“तब्लीग़ी जमात के ख़िलाफ़ चलाये गए Narrative के लिए मीडिया मांगेगा माफ़ी”
तब्लीग़ी जमात प्रकरण पर 11 हज़ार 74 रिपोर्ट्स Publish हुई थीं ,28 FIR 198 जमातियों पर मुक़द्दमे
तब्लीग़ जमात के ख़िलाफ़ Propeganda चलाने वाले प्रायश्चित करें और देश में एकता अखंडता के लिए सकारात्मक माहौल बनाएं
तब्लीग़ी जमात प्रकरण
Justice Delayed is justice Denied
न्याय में देरी न्याय देने से इनकार को परिभाषित करता है
तब्लीग़ी जमात पर झूठ और नफ़रत फैलाने वाले Anchors ,पत्रकार और Editors क्या अभी इसी दुनिया में हैं ?? अगर अभी वो बचे हैं और उनकी अंतरात्मा बची है तो क्या इस सच को भी बताएँगे कि “तब्लीग़ जमात” के ख़िलाफ़ Covid फैलाने वाली ख़बरें , Reports , Articles सब झूठ था धोखा था देश के साथ ग़द्दारी थी ?
हालांकि हमको पता है नफ़रत और झूठ के सौदागर, मोहब्बत और सच के बाजार में Entry नहीं कर सकते. हालांकि तब्लीग़ी जमात आज भी पूरी दुनिया में शिद्दत के साथ अपने काम में लगी है .
तब्लीग़ जमात के ख़िलाफ़ FIR और PILs को कर्नाटक HC , मद्रास ,बॉम्बे ,और इलाहाबाद HC से रद्द होने के बाद अब दिल्ली HC ने भी Quesh कर दिया रद्द कर दिया.इसके बाद सिर्फ 2 – 4 अख़बारों में ही एक Column की खबर क्यों लगाई गई .
लिहाज़ा आपको बहुत ध्यान से यह पूरी वीडियो देखनी है/Report पढ़नी है . जिस मीडिया को आपने ईश्वर का दूत मान रखा है वो आपको ऐसी आग में धकेल रहा है जहाँ आपके वुजूद को बड़ा ख़तरा है !
5 साल तक अदालतों का वक़्त बर्बाद किया गया . Agencies को भ्रमित किया गया , सांप्रदायिक स्वभाव को बिगाड़ा गया , नफरत फैलाई गई , सैंकड़ों लोगों के साथ मारपीट और जान से मार देने तक की घटनाएं हो गईं. भारी माली नुकसान कराया गया. तो ऐसे में तब्लीग़ जमात के ख़िलाफ़ झूठ फैलाने और Perception तैयार करने वालों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई होनी ही चाहिए .
उच्च न्यायालय ने कहा इस बात का कोई सबूत नहीं है कि तब्लीगी सदस्य कोविड Carriers थे या Cllectively यानी जमात की शक्ल में कोविड पॉजिटिव पाए गए थे। HC ने कहा इसका कोई सुबूत नहीं पाया गया .
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि लॉकडाउन की घोषणा से पहले से ही तब्लीगी सदस्य मरकज़ निजामुद्दीन की इमारत में दाखिल हो चुके थे। लिहाज़ा इस बात का भी कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने किसी आदेश का उल्लंघन किया हो या कोविड फैलाने जैसा कुछ किया हो।
दिल्ली HC से पहले बॉम्बे HC भी कह चूका है कि……. दिल्ली निजामुद्दीन मरकज़ में कार्यक्रम में विदेशी नागरिकों के खिलाफ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़ा Propeganda चलाया गया .
पहला सवाल: क्या वे सभी लोग, चाहे वे मीडिया हों या राजनेता, जिन्होंने कोरोना जिहाद जैसे बेतुके और नफ़रती शब्दों का इस्तेमाल करके तब्लीग़ी जमात को बदनाम करने की कोशिश कि थी आज देश कि जनता से माफ़ी मांगेंगे? क्या गिरफ्तारियाँ करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी? क्या दोषी संस्थाओं या व्यक्तियों पर Defamation के मुक़द्दमे लगाए जाएंगे, क्या उनपर मान हानि के मुक़द्दमात चलाये जाएंगे ??
हैरत की बात यह है की दुनिया के 200 देशों में फैली 20 करोड़ से ज़्यादा followers वाली तब्लीग़ी जमात ने इस झूठ के खिलाफ न तो कोई धरना किया न प्रदर्शन और न ही इन नफ़रतीयों और अम्न के दुश्मनों के ख़िलाफ़ कोई FIR कराई . सोचो जिन देशों के जमातियों के खिलाफ यहाँ झूठी FIRs कराई गयी थीं आज उन सब मीडिया संस्थानों नफ़रती राजनेताओं और पत्रकारों के ख़िलाफ़ उन सब देशों के Victims अपने अपने देशों में Defamation , मानहानि और मेन्टल हरासमेंट की धाराओं के साथ मुक़द्दमात तय कर दें तो इन चाटुकारों और नफ़रतीयों का 2 पेशियों में घर बिक जाएगा .
लेकिन हमको मालूम है तब्लीग़ी जमात मुआफी , मोहब्बत , दरगुज़र और इकराम के उसूलों पर अमल करने वाली जमात है. वो ऐसा नहीं करेगी और हम भी तब्लीग़ी जमात से इस बात की दरखुआसत करेंगे कि इन सब नफ़रतीयों को एक बार फिर मुआफी दे दी जाए.
और देश की अदलिया का शुक्रिया अदा किया जाए , जिसने भले देर से लेकिन इंसाफ़ का फ़ैसला किया. लेकिन इन नफ़रतीयों को भी आइंदा किसी झूठी खबर या Propeganda चलाने से तौबा कर लेनी चाहिए और अम्न पसंदों के देशप्रेम और सब्र को उनकी कमज़ोरी न समझा जाए .
बक़ौल शाइर के
मोहब्बत में अगर गर्दन उतरवाली तो कहते हैं
ज़रा सी और नीचे से उतर जाती तो अच्छा था
धार्मिक नफ़रत और नकारात्मक Narrative चलाने से सिर्फ TRP नहीं बढ़ती बल्कि मज़हबी और सामाजिक द्वेष बहुत बढ़ता है जो देश को कमज़ोर बना देता है देश की एकता अखंडता के लिए बड़ा खातर बन जाता है . 80 % जनता TV और अखबार की खबर को आखरी हरफ़ समझती है अपनी अक़ल या विवेक का इस्तेमाल नहीं करती. इसलिए खबर के बाद माहौल तुरंत गरमा जाता है.
तब्लीग़ जमात के सम्बन्ध में Alt news ने सैकड़ों फ़र्ज़ी videos का पर्दा फाश किया था. Media Scanner की Report में खुलासा किया गया था कि TV पर तब्लीग़ जमात के ख़िलाफ़ बनाये गए माहौल से 28 बड़ी घटनाएं हुईं .
Fact check Report में खाने में थूकने और संक्रमण फैलाने के फ़र्ज़ी वीडियो को Fake साबित किया गया था.07 August 2020 के The Hindu Group के Bussinessline अखबार में सौन्दर्य अय्यर और शोबल चक्रबर्ती की joint Report छपी है जिसमें 20 मार्च से 27 April के बीच यानी कुल 37 दिनमें 271 Media Sources को खंगाला गया .
उसमें पाया गया तब्लीग़ जमात को लेकर 11 हज़ार 47 Reports छपी हैं .2 april 2020 को यानी सिर्फ एक दिन में तब्लीग़ी जमात मामले को लेकर 1451 Articles छापे गए ,सिर्फ 5 हफ्ते में अकेले Times Of India अख़बार में 1863 stories छपी थीं ,जिनको 3 ,19 ,874 मर्तबा Facebook पर शेयर किया गया था .अब आप खुद ही अंदाजा कीजे कितनी तेज़ी से तब्लीग़ जमात के ख़िलाफ़ माहौल बनाया जा रहा था.किस तरह देश की जनता के ज़ेहनों को poluted किया जा रहा था .
इसी के बाद मुसलमानो की पहचान करके ठेलों पर सब्ज़ी और दीगर सामान बेचने वालों को मारा और धमकाया जा रहा था. मुसलमानों का कारोबारी और Social bycott करने के आव्हान समाज दुश्मन संस्थाओं की तरफ से किये जाने लगे थे .
लेकिन तब भी समाज में नैतिकता मरी नहीं थी कई ग़ैर मुस्लिम परिवार इंसाफ़ की बात कर रहे थे.कई मीडिया कर्मी और youtubers बहुत balanced और Positive पत्रकारिता कर रहे थे आज भी कर रहे हैं.
जिन हिन्दू परिवारों ने Covid संक्रमण के डर से अपनी लाशों के पास आने से और अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया था वहां मुस्लिम नौजवान उनकी अर्थियों को लेजाते और चिताओं का प्रबंध करते दिखाई दे रहे थे.
आलम यह था ,,,,कि माँ बाप अपनी औलाद को , औलाद अपने माँ बाप को , भाई भाई को ,,,,,और बहिन को रोटी 2 गज़ दूर से फेंक कर दे रहे थे . ऐसे में लोगों को किसी भी Propeganda के ख़िलाफ़ Convence कर पाना और यह समझाना मुश्किल था कि तब्लीग़ी जमात के ख़िलाफ़ यह सब Media Propeganda है.
और यह सब उस जमात के ख़िलाफ़ हो रहा था जो आसमान से ऊपर और ज़मीन से नीचे की बात करती है. सियासत से, हुकूमत साज़ी से,किसी पार्टी से, चुनाव से,टीवी की किसी बहस से उनका कोई सरोकार ही नहीं होता . इस जमात पर खुद मुसलमानों का यह ऐतराज़ है कि आपलोग मुसलमानों के ख़िलाफ़ होने वाले किसी भी ज़ुल्म के ख़िलाफ़ कोई बयान तक नहीं देते .
हालांकि जमात के एक बुलावे पर बिना इश्तहार NO BANNER NO POSTER लाखों लोग इकठ्ठा हो जाते हैं. तब्लीग़ी जमात से सवाल होता है कि कभी मरकज़ से मुसलमानों के नागरिक अधिकारों की आवाज़ क्यों नहीं उठाई जाती . इसके बाद जमात के ज़िम्मेदारों का एक ही जवाब होता है कि अल्लाह से कहो क्योंकि वही कारसाज़ है. अगर अपने हालात बदलना चाहते हो तो आमाल को ठीक करो, मन चाही को छोड़कर रब चाही पर आजाओ,सब ठीक हो जाएगा.
Covid काल में हाल यह था कि अगर झूंठे को भी किसी ने कह दिया है की इस घर में Covid Positive है तो पुलिस के जवान मार मार कर उसको और उसके घर वालों को Quarantine कर दे रहे थे.
Quarantine Centres के हालात देखकर लोगों में पहले से भारी खौफ था लोग Centre जाने कि जगह घर में मरना पसंद कर रहे थे . मौत के injections लगाने की ख़बरें आरही थीं. ज़िंदा मरीज़ों को इलाज की जगह प्लास्टिक Bags में पैक किया जा रहा था .
इस दौरान सैकड़ों मील सड़कों पर पैदल चलते मज़दूर और आम जनता के पैरों के छाले हमारे शासन , प्रशासन की कार्यक्षमता और कार्यशैली कि शर्मनाक तस्वीरें पेश कर रही थी .सियासी नेताओं की जनता के प्रति उदासीनता , लापर्वाही की पोल खुल रही थी.
उस दौर में सब कुछ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की Guidelines पर चल रहा था या फिर मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर . ऐसे में मीडिया की ज़बरदस्त ज़िम्मेदारी थी कि वो बहुत सोच समझकर ख़बरों का चयन करते , Anchors की भाषा और अंदाज़ में जनता के होंसले और उम्मीद की किरन होनी चाहिए थी.
TV और अख़बारों में सुकून ,इत्मीनान और हिम्मत की झलक होना चाहिए थी , मगर वहां सब कुछ उल्टा पुल्टा हो रहा था लेकिन कुछ Youtubers और channels बड़ी ज़िम्मेदारी , निंष्ठा और एकाग्रता से रिपोर्टिंग कर रहे थे.और आज भी कर रहे हैं .
तब्लीग़ी जमात के कई लोगों पर इसलिए मुक़द्दमे किये गए थे कि उन्होंने जमात में आई महिलाओं को अपने घर में ठहराया हुआ था. जबकि क़ानून यह था कि कोई धार्मिक gathering नहीं होगी . घर में खानदान के साथ में 5 या 6 लोगों के एकसाथ रहने पर पाबंदी नहीं थी.मगर पुलिस तब्लीग़ जमात के साथियों के ख़िलाफ़ धड़ाधड़ मुक़द्दमे लिख रही थी .
लेकिन अदालत में Police अपनी Chargesheet में एक भी Covid Positive Report नहीं दिखा सकी. दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस की तमाम chargesheets को Quash कर दिया रद्द कर दिया …. क्या इसके बाद Covid जिहाद का गढ़ा गया बेहूदा जुमला उन मीडिया Houses के मुंह पर मारा जाएगा जो उन्होंने ख़ास मज़हब और जमात के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने के लिए चलाया था??
क्या दिल्ली पुलिस इस जुर्म के लिए माफ़ी मांगेगी कि उसने बिना तहक़ीक़ के तब्लीग़ जमातियों पर मुक़द्दमे ठोके थे ?? अगर पुलिस Commisioner नैतिकता दिखाते हुए अपने ब्यान में इसका खेद प्रकट कर दें तो यक़ीनन इसके बाद police के मान सम्मान और मर्तबे में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हो सकता है .
इसी के साथ तत्कालीन AAP की दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री और पूरी कैबिनेट को इस पूरे मुद्दे के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए कि हमसे बहुत बड़ी ग़लती हुई की तब्लीग़ जमात को Covid संक्रमण के लिए ज़िम्मेदार ठहराया.
इसके बाद उम्मीद की जाती है मुस्लिम समाज के दिल से आम आदमी पार्टी के खिलाफ ग़ुस्सा ख़त्म होगा और उसको खोई हुई साख को वापस लाने में सफलता मिल सकती है .जिसकी वजह से AAP पार्टी को दिल्ली चुनाव में भारी नाकामी का सामना करना पड़ा .
दूसरा सवाल :क्या तब्लीग़ जमात पर लगाए गए बेहूदा और निराधार झूठे इल्ज़ामात दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से रद्द किये जाने के बाद मीडिया इसपर भी कोई प्रोग्राम चलाएगी?? जिस मीडिया ने तब्लीग़ जमात के खिलाफ Propeganda को चलाया था , लोगों में नफरत की आंधी चलाई थी .
नफ़रत और झूठ पर आधारित Headlines लगाईं गयी थीं, आज जब आप इन Headlines को देख रहे हैं तो पता चल रहा है दरबारी मीडिया कैसी निराधार और देश के टुकड़े करने वाली रिपोर्टिंग करता है. कोविद काल में चलाई गई Headlines पर एक नज़र :
जमात की ना’पाक’ साजिश -देश अभी झेलेगा रंजिश”
जमात की घटिया हरकतों की गवाहियां”
करोना से जंग में जमात का आघात”
तब्लीग़ का कोरोना जाल”
तब्लीग़ी जमात का HQ बना कोरोना का एपिसेंटर”
तब्लीग़ी जमात का देश से विश्वासघात”
Telengaan – Nizamuddin Covid Link 140 Missing 15 infected 6 deaths”
देश के 30 % मामलों के पीछे तब्लीग़ी”
करोना का खतरा बढ़ाने वाली जमात”
जमात ने किया आघात”
देश की बड़ी अदालतों के फैसलों के परिपेक्ष में आज अगर इन Headings को रखा जाए तो ये हैडिंग बनाने वाले, चलाने वाले, बोलने वाले सब जेल में जा जाएंगे या भारी क़ीमत अदा करनी पड़ सकती है इन सबको …मगर देश का मुसलमान Nation First , देश की गरिमा और एकता अखंडता को सामने रखते हुए सब्र कर रहा है .
वो सब Main stream Media Houses जिनको Covid रोकथाम पर सरकार की तैयारियों पर सवाल और चर्चा करनी थी वो तब्लीग़ जमात narrative के कवछ में सरकारी नाकामियों को छुपाने में लगी थी .
दरबारी मीडिया को अपने अपराध के प्रायश्चित में इन Headlines को चलाना चाहिए कि ” तब्लीग़ी जमात पर लगे सभी आरोप निराधार ” ” तब्लीग़ जमात के ख़िलाफ़ दिल्ली सरकार की नफ़रती चाल बेनक़ाब ” “तब्लीग़ी जमात के ख़िलाफ़ चलाये गए Narrative के लिए मीडिया मांगेगा माफ़ी” तथा “तब्लीग़ी जमात मामले में पुलिस और मीडिया को अदालत की फटकार” . बस एक दिन केलिए ये Headlines चला दे मीडिया के भी सारे गुनाह मुआफ़ और TRP भी दोगुनी !!!
तीसरा सवाल यह है कि बदनाम करने वाली मीडिया और धाराएं लिखने वाली पुलिस के खिलाफ अब action कौन लेगा . हालांकि दिल्ली कि हुक्मरान पार्टी और मुख्यमंत्री को इसकी भारी क़ीमत चुनाव में चुकानी पड़ी थी जिसको सजा के तौर पर देखा जारहा था.
चलें सियासी नफ़रतीयों को तो सज़ा मिल गई मगर मीडिया और पुलिस के द्वारा सरकारी दबाव में किये गए अपराधों की सज़ा कब मिलेगी ? सवाल यह भी है कि क्या किसी ग्रुप या संस्था ने उन मीडिया संस्थानों के खिलाफ और मुजरिम पुलिस अधिकारीयों के ख़िलाफ़ कोई PIL डाली है .
अदालत से इस सम्बन्ध में रुजू किया गया है ? अगर नहीं इस सम्बन्ध में अदालतों में PILs होनी चाहियें . इस पूरे लेख में हमने संवैधानिक और मर्यादित भाषा का प्रयोग किया है .
लेखक ने वही लिखा और कहा है जो Public Domain में है मगर इस बात का अंदेशा है कि हमारे ऊपर भी कोई FIR कराई जा सकती है.लेकिन उसके लिए हमारे पास भी दर्जनों से ज़्यादा ऐसे सुबूत मौजूद हैं जो FIR कर्ता या याचिकाकर्ता को ही कटघरे में खड़ा करने के लिए पर्याप्त हैं .
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