
बॉलिवुड के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह हमेशा अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं।
पैगंबर मोहम्मद पर भाजपा नेताओं की टिप्पणी पर विवाद कम होता नहीं दिख रहा है। इस टिप्पणी की अब तक कई खाड़ी देश निंदा कर चुके हैं। देश के कई विपक्षी नेता इस मामले को लेकर भाजपा पर हमलावर नजर आ रहे हैं। इस बीच अब बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह की प्रतिक्रिया सामने आई है।
उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि इस मामले में देर से कार्रवाई की गई। विवादित टिप्पणी की निंदा करने में पार्टी को एक हफ्ते का समय लग गया।मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए एक्टर ने कहा कि नुपुर शर्मा, फ्रिंज एलिमेंट नहीं बल्कि भाजपा की प्रवक्ता थीं। एक्टर ने कहा कि इस तरह के बयान पाकिस्तान, बांग्लादेश में दिए जाते हैं।
उन्होंने आगे कहा, ‘नुपुर शर्मा ने कहा कि हिंदू देवी देवताओं पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी की वजह से वह यह बात कह गईं, मुझे कोई ऐसा वीडियो या रिकॉर्डिंग दिखा दें जिसमें इस तरह की बात कही गई हो।’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अगर समाज में फैल रही नफरत को रोकना चाहते हैं तो उन्हें आगे आना चाहिएबातचीत के दौरान उन्होंने इस पूरे विवाद के लिए न्यूज चैनल और सोशल मीडिया को जिम्मेदार माना।
इस मुद्दे पर बात करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने उम्मीद जताई कि एक दिन लोगों में अच्छी समझ कायम होगी और मुसलमानों के खिलाफ ‘घृणा की लहर’ नष्ट हो जाएगी। कई बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके शाह ने एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने और ‘इस जहर को फैलने से रोकने का’ आग्रह किया।इस मुद्दे पर बात करते हुए नसीर ने कहा, ‘मैं उनसे (प्रधानमंत्री से) अनुरोध करूंगा कि वे इन लोगों को थोड़ी अच्छी समझ दें। ऋषिकेश में धर्म संसद में जो कहा गया, यदि वह उसमें भरोसा करते हैं, तो उन्हें ऐसा कहना चाहिए। यदि वह इसमें भरोसा नहीं करते, तो भी उन्हें यह बात कहनी चाहिए।
जॉर्ज ऑरवेल ने अपने उपन्यास 1984 में दोहरी सोच को ‘एक दिमाग में दो परस्पर विरोधाभासी विचार बनाए रखने और दोनों पर एक साथ विश्वास करने’ के रूप में परिभाषित किया है। शाह ने कहा कि नुपुर कोई ‘हाशिए का तत्व’ नहीं हैं, जैसा कि बीजेपी ने दावा किया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि समझदार हिंदू, मुस्लिम समुदाय के खिलाफ घृणा के विरुद्ध बोलें। उन्होंने कहा कि वह ‘घृणा का प्रचार’ के लिए टीवी समाचार चैनलों और सोशल मीडिया को पूरी तरह जिम्मेदार मानते हैं।नसीर ने वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के मौजूदा मामले का स्पष्ट जिक्र करते हुए कहा, ‘यह पैदा की गई घृणा है। यह एक तरह का जहर है जो तब उगलना शुरू हो जाता है, जब आपका सामना किसी विपरीत सोच वाले व्यक्ति से होता है।… मैं सोचता हूं कि वह समय कितनी दूर है, जब हर गिरजाघर के नीचे शिवलिंग खोजने शुरू कर दिए जाएंगे?
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