आल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस और साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन के तत्वावधान में फ्री यूनानी मेडिकल कैंप का भव्य आयोजन, कई गणमान्य अतिथियों ने भी की शिरकत
यूनानी चिकित्सा प्रणाली , यंग इंडिया के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने में सफ़ल रही है . असल में तो एलोपैथी का जन्म सिर्फ 270 वर्ष पुराना है. इससे पहले यूनानी ,आयुर्वेदा चिकित्सा प्रणाली का ही चलन था. जर्राही यानि ऑपरेशन प्रकिर्या भी यूनानी पैथी में प्रचलित थी, लेकिन एक साज़िश के तहत आयुर्वेद और यूनानी को ख़त्म किया गया.
भारत में आयुर्वेद और यूनानी दोनों ने मिलकर देश की सेवा की है, बल्कि इसका एक तारीखी वाक़िया यह है की जब हकीमुल उम्मत अजमल खान साहब मरहूम ने करोल बाग़ तिब्बिया कॉलेज की बुनियाद रखी तो महात्मा गाँधी ने हकीम साहब से इस बात का आग्रह किया की अगर यूनानी के साथ आयुर्वेद को भी शामिल कर लिया जाए तो यह आयुर्वेद को भी बढ़ावा देगा.
लिहाज़ा हकीम अजमल खान साहब ने गाँधी जी की इस राये को तुरंत शामिल किया और करोल बाग़ में यूनानी के साथ आयुर्वेद की शिक्षा और प्रैक्टिस शुरू हो गई .मगर एक कड़वी सच्चाई यह है की भारत में जो स्थान आयुर्वेद को सरकारी तौर पर मिला वो यूनानी को नहीं दिया गया जबकि दोनों पद्धतियां देश की सेवा में समानांतर अपना किरदार अदा कर रही हैं. साथ ही भारत सर्कार ने जो प्रोत्साहन अंग्रेजी चिकित्सा प्रणाली को दिया है वो यूनानी और आयुर्वेदा को नहीं दिया.
जबकि ये दोनों भारत की सभ्यता और संस्कृति को भी बढ़ावा देती हैं तथा लोगों को दवा का कोई side effect भी नहीं होता. जबकि यह बात दुनिया जानती है कि एलोपैथी दवाओं के लगातार सेवन से दर्जनों नई बीमारियों को जन्म दिया गया साथ ही चिकित्सा के क्षेत्र में अंग्रेजी प्रणाली ने कई नए मिथ भी पैदा किये .

हर घर के द्वार यूनानी उपचार मिशन के तहत आल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस (AIUTC) पूरे देश में फ्री कैम्प्स के ज़रिये अपनी सेवाएं पहुँचाने में मसरुफ़ है और साथ ही यूनानी चिकित्सा के प्रोत्साहन में भी AIUTC का बड़ा किरदार है.
इसी कड़ी में 8 अक्टूबर को दिल्ली के साकेत कोर्ट प्रांगड़ में अधिवक्ता शेहजबीं क़ाज़ी की अध्यक्षता में 134वां फ्री मेडिकल कैंप का भव्य आयोजन किया गया. AIUTC और साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित इस कैंप में सफ़दर जंग अस्पताल से दांतों के Dr मनीष तिवारी और आँखों के Dr पंकज रंजन ने अपने Staff के साथ सेवाएं प्रदान कीं.
इस मौके पर AIUTC के सेक्रेटरी जनरल और सफदरजंग यूनानी के सेवानिवृत HOD डॉ सईद अहमद खान , Prof SM आसिफ ज़ैदी, Prof मुहम्मद इदरीस, डॉ इल्यास मज़हर हुसैन , डॉ हबीबुल्लाह, डॉ मिर्ज़ा असद बेग ,डॉ अल्ताफ अहमद ,डॉ तय्यबा राज़िक़,डॉ अज़ीज़ बक़ाई , डॉ खुर्शीद आलम , हकीम हाफिज मुर्तज़ा देहलवी के अलावा कई और बड़े Drs ने अपनी ऐज़ाज़ी ख़िदमात पेश कीं .
सैकड़ों मरीज़ों ने इस सहूलत का भरपूर फायदा उठाया और मरीज़ों को मुख़्तलिफ़ रोगों के लिए फ़्री medical consultancies के साथ फ़्री दवाएं भी तक़सीम की गईं. इस मौके पर प्रोफ इदरीस ने अपने भाषण में कहा कि AIUTC देश की वाहिद ऐसी संस्था है जिसने झुग्गी झोंपड़ी से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक यूनानी के क्षेत्र में अपनी सेवायें पहुँचाने का काम किया है. उन्होंने कहा तिब्बे यूनानी देश के हर ख़ास और आम नागरिक के लिए उपलब्ध है और फायेदमंद भी.
इस मौके पर Prof SM आरिफ ने कहा ,मरीज़ दुसरे चिकित्सा के उपचार से थक कर और परेशान होकर अब यूनानी कि तरफ तेज़ी से आरहे हैं. यह यूनानी के साथ देश के लिए भी ख़ुशी कि बात है कि अब देशवासी ऐसी चिकित्सा प्रणाली को चुन रहे हैं जिसका कोई Side effect नहीं. और यह हमारी सभ्यता को भी प्रोत्साहन देती है.
उन्होंने कहा हमें ख़ुशी है कि हम ऐसे मर्ज़ों में कामयाब इलाज कर पाए हैं जो ला इलाज बताये गए थे. डॉ एसएम आरिफ ने ज़ोर देकर कहा बस ज़रुरत इस बात की है यूनानी दवाएं बनाने वाली कंपनियां ईमानदारी से दवा कि क्वालिटी को यक़ीनी बना लें. असल कमज़ोरी किसी भी दवा के असर में उस वक़्त आजाती है जब कम्पनिया अपने मुनाफे के लिए Incrediants की मिक़्दार के साथ छेड़छाड़ करते हैं.
साकेत कोर्ट में आयोजित इस कैंप प्रबंधन की अध्यक्षा क़ाज़ी शेहजबीं ने यूनानी उपचार के फायदे साझा किये.इस कार्यक्रम के आयोजन में उनके सहयोगी अधिवक्ता राजपाल कसाना , नरेंद्र शर्मा,अनिल कुमार बसोया, हितेश बैसला,निर्देश बिधूड़ी,पूजा अरोरा,विक्रम सिंह बिधूड़ी,भरत आहूजा,अजय कुमार तंवर,यामिनी शर्मा,गरिमा सिंह,निखिल राणा,पुनीत वशिष्ट ने कैंप को सफ़ल बनाने में अपना योगदा दिया.
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती फ़र्रुख़ नाज़ Social Entrepreneur and Philantrophist ,इंडिया इस्लामिक कल्चर सेंटर की Board of Trustee, ने शिरकत की और AIUTC के कामों की सराहना की.
AIUTC के सेक्रेटरी जनरल और मिशन के रूहे रवां डॉ सय्यद अहमद खान ने कैंप के आयोजन के बाद टाइम्स ऑफ़ पीडिया एडिटर को टेलीफोन पर बताया कि वो अपने प्यारे वतन को हक़ीक़त में नौजवान भारत के रूप में देखना चाहते हैं. इसके लिए वो तमाम देश वासियों तक यूनानी के माध्यम से अपनी सेवाएं पहुँचाने का संकल्प रखते हैं.
डॉ सय्यद ने कहा अगर भारत सरकार यूनानी के प्रोत्साहन में मज़ीद सहयोग करती है तो हम यंग इंडिया के सपने को साकार करने में सक्षम होंगे. साथ ही उन्होंने यूनानी दवाएं बनाने वाली कंपनियों से अपने फ़र्ज़ के प्रति वफादार रेहनो को कहा, और सभी यूनानी दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी तरह के Cmpromise से बाज़ रहने का आव्हान किया.
अब्दुल बासित ने इस मौके पर तमाम लोगों और ख़ास तौर से मेहमान खुसूसी फ़र्रुख़ नाज़ और Dr,s का शुक्रिया अदा किया.साकेत कोर्ट के वकीलों ने AIUTC और इस प्रोग्राम के अध्यक्षा, अधिवक्ता और समाज सेवी शेहजबीं क़ाज़ी का इस कार्यक्रम को साकेत कोर्ट के प्रांगड़ में आयोजित करने के लिए आभार व्यक्त किया.