आह…. मेरे प्यारे रफ़ीक़ और फ़ुरक़ान,,,,रब तुम्हारी मग़फ़िरत फ़रमाये

ख़िराज ए अक़ीदत लाई हयात आये , क़ज़ा ले चली चले ! अपनी ख़ुशी से आये…