क़ैदियों की राजनीती ख़त्म? जानिए बिल की असली मंशा

Date:

विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ भाजपा केंद्र की एजेंसियों का दुरुपयोग कर गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों को फँसाने, उन्हें जेल भेजने और राज्य सरकारों को अस्थिर करने की साज़िश रच रही है।

आइये समझते हैं पूरा मामला क्या है ? सर्कार और विपक्ष का इस बिल पर क्या मानना है

जेल गए पीएम-सीएम को पद से हटाने वाला बिल पेश

लोकसभा कल उस समय गूंज उठी जब गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पेश किया। इसमें प्रावधान है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री पाँच साल या उससे अधिक सजा वाले अपराध में 30 दिन से ज्यादा जेल में रहते हैं, तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा।

विपक्ष का हमला
विपक्ष ने इस विधेयक को “काला कानून” और “असंवैधानिक” करार देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता का दुरुपयोग कर गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों और नेताओं को पहले फँसाना, और फिर उन्हें जेल भेजकर राज्य सरकारों को अस्थिर करना चाहती है। जबकि सरकार का तर्क है कि राजनीति में गिरते नैतिक मूल्यों को रोकने और जनप्रतिनिधियों की साख बनाए रखने के लिए यह कदम ज़रूरी है।

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक

कानून का प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन बिल, संविधान की धारा 75, 164 और 239AA में बदलाव करेगा। इसके अनुसार किसी मंत्री को केवल आरोप और गिरफ्तारी के आधार पर पद से हटाया जा सकेगा, भले ही दोष सिद्ध न हुआ हो। हालांकि, रिहाई के बाद उन्हें फिर से पद पर नियुक्त किया जा सकेगा ।

विपक्षी आपत्तियाँ
कांग्रेस, तृणमूल, शिवसेना (UBT) और AIMIM ने इसे लोकतंत्र खत्म करने और देश को “पुलिस स्टेट” की ओर धकेलने वाला कदम बताया। प्रियंका गांधी ने कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी कदम बताकर सरकार जनता की आँखों पर पर्दा डालना चाहती है।

सदन में संख्या का गणित
संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए। लोकसभा में 361 और राज्यसभा में 160 मतों की दरकार है। NDA के पास पर्याप्त संख्या नहीं है, इसलिए कांग्रेस या बड़े विपक्षी दल का समर्थन जरूरी है—जो फिलहाल असंभव दिख रहा है। यही कारण है कि बिल को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया है।

राजनीतिक खेल
सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकार को पता है कि यह बिल पास नहीं होगा, तब इसे पेश क्यों किया गया? जानकारों का कहना है कि यह असली कानून बनाने से ज्यादा धारणा की लड़ाई  है। भाजपा चाहती है कि विपक्ष इसके खिलाफ खड़ा होकर भ्रष्टाचारियों के पक्षधर के रूप में दिखे।

सरकार का मकसद
असल में बिल की मंशा के पीछे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दीगर ग़ैर भाजपाई मंत्रियों तथा मुख्यमंत्रियों की साख को ट्रिगर करना है .आपको याद ही होगा पिछले साल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इस्तीफा नहीं दिया और जेल से सर्कार चलाई थी । सरकार का कहना है कि अगर विपक्ष इस बिल का विरोध करता है तो यह माना जाएगा कि विपक्ष जेल से मंत्रालय चलाने का समर्थन करता हैऔर भ्रष्ट नेताओं का समर्थन करता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

Judaism, Zionism, and the Politics of Perception

Beyond the Narrative: Judaism, Zionism, and the Politics of...

Israeli strike damages Qatar-based Al Araby TV office in Tehran

A US–Israel strike hit a building housing the Al...

Donald Trump के ख़िलाफ़ US में भड़क उठे प्रदर्शन

Edited by Maroof Raza अमेरिका के कई बड़े शहरों में...

اسلام آباد میں مسلم ملکوں کے وزرائے خارجہ کا مشاورتی اجلاس

پاکستان کی میزبانی میں سعودی عرب، مصر اور ترکیہ...