लॉक डाउन में वो हो रहा जो सामान्य हालात में मुमकिन न था

Date:

कुंवर दानिश अली

जन विरोधी सरकार की मंशा को हम सफल नहीं होने देंगे

आप और हम जब लॉकडाउन में घरों में बैठे हैं ऐसे माहौल में केंद्र सरकार द्वारा विद्युत अधिनियम बिल जो 2003 में पारित हुआ था उसमें संशोधन लाया जा रहा है। सरकार को ऐसा करने की कोई ज़रुरत नहीं थी देश में पूर्ण मात्रा में बिजली उत्पादन हो रहा है लेकिन सरकार अपने पूंजीपति दोस्तों को फ़ायदा पहुँचाना चाहती है इसलिए सरकार निजीकरण के लिए रास्ता प्रसस्त कर रही है। हर मोर्चे पर विफल केंद्र सरकार प्राइवेट पार्टियों के दबाव में ऐसा क़दम उठा रही है।

2014 और 2018 में भी सरकार इस बिल के संसोधन की कोशिश में नाकाम हो चुकी है और इस बार भी हमारी कोशिश होगी की सरकार ऐसा करने में सफल न हो सके। क्यूंकि इस संसोधन से क्रॉस सब्सिडी ख़त्म हो जाएगी और बिजली का बिल बहुत ज़्यादा बढ़ जायेगा। अभी जो डायरेक्ट ट्रांसफर की व्यवस्था है वो ही उचित है अगर किसानों को विद्युत पर दी जाने वाली सब्सिडी जारी नहीं रखी गई तो किसानों के समक्ष फसलों की सिंचाई को लेकर संकट खड़ा हो जाएगा।

इससे खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होगा जिस से देश के समक्ष भी संकट पैदा होगा, जो इस पूंजीपतियों की हितेषी सरकार को दिखाई नहीं दे रहा है। किसानों और मजदूरों की मेहनत का सम्मान किया जाना चाहिए। किसानों ने अपनी मेहनत से देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है। समाज के गरीब वर्ग के लोगों और किसानों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के लिए उन्हें छूट जरूरी है।


इस के साथ-साथ में नियामक आयोग का कार्य बहुत सीमित हो जायेगा और पूरा नियंतरण केंद्र सरकार के हाथ में चला जाएगा और शिकायतों के ऊपर भी कार्यवाही नाममात्र की ही रह जाएगी। सरकार को जहाँ गरीब क्षेत्रों में सस्ती बिजली सप्लाई करनी होती है वहां बिजली कटौती शुरू हो जाएगी। इस बिल का मक़सद यही है कि जो सार्वजनिक संपत्ति है उसका निजीकरण पूरी तरह से कर दिया जाए।

जो बिजली का पूरा सेवा क्षेत्र है इसको कमोडिटी में बदलने की पूरी कोशिश सरकार कर रही है यह बिल पूरे तरीके से जन विरोधी है हम सरकार की मंशा को सफल नहीं होने देंगे। यह संशोधन बिल वातानुकूलित कमरों में बैठ कर तैयार करने वाले उच्च वर्ग के लोगों और सलाहकारों के अनुकूल हो सकता है लेकिन यह जमीनी सच्चाई से बिलकुल परे है।

यह प्रावधान राज्य सरकार की शक्तियों पर स्पष्ट अतिक्रमण है। नए निकाय के गठन का कोई औचित्य नहीं है। टैरिफ नीति से संबंधित प्रस्ताव वास्तव में राज्य विद्युत नियामक आयोग को दंत विहीन बनाने वाला साथ ही यह संघीय ढांचा, जो राज्यों की जनसांख्यिकीय और आर्थिक विविधता का सम्मान करता है उसके लिए यह हानिकारक है।

जैसा कि इस सरकार का रवैया और नीति रही है यह संशोधन विधेयक भी पूंजीवाद को बढ़ावा देने वाला और निजी कम्पनियों को इलेट्रिसिटी बोर्ड पर कब्जा दिलाने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन पूरे देश में किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए केंद्रीकृत विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (ईसीईए) का गठन औचित्यहीन है। मैं सरकार के इस देश और किसान विरोधी क़दम का विरोध करता हूँ।

लेखक वर्तमान में अमरोहा लोक सभा क्षेत्र से सांसद हैं ,विचारक और सोशल रिफॉर्मर भी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

ईरान पर हमलाः साम्राज्यवाद ने एक बार फिर अपने पंजे निकाले

 राम पुनियानी ईरान पर इजराइल और संयुक्त राज्य अमरीका का...

PM राहत योजना का लाभ आप भी उठायें!

इंट्रो:देश में हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं का...

आंगनबाड़ी से 10 हजार रुपये मांगने का आरोप, सीडीओ पर कार्रवाई

edited: Mukesh Yadav उत्तर प्रदेश के Etah से जुड़ा एक...

Trump says war Will End Soon

Edited by: Maroof Raza Iran War Updates: Trump Predicts Conflict...