डूबते जहाज हैं ट्रम्प और मोदी

Date:

डूबते जहाज हैं ट्रम्प और मोदी

विकास नारायण राय

क्या राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमन्त्री मोदी, जिनके एक जैसे नस्ली राष्ट्रवादी प्रशंसक हैं, अभी से डूबते हुए जहाज कहे जायेंगे? अमेरिका में ट्रम्प के दर्जन भर करीबी सहयोगी डेढ़ साल में ही उनका प्रशासन छोड़ गये| इनमें से अधिकतर ने कड़वाहट और अपमान भरे वातावरण में विदा ली| एक को सजा हो चुकी है जबकि कुछ अन्य इसी रास्ते पर हैं| स्वयं उनका चुनाव प्रमुख और दशकों का विश्वासपात्र मैनाफोर्ट उनके विरुद्ध वायदा माफ गवाह बन गया है|

जबकि मोदी के भी आधा दर्जन कॉर्पोरेट चहेते उनका काफी शासन शेष रहते भी भारत से माल-असबाब सहित निकल लिए| इन भगोड़ों के पीछे कानून और प्रवर्तन की तमाम एजेंसियां पड़ी हुयी हैं| यहाँ तक कि आरोपों से घिरी राफेल डील के भागीदार अनिल अम्बानी के भी देश छोड़ कर भागने की आशंका सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गयी| मोदी सरकार के, खूब ढोल बजाकर विदेशों से बुलाये गये कई आर्थिक सलाहकार भी एक-एक कर छू मंतर हो रहे हैं|

एक समझ यह बनी है कि ट्रम्प और मोदी ने अपने जैसे स्तर के करीबी ही तो चुने होंगे| यानी उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है! दूसरे, जो उत्कृष्ट स्तर के सहयोगी इन्हें विरासत में मिले भी उनसे इनकी वैसे भी नहीं निभ सकती थी| उदाहरण के लिए, अमेरिका में एफबीआई के सम्मानित डायरेक्टर कोमी को ट्रम्प ने और भारत में रिजर्व बैंक के नामी गवर्नर राजन को मोदी ने इसी लिए चलता किया|

ट्रम्प का श्वेत रिपब्लिकन जज, ब्रेट कावानाग को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट के लिए नामांकित करना आजकल वहां का सबसे चर्चित मुद्दा बना हुआ है| कावानाग ने अपनी बेदाग छवि को लेकर टीवी साक्षात्कार में डींगें क्या मारीं कि उनके साथ की पढ़ी एक श्वेत प्रोफेसर क्रिस्टीन ब्लेसी फोर्ड ने सामने आकर उन पर स्कूल जीवन में यौन हमले का आरोप लगा दिया| साथ ही उनके बेतरह शराब पीने के भी किस्से सामने आये| सेनेट, जो ऐसे नामांकन पर बहुमत से मुहर लगती है, इस कदर बंट गयी कि मामला सीमित जांच के लिए एफबीआई के हवाले करना पड़ा| अमेरिका भर में महिलाओं ने इसे जेंडर न्याय का मुद्दा बना लिया है और मीडिया में कयास है कि ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को नवम्बर में होने वाले मध्यावधि चुनाव में महिला वोटरों के गुस्से का खामियाजा भुगतना होगा|

इसी तरह भारत में आठ हजार करोड़ के बैंक कर्ज के डिफाल्टर देनदार विजय माल्या को वित्त मंत्री अरुण जेटली की शह से धन सम्पदा सहित लंदन भागने का मुद्दा बेहद चर्चित रहा है| सीबीआई, जो सीधे प्रधानमन्त्री के अधीन काम करती है, ने माल्या के लुक आउट नोटिस को ‘पकड़ कर सूचित करो’ से केवल ‘सूचित करो’ में बदल दिया था| स्वयं माल्या ने बताया और जेटली ने माना कि भागने से दो दिन पूर्व दोनों इसी सम्बन्ध में संसद में मिले भी थे|

कावानाग और जेटली जैसी बोझ छवि वाले पिछलग्गुओं को लगातार समर्थन देते रहना स्वयं ट्रम्प और मोदी के राजनीतिक चरित्र की भी बानगी है| लाख आलोचना के बावजूद ट्रम्प ने अपना टैक्स रिटर्न सार्वजनिक नहीं किया है| जानकारों का मानना है कि वे अपने वित्तीय घपलों को छिपा रहे हैं| इसी तरह मोदी की शैक्षणिक डिग्रियां भी अरसे से आरोपों के घेरे में चली आ रही हैं| मुख्यमंत्री गुजरात के रूप में दिए एक साक्षात्कार में वे स्वयं को हाई स्कूल तक पढ़ा बता रहे हैं, जबकि बाद में उनकी ओर से बीए और एमए करने का दावा सामने आ गया|

दूसरी तरफ, ट्रम्प और मोदी का बड़बोला होना उनके योग्य सहयोगियों को बहुत देर तक रास नहीं आ पाना भी स्वाभाविक था| मोदी सरकार के तमाम आर्थिक सलाहकार एक-एक कर यूं ही नहीं अपनी जिम्मेदारियों से अलग होते गये हैं| कालाधन, नोटबंदी, रोजगार और रुपये की गिरती कीमत को लेकर प्रधानमन्त्री के रोजाना के झूठ वे आंकड़ों की बाजीगरी से कहाँ तक निभाते!

इसी तरह ट्रम्प का नजला भी निरंतर उनके प्रेस और कम्युनिकेशन अधिकारियों पर गिरता रहा है जो ट्रम्प के झूठ बोलने की गति से तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं| अब तक व्हाइट हाउस के दो प्रेस सेक्रेटरी और दो कम्युनिकेशन डायरेक्टर इसीलिए पदों से हटाये जा चुके हैं|

स्वयं अपने लगाये अटॉर्नी जनरल जश सेशेल्स को ट्रम्प महीनों से सरेआम निकम्मा कह रहे हैं क्योंकि उनके कहे मुताबिक सेशल्स स्पेशल काउंसल रोबर्ट मुलर की उस विशेष जांच में दखल देने से परहेज कर रहे हैं जिसमें ट्रम्प की मदद के लिए राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल के आरोपों की छान-बीन हो रही है| अमेरिका में अटॉर्नी जनरल ही न्याय विभाग का प्रमुख होता है| नवम्बर चुनाव में विपरीत असर को देखते हुए फ़िलहाल सेशेल्स की बर्खास्तगी रुकी हुयी है|

अमेरिका में ‘फैक्ट चेकर’ विश्लेषण के मुताबिक ट्रम्प अपने कार्यकाल के 601वें दिन पांच हजार झूठ या भ्रामक तथ्य बोलने तक पहुँच गये हैं| मोदी को लेकर ऐसा कोई विश्लेषण भारत में सामने न भी आया हो लेकिन उनका शायद ही कोई भाषण होगा जिसमें झूठ और गलतियों की भरमार न मिले| प्रधानमन्त्री का ‘फेंकू’ कहा जाना उनकी सारी सरकार के लिए शर्मनाक बात है| आश्चर्य नहीं कि दोनों की कैबिनेट में स्तरहीन व्यक्तियों की भरमार है|

मोदी, अपनी असफलताओं को कांग्रेस और नेहरू के मत्थे मढ़ने से आगे नहीं बढ़ सके और ट्रम्प अपने हर कदम को अमेरिकी इतिहास में सर्वश्रेष्ठ कहने से नहीं चूकते| पिछले महीने यूएन में भाषण देते हुये जब ट्रम्प ने यही दावा वहां भी दोहराया तो उपस्थित प्रतिनिधियों को बरबस हंसी आ गयी| अमेरिका में गंभीरता से माना जा रहा है कि ट्रम्प, महाभियोग के रास्ते पद से हटाये जाने की दिशा में बढ़ रहे हैं| भारत में भी ऐसे लोगों की कमी नहीं जो मानते हैं कि मोदी के नाम पर आगामी तीन विधान सभाओं के चुनाव में जीत हासिल कर पाना मुश्किल होगा|

कहते हैं जहाज डूबने से पहले चूहे भी निकल जाते हैं| जिस हिसाब से ट्रम्प और मोदी के कृपापात्र और सलाहकार चुपचाप निकल रहे हैं, कहीं उन्हें डूबता जहाज ही तो नहीं दिख रहा!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

Electoral Roll Revision 2026: A Case Study of Lucknow

Lucknow, the capital of Uttar Pradesh India’s largest and...

Humayun Kabir Controversy: अमित शाह का बड़ा बयान

हुमायूं कबीर के वीडियो को लेकर अमित शाह ने...

मथुरा में बड़ा हादसा, यमुना में डूबे 25 भक्त

भक्तों से भरी नाव यमुना में डूबी, 10 लोगों...

Diplomacy Over Hypocrisy and Destruction

The world owes a measure of gratitude to Pakistan’s...