हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ‘प्राकृतिक आपदाएँ अब पहले से ज़्यादा तीव्र और विनाशकारी होती जा रही हैं। हमें मिलकर इनके कारणों की तलाश करनी होगी
Uttarkashi Cloud Burst :भारतीय सेना ने अपने बयान में कहा कि आज दोपहर करीब 1:45 बजे हर्षिल स्थित भारतीय सेना के कैंप से लगभग 4 किलोमीटर दूर धराली गांव के पास अचानक आसमान से फटे बादल के कारण पानी ने सैलाब का रूप ले लिया और फिर भूस्खलन हुआ।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी से 80 किलोमीटर दूर और गंगोत्री से 20 किलोमीटर पहले यहां मौजूद पूरा धराली का इलाका तबाह हो गया है.
सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 150 कर्मियों को घटनास्थल पर भेजा,जो 10 मिनट के भीतर वहां पहुंच गए और बचाव अभियान शुरू कर दिया है।आज शाम 4 बजे तक लगभग 15-20 लोगों को सफलतापूर्वक सुरक्षित बाहर निकाले जाने का बताया गया है. घायलों को हर्षिल में भारतीय सेना की मेडिकल सुविधा में तुरंत इलाज दिया जा रहा है।
लोगों की खोज और बचाव कार्य जारी है और फंसे हुए बाकी लोगों का पता लगाने और उन्हें बाहर निकालने के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले के धराली में बादल फटने से ऊंचाई पर स्थित गांवों में मंगलवार को अचानक बाढ़ आ गई और दर्जनों मकान कागज़ के टुकड़ों की तरह बह गए और दर्जनों क्षतिग्रस्त हो गए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि खीर गंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बादल फटने से विनाशकारी बाढ़ आ गई। अब तक इस घटना में मरने वालों की संख्या का कोई सही संख्या नहीं बताई गई है किन्तु भारी जानी नुकसान का इमकान जताया जा रहा है .
इलाके के गांवों में ज़बरदस्त दहशत का माहौल है , लोग सुरक्षित जगह की तलाश में इधर-उधर भाग रहे हैं। इस भारी तूफ़ान की वीडियो में लोगों को चीखते-पुकारते देखा जा सकता है। और यह घटना प्रभावित लोगों के लिए किसी क़यामत से काम नहीं है.
हर्षिल में बने सेना के कैंप को भी नुकसान पहुंचने की खबर
बादल फटने की घटना में हर्षिल में बने भारतीय सेना के कैंप को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। यह कैंप 14 राजपूताना राइफल्स के जवानों का था और हादसे के बाद काफी जवानों के लापता होने की खबर है।
बतादें की हादसे के समय कैंप में 200 से ज्यादा लोग मौजूद थे। बताया जा रहा है हर्षिल घाटी में नदी किनारे बना हैलीपेड भी बह चूका है।
अभी टला नहीं है संकट, विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट
अचानक आई बाढ़ के बाद ख़तरा अभी टला नहीं है। मौसम विभाग ने रात 9 बजे तक लगातार भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। बताया गया है कि इस दौरान भारी से अति भारी बारिश होने की आशंका है, जिसके चलते धराली में चल रहे राहत एवं बचाव कार्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
हिमाचल के सीएम को कारणों की तलाश की हुई चिंता
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी हादसे पर दुख जताया और सोशल मीडिया पर लिखा, ‘उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा की ख़बर से मन अत्यंत व्यथित है। इस आपदा की पीड़ा को मैं भली-भाँति समझता हूँ- हमने ऐसी परिस्थितियों की भयावहता को करीब से देखा है। अपनों को खोने का दर्द सहा है।’
आगे उन्होंने लिखा, ‘प्राकृतिक आपदाएँ अब पहले से ज़्यादा तीव्र और विनाशकारी होती जा रही हैं। हमें मिलकर इनके कारणों की तलाश करनी होगी- पर्यावरणीय असंतुलन और बदलते मौसमीय पैटर्न को समझना होगा.
“प्राकृतिक आपदाओं को रोकने का तरीक़ा एक ही है कि प्रकृति को राज़ी किया जाए .भले कामों को करने के लिए सरकारें नागरिकों को प्रेरित करें प्रोत्साहित करें. और ऐसे क़ानून बनाये जाएँ कि लोग अपने बनाने वाले की मानने वाले बन जायें “.
ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बेहतर तरीक़े से निपटा जा सके और जन-जीवन की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।’ अंत में उन्होंने लिखा ‘इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएँ धराली क्षेत्र के सभी प्रभावित परिवारों के साथ हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि सबकी रक्षा करें।’
प्राकृतिक आपदाओं को रोकने का तरीक़ा
अब यह बात तो तय है कि धरती पर बढ़ते ज़ुल्म , अत्याचार और अन्याय से प्रकृति सख़्त नाराज़ है . आख़िर उसके यहाँ भी माफ़ करने की कोई समय सीमा तो होगी . वो कब तक नाफ़रमान बन्दों के पापों को माफ़ करता रहे.जब धरती पर क़ुदरत के ना फ़रमानों और अधर्मों का अनुपात बढ़ जाता है , और पाप को पाप नहीं समझा जाता है और जब न्यायिक प्रणाली खुद बेईमान और नाइंसाफ हो जाए . तो फिर प्राकृतिक आपदाओं का आना लाज़मी होता है .
जब धरती पर लगातार पीड़ितों को इंसाफ़ की जगह सज़ा दी जाए . ज़ालिमों पर कृपा की जाने लगे तो फिर प्रकृति को ही अपना डमरू घुमाना होता है . और ऐसा हमेशा होता रहा है , लिहाज़ा ज़रुरत इस बात की है के अब उसकी ना फ़रमानी से सामूहिक तौर पर और निजी तौर पर तौबा की जाए .
प्राकृतिक आपदाओं को अगर आप रोकना चाहते हैं तो धरती पर हर ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी के खिलाफ कड़े क़ानून को लागू किया जाए .मगर सरकारों की तरफ से तमाम कड़े क़ानून या तो बेगुनाहों , मासूमों या एक ख़ास धर्म या जाती के लिए होते हैं. अब यह सरकारी ज़ुल्म है अत्याचार है ,प्रकृति की नाराज़गी वाले काम हैं .सरकार को तो भले कामों के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए .
प्राकृतिक आपदाओं को रोकने का तरीक़ा यही है कि क़ुदरत को राज़ी करने वाले कामों को करने के लिए सरकारें नागरिकों को प्रेरित करें प्रोत्साहित करें और ऐसे क़ानूनन बनाये कि लोग हर हाल में अपने बनाने वाले की मानने वाले बन जायें . फिर यह धरती खुद स्वर्ग का टुकड़ा बन जायेगी.
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