Lok Sabha Election 2024 :बरेली में BJP की अंदरूनी कलह ! छत्रपाल गंगावार की चेतावनी, बोले ऐसा चलता रहा तो ‘मैं टिकट वापस कर दूंगा’
Lok Sabha Election 2024: बीजेपी ने इस बार बरेली सीट से आठ बार के सांसद रहे संतोष गंगवार का टिकट काटकर उनकी जगह छत्रपाल गंगवार को टिकट दिया है, जिसे लेकर कार्यकर्ता नाराज है.
बीजेपी की प्रत्याशी बदलने की इस नीति की पीछे पार्टी विचारकों का क्या नज़रिया है यह तो वही बताएँगे किन्तु फिलहाल जिन जीते हुए Candidates के टिकट कटे हैं उनका ग़ुस्सा खुलकर सामने आने लगा है .इसकी एक बानगी उत्तर प्रदेश के बरेली में देखने को मिली .
Bareilly Lok Sabha Seat: लोकसभा चुनाव के बीच उत्तर प्रदेश की बरेली सीट पर बीजेपी के अंदर ज़बरदस्त कलह देखने को मिल रही है. बीजेपी ने इस सीट से छत्रपाल गंगवार को टिकट दिया है लेकिन इस बात को लेकर पार्टी संगठन में भयानक नाराज़गी है.
हाल यह है कि संगठन हो या स्थानीय विधायक कोई भी उनके समर्थन में प्रचार करने को तैयार नहीं है. जिसके बाद छत्रपाल गंगवार ने टिकट वापस करने की चेतावनी तक दे डाली है.
आपको बता दें , बरेली में बीजेपी ने इस सीट से लगातार 8 बार के सांसद रहे संतोष गंगवार का टिकट काटकर उनकी जगह छात्रसंघ से जुड़े छत्रपाल गंगवार को टिकट दिया है. जिसे लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष है .
बात यहाँ तक पहुँची है कि संगठन से जुड़े कार्यकर्ता, स्थानीय विधायक और सांसद भी उनके साथ चुनाव प्रचार नहीं करा रहे हैं. पार्टी नेताओं के इस रुख पर एक बैठक में छत्रपाल गंगवार ने खुलकर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है.
छत्रपाल गंगवार ने संगठन नेताओं से नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए चेतावनी दी कि कोई भी मुझे चुनाव लड़वाने में मदद नहीं कर रहा है, यही रहा तो मैं अपना टिकट वापस कर दूंगा.
सूत्रों की मानें तो बरेली के लिए अगले 72 घंटे बहुत खास हैं. जानकारी के मुताबिक पार्टी कार्यकर्ताओं में छत्रपाल गंगवार को लेकर हो रहे विरोध को देखते हुए उनका टिकट कट सकता है.
छत्रपाल का अगर टिकट कटता है तो उनकी जगह मेयर उमेश गौतम को टिकट मिल सकता है. उमेश गौतम भी काफी समय से इसके लिए अपना पत्ता फिट करने में जुटे हैं. उन्होंने टिकट के लिए आवेदन भी किया है.
बीजेपी ने इस बार 8 बार के सांसद संतोष गंगवार का टिकट काटकर छत्रपाल गंगवार को टिकट दिया है. बरेली लोकसभा में 23 लाख मतदाता है जिसमें करीब साढ़े 3 लाख कुर्मी मतदाता हैं, जबकि 35 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं.
वैसे, संतोष गंगवार की उम्मीदवारी इस बार के चुनाव में शुरू से ही सवालों में थी। सबसे बड़ी बाधा उनकी उम्र 75 वर्ष होना थी। केंद्र में मंत्री पद जाने के बाद टिकट कटने की आशंका और मजबूत हो गई थी। हालांकि उनके समर्थकों ने मजबूत दावेदारी कर रखी थी।
उम्र के अलावा उनका कोई विरोध भी क्षेत्र से नहीं था। यही कारण रहा कि प्रदेश की कई सीटों पर उम्मीदवारों के बावजूद बरेली का टिकट देर से घोषित हुआ। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक यहां के टिकट को लेकर मंथन चला।
ऐसे में जातिगत समीकरण साधते हुए पार्टी ने पूर्व मंत्री छत्रपाल गंगवार को प्रत्याशी बनाया. लेकिन जिस दिन से उन्हें प्रत्याशी बनाया गया है उसी दिन से उनका जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है.
देखना यह है कि भाजपा की इस अंतः कलह के चलते समाजवादी पार्टी कितना लाभ उठा सकती है . और मुस्लिम वोट को संजोने में कितनी कामयाब हो पाती है .
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