मुस्लिम अवाम को संशोधन विधेयक लाने से पहले भी कोई सामाजिक या आर्थिक लाभ नहीं था अलबत्ता ….
राज्यसभा में क्या था वक़्फ़ विधेयक के समर्थन का गणित?
Waqf Bill Amendment 2024: लोकसभा में बुधवार रात करीब 1.56 बजे वक़्फ़ संशोधन विधेयक बहुमत से पारित होने के बाद राजयसभा से भी पास करा लिया गया ।
पूरा दिन चली चर्चा के बाद 3 मार्च की आधी रात को राज्ये सभा से भी वक़्फ़ संशोधन बिल पास करा लिया गया .
विपक्ष के सदस्यों द्वारा तर्कसंगत मश्वरों और प्रस्तावों के बावजूद राज्य सभा में सत्तापक्ष की संख्या अधिक होने के कारण बिल को पास करा लिया गया .
राज्यसभा की कार्रावाई चार अप्रैल को सुबह चार बजे तक चलने के बाद ग्यारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
बता दें कि इससे पहले लोकसभा में विधेयक के पक्ष में 288, जबकि विरोध में 232 मत पड़े। विधेयक पर लोकसभा में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई थी।
इसके बाद राज्यसभा में वक़्फ़ संशोधन विधेयक पारित किया गया, जिसके बाद अब ये विधेयक, कानून बनने से केवल एक कदम दूर है।
अब इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास हस्ताक्षर औपचारिकताभर के लिए भेजा जाएगा।जबकि विपक्ष के पास अभी अदालत में challenge करने का रास्ता बचा है .
वक़्फ़ बिल के दोनों सदनों में पारित हो जाने के बाद अनेकों सवालात ने जन्म ले लिया है .देश की सबसे बड़ी अक़लियत के नेताओं और सेक्युलर अवाम में ग़मो ग़ुस्सा पाया जा रहा है
सदनों में संख्या बल के बूते बीजेपी ने भले इसको पारित करा लिया मगर देश की 70 % जनता को यह बिल मंज़ूर नहीं है ऐसा आंकलन पेश किया जा रहा है.
70 % इसलिए कहा की 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 30% ही मैंडेट मिला था . हालाँकि NDA के घटकदलों के साथ आने के बाद बीजेपी सर्कार बनाने में कामयाब रही थी.
बिल पर सदन में बहस के दौरान एक बात जो सबसे ज़्यादा ज़िक्र की गई वो है वक़्फ़ बोर्ड की जायदादों को खुर्द बुर्द करने में बोर्ड के मुतवल्ली, Chairmen और सदस्यों की ला पर्वाही और स्वार्थपूर्ण भूमिका .
और यह बात काफी हद तक सही भी है कि जिस मक़सद के लिए औक़ाफ़ की स्थापना हुई थी वो परिपूर्ण करने में बोर्ड नाकाम रहे. औक़ाफ़ के सम्बन्ध में अब जो बिगाड़ के इमकान हैं वो काफ़ी बेचैन करने वाले हैं.
हालाँकि सच्चाई यही है कि वक़्फ़ की जायदादों का मुस्लिम ठेकेदारों ने ही लाभ उठाया है. क़ौम जानती है मुस्लिम अवाम को संशोधन विधेयक लाने से पहले भी कोई सामाजिक या आर्थिक लाभ नहीं था .
अब जो नुकसान हो सकता है वो है औक़ाफ़ के Under आने वाली नॉन रजिस्टर्ड मस्जिदों , मदरसों ,मुसाफ़िर खानों और ख़ानक़ाहों के अस्तित्व पर मंडराता ख़तरा .
मुख़्तसर कहा जा सकता है कि दुनिया और देश में मुसलमानों पर आने वाले हालात के लिए इस्लाम दुश्मन सोच एक Factor ज़रूर है लेकिन मुसलमानों के अपने आमाल और किदार इसके लिए ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं .
आजके समाचारों के अनुसार दोनों सदनों में बिल पास होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में वक्फ विधेयक को चुनौती देने की कांग्रेस तैयारी कर रही है .सूत्रों के अनुसार विपक्षी दल और AIMPLB जल्द अदालत का दरवाजा खटखटाएगी.
राज्यसभा में क्या था वक्फ विधेयक के समर्थन का गणित?
वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में NDA के पहले से संख्या बल अधिक होने की वजह से पास हो गया। हालांकि, इसे राज्यसभा में चुनौती मिलने की संभावना थी , लेकिन आखरी समय में कई दल पलट गए ।
राज्यसभा में कुल सांसद की सीटें 245 हैं। हालांकि, मौजूदा समय में सदन में 236 सांसद ही हैं, वहीं 9 सीटें खाली हैं।
राज्यसभा में कुल 12 सांसद नामित हो सकते हैं, लेकिन इनकी संख्या फिलहाल 6 है। इस लिहाज से राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत थी।
राज्यसभा में भी विपक्ष के रूप में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, इसके राज्यसभा में 27 सांसद हैं। जबकि बीजेपी के पास 98 सदस्य मौजूद हैं जो काफ़ी बड़ी संख्या है .