रोज सुबह बजने वाला ‘भोंपू’ तो अंदर गया, सीएम शिंदे का संजय राउत पर हमला.

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शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने तंज कसा है। एकनाथ शिंदे ने कहा है कि अब रोज सुबह आठ बजने वाला भोंपू तो अंदर चला गया। अब सुबह-सुबह भोंपू सुनने को नहीं मिलेगा।

उन्होंने कहा कि ईडी अपना काम कर रही है। अगर आप ईमानदार हैं तो आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। शिंदे ने कहा कि जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा। इस बीच महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुंबई में आरएसएस कार्यालय में मुलाकात की।

सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि हम आरएसएस प्रमुख से मिले। हम उनसे पहले भी मिल चुके हैं, हमारी सरकार हिंदुत्व की विचारधारा पर बनी है और हमने उसी के लिए उनका आशीर्वाद लिया। हम बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को आगे बढ़ा रहे हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में छह घंटे से अधिक समय तक पूछताछ के बाद रविवार देर रात शिवसेना नेता संजय राउत को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, राउत ने दावा किया कि वह निर्दोष हैं और उन्हें फंसाया जा रहा है। वहीं मेडिकल के बाद आज उन्हें PMLA अदालत में पेश किया जाएगा।

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि मेरे खिलाफ झूठी कार्रवाई, झूठे सबूत लोगों को मार-पीटकर बनाए जा रहे हैं। ये सिर्फ महाराष्ट्र और शिवसेना को कमजोर करने के लिए है लेकिन महाराष्ट्र और शिवसेना कमजोर नहीं होगी। संजय राउत झुकेगा नहीं और पार्टी भी नहीं छोड़ेगा।वहीं ईडी द्वारा गिरफ्तार संजय राउत के घर मिले 11.50 लाख रुपये को लेकर उनके भाई सुनील रावत ने बड़ा दावा किया है। सुनील ने कहा कि ये राशि शिवसैनिकों के अयोध्या दौरे के लिए रखी गई थी।

नोटों के बंडल पर एकनाथ शिंदे भी लिखा था। मुंबई के पात्रा चॉल जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने कल 16 घंटे की पूछताछ के बाद राउत को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें आज कोर्ट में पेश कर प्रवर्तन निदेशालय रिमांड मांग सकता है। इस बीच इस घोटाले, उनसे पूछताछ, गवाह को धमकी, उनकी हिरासत को लेकर कई खबरें मीडिया में छा रही हैं। मुंबई पश्चिमी उपगनर के गोरेगांव स्थित सिद्धार्थ नगर के पात्रा चॉल के 47 एकड़ जमीन पर 672 परिवारों के घरों के पुनर्विकास के लिए साल 2007 में सोसायटी द्वारा महाराष्ट्र हाउसिंग डेवलपमेंड अथॉरिटी (म्हाडा) और गुरू कंस्ट्रक्शन कंपनी के बीच करार हुआ था। इस करार के तहत कंपनी को साढ़े तीन हजार से ज्यादा फ्लैट बनाकर म्हाडा को देने थे। उसके बाद बची हुई जमीन प्राइवेट डेवलपर्स को बेचनी थी।

डीएचआईएल के राकेश वधावन, सारंग वधावन, प्रवीण राउत और गुरू आशीष इस कंपनी के निदेशक थे। आरोप है कि कंपनी ने म्हाडा को गुमराह कर पात्रा चॉल की एफएसआई 9 अलग-अलग बिल्डरों को बेच कर 901 करोड़ रुपये जमा किए। उसके बाद मिडोज नामक एक नया प्रोजेक्ट शुरू कर फ्लैट बुकिंग के नाम पर 138 करोड़ रुपये वसूले गए। लेकिन 672 लोगों को उनका मकान नहीं दिया गया। इस तरह पात्रा चॉल घोटाले में 1039.79 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। उसके बाद 2018 में म्हाडा ने गुरू कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया।

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