोटा है। इससे दो लाख बैंक एटीएम मशीनों को एक साथ कैसे बदला जा सकेगा?’

बीजेपी द्वारा चलाई गयी योजना , जिसको आतंकवाद देश से मिटाने  ,पकिस्तान को कमज़ोर करने तथा दाऊद   कि कमर तोड़ने और भ्रष्टाचार को मिटाने की योजने बताया जा रहा था जो लगभग फ़ैल होगयी है अलबत्ता जमाखोर लोगों के साथ मंझोला और ग़रीब वर्ग काफी परेशान है ,इस बीच देश भर से आने वाले समाचारों  के अनुसार बैंकों  और ATM  की लाइन में तथा ख़ुदकुशी से मारने वालों की अनुमानित संख्या औसतन  50 नागरिक प्रतिदिन बताई जारही है ।इसके अलावा जिन लोगों के आज तक किसी भी वजह से बैंक अकाउंट नहीं हैं उनको भी अपनी जमा रक़म को ठिकाने लगाने में काफी दिक़्क़त आरही है इनमें मज़दूरों या डेली पगार मज़दूरों की संख्या काफी अधिक है । नोटों  और  वोटों की उलटी गिनती के साथ जनता का आक्रोश उस समय देखने को मिला जब आसनसोल के सांसद बाबुल सुप्रियो को ग़रीब जनता ने अपने ग़ुस्से का शिकार बनाया ।

इस बीच देश के मुख़्तलिफ़ हिस्सों में होने वाले निकाय चुनावों में नतीजों की खबर बीजेपी को काफी परेशान करने वाली है,यही वोटर आगे संसदीय तथा विधान सभा चुनावों पर असर डालते हैं।आइये  डालते  हैं  एक  नज़र  :

मध्य  प्रदेश  विधान  सभा  उपचुनाव  में  BJP तीनो  सीटों  पर  ढ़ेर  ।

राजस्थान  झालावाड़ BJP के सभी 22 निकाय उम्मीदवार हुए धाराशाही  ।

गुजरात-उंझा तालुका पंचायत चुनाव में सभी 36 सीटों पर भाजपा ढ़ेर ।

महाराष्ट्र-पनवेल APMC की सभी १७ सीटों को भाजपा ने गवां दिया ।

दरअसल   इन  नतीजों  को  मोदी  पर  जनता  का  सर्जिकल  सटीक  भी  कहा  जारहा  है ।

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