दुनिया रफ्ता रफ्ता विकास और विकास शीलता के नाम पर विनाश की ओर बढ़ रही है ,विकास के बाद शान्ति का इमकान होना चाहिए लेकिन जितने भी विकासशील देश हैं वहां से अशांति व हथ्यारों की खरीद ो फरोख्त की आवाज़ें सुनाई देती हैं ।दुनिया के सभी देश मिसाइल और हथ्यारो के नए नए प्रयोग कररहे हैं ।हथयारों के बड़े खरीदारों और बेचने वालों को विकसित देश माना जा रहा है जबकि हथयारों का अंत विनाश है ।कैसी विडम्बना है,इजराइल और अमेरिका दुनिया के बड़े देश हैं जो दुनिया को हथ्यार बेचने का काम करते हैं ,हालांकि नार्थ कोरिया ने अमेरिका पर तंज़ कस्ते हुए उसकी सालगृह पर कोरियाई मिसाइल गिफ्ट करने की बात कही है जिसको अमेरिका और नार्थ कोरिया के बीच जंग के आसार भी कहा जारहा है।

इजराइल और अमेरिका दोनों देशों का मुख्य कारोबार हथ्यार पर आधारित है , और हथ्यार अम्न के माहौल में नहीं जंग के माहौल में ही प्रयोग किये जाते हैं ,जिस तरह दवा बनाने वाली कम्पनियांम बीमारियों का इंतज़ार करती हैं बल्कि बीमारियां फैलाती हैं इसी तरह हथयारों की कंपनियां जंगों का इंतज़ार करती हैं या जंग का माहौल बनाती हैं ।


दुनिया वैचारिक आधारों पर पांच हिस्सों में बंटने जा रही है और किसी हद तक बट भी गयी है ,इस्लामिक दुनिया , यहूदी दुनिया , ईसाई दुनिया , बौद्ध,और कम्मुनिस्ट दुनिया ।फ़िलहाल बौद्ध इस्लाम से रिश्ते बनाये हुए है हालांकि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानो के क़त्ल इ आम को इससे अलग रखकर देखा जारहा है और इसको वयवसायिक जंग के रूप में देखा जारहा है या शहरी अधिकारों के बटवारे की जंग भी कहा जारहा है ।दुसरे यहूद और मुशरिक दुनिया (मूर्ती पूजक ) और आतिश परस्त (आग के पुजारी) आपस में ताल मेल बनाये हुए हैं , ईसाईयों के साथ फिलहाल यहूदी हैं क्योंकि उनके छोटे दुश्मन मुस्लिम वर्ल्ड से उनको निमटना है,मगर वास्तव में यहूद और ईसाई आपस में बड़े दुश्मन हैं जिसके तारीखी दस्तावेज़ मौजूद हैं ।कम्युनिस्ट वर्ल्ड फिलहाल कमज़ोर है वैचारिक रूप से हालांकि चीन में बौद्ध के अनुयायी जनता ज़्यादा मौजूद हैं ,मगर सत्ता पर क़ाबिज़ कम्युनिस्ट लॉबी है ।विश्व भर में एक बात कॉमन पाई जा रही है सत्ता में बैठे लोगों के वहाँ की जनता खिलाफ होरही है फिलहाल यह बात मुस्लिम वर्ल्ड में ज़्यादा पाई जा रही है और रफ्ता रफ्ता दुनिया में देखने को मिल रही है ।
