पैग़ाम पुर मलाल , तालीमी ज़मीन के दो तारे ग़ुरूब होगये

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क़ौम ओ मिल्लत और इंसानियत के दिलों की धड़कन और तालीमी मैदान के शाहकार , सादगी और मोहब्बत की पहचान रफ़ीक़ बेलिम और फ़ुरक़ान ख़ान के इंतक़ाल पुर मलाल पर टाइम्स ऑफ़ पीडिया ग्रुप ख़िराज ए अक़ीदत पेश करते हुए उनकी मग़फ़िरत की दुआ करता है और अहल ए ख़ाना व् अहल ए ताल्लुक़ के सब्र की दुआ करता है

From Dr Azhar Mirza & Mazhar Mirza (Directors Sarvodya Academy kota)

मेरे तमाम काबिल ए अहतराम बुज़ुर्गो और अज़ीज़ दोस्तों,

ज़िन्दगी एक मुसलसल जद्दोजहद का नाम है जो सिर्फ़ और सिर्फ़ इंसानी मौत के साथ ही खत्म होती है। जैसा कि आप सभी हज़रात को इल्म है, सर्वोदय एजुकेशनल ग्रुप के दो हर दिल अज़ीज़ साथी गुज़िश्ता 17 फरवरी को एक ख़ौफ़नाक सड़क हादसे में हमें तनहा औऱ ग़मगीन छोड़कर हमसे हमेशा हमेशा के लिए रुख़सत हो गए हैं।

मेरी मुराद जनाब फुरकान अहमद साहिब (मामू) और जनाब रफ़ीक़ बेयलिम साहिब से है जो सर्वोदय फैमिली का अहम हिस्सा थे।


फुरकान मामू हमारे वालिद साहिब जनाब अब्दुल ग़फ़्फ़ार मिर्ज़ा साहिब के बाज़ू ए क़ुव्वत थे जिन्होंने हमारे इदारे की खुशहाली और तरक्की के लिये ता-उम्र अपनी बेलौस ख़िदमत अंजाम दी और इसे बुलंदी पर पहुंचाने में अहम किरदार अदा किया। वे सुबह से शाम तक इसी ग़ौर ओ फिक्र में मुब्तिला रहते थे कि इसे बेहतर से बेहतरीन शक्ल कैसे अंजाम दी जा सकती है।


इसी तरह से सर्वोदय एजुकेशनल ग्रुप के CEO जनाब रफ़ीक़ बेयलिम साहिब की हिकमत ए अमली की भी जितनी तारीफ की जाए, कम है। उनकी काबिलियत, ईमानदारी, बेमिसाल मेहनत और मशक्क़त भी सर्वोदय की तारीख में सुनहरे लफ़्ज़ों में दर्ज किए जाने की हैसीयत रखती है। तमाम मुआशरे को दीनी और दुनियांवी तालीम की रोशनी से सरसब्ज़ करने का जो काम रफ़ीक़ साहिब ने किया है, उसे अल्फाज़ो में बांधा जाना मुश्किल ही नही बल्कि नामुमकिन भी है।

यह हमारी खुशनसीबी है कि कलंदरी मिज़ाज और बादशाही रुतबे वाली ये दोनों लाजवाब शख़्सियत हमसे एक बहुत लंबे अरसे तक बावस्ता रही। इनकी बेवक्त और नागहानी मौत से हमने दो नायाब हीरे हमेशा हमेशा के लिए खो दिए है जिसकी भरपाई किसी भी शक्ल और सूरत में मुमकिन नही है। हम हमेशा हमेशा के लिए इन मर्द ए मुजाहिदीन के कर्ज़दार रहेंगे। जब जब सर्वोदय का ज़िक्र होगा, तब तब इन्हें भी बड़ी शिद्दत से याद किया जाएगा।


हम इन्हें सर्वोदय एजुकेशनल ग्रुप की जानिब से ख़िराज़ ए अक़ीदत पेश करते हैं। हमारी रब्बुल आलमीन से दुआ है कि मरहूमींन के हर सग़ीर ओ कबीर गुनाह को दर गुज़र करे, इनकी मग़फ़िरत फरमाये, इन्हें जन्नत उल फिरदौस में आला मक़ाम अता करे और इनके अहल ए खाना को सब्र ओ जमील की दौलत से नवाज़े, आमीन।

“रखता है बाद ए मर्ग यहाँ कौन किसको याद,
कुछ बात थी जो उनको भुलाया नही गया।

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