अनोखे अंदाज़ और निराले तेवर के साथ, इंसाफ़ की डगर पर
नहीं है ना-उमीद ‘इक़बाल’ अपनी किश्त-ए-वीराँ से ज़रा नम हो तो ये मिट्टी बहुत ज़रख़ेज़ है…