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क्या माल्टा से लौट आये चुनाव आयुक्त (retd.)?

क्या माल्टा से लौट आये चुनाव आयुक्त (retd.)?

Ali Aadil Khan Editor’s Desk

अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़

गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही

क्या माल्टा से लौट आये चुनाव आयुक्त (retd.)? शिव सेना नेता और दिग्विजय सिंह का बड़ा खुलासा

पूर्व चुनाव आयुक्त यानी election commisioner देश छोड़कर भाग गए हैं . किशोर तिवारी, नेता शिव सेना (उद्धव) का कहना है की उनके दोस्त ने बताया कि राजीव कुमार माल्टा में घुमते हुए पाए गए . यह खुलासा उन्होंने The Public India डिजिटल Channel पर उन्होंने किया . इसके बाद उनका यह बयान  viral हो गया . लेकिन Main stream Media में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि वो देश में ही हैं .

ऐसे में जब राजीव कुमार 2024 में हुए चुनावों में संदेह और धान्द्ली की चर्चा के चक्रव्यूह में जनता को छोड़ गए हैं ,और जगदीप धनकड़ राज्य सभा Chairperson की कुर्सी छोड़ गए हैं तो देश की चिंता और मीडिया में चर्चा तो होना लाज़मी है .

विपक्ष द्वारा पूर्व चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के Retired होने के बाद उनपर कई तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं.लेकिन उनको फिलहाल किसी आलोचना या आरोप से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला.

अलबत्ता यह ज़रूर है जब सत्ता बदलेगी तो जिन अधिकारीयों ने भी वोट चोरी कराई है उन सबके खिलाफ कार्रवाइयां हो सकती है, जैसा की राहुल गाँधी बार बार चेतावनी देते नज़र आ रहे हैं.बिहार वोट अधिकार यात्रा में इस बात का ज़िक्र बार बार आ रहा है .

इसलिए देश छोड़ना फ़िलहाल उन सभी भ्रष्टाचारियों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है जिनको सत्ता परिवर्तन की आशंका हो चली है. हालांकि देश छोड़कर जाने वालों में वो लोग भी शामिल हैं जो यहाँ के सिस्टम से खुश नहीं हैं या जो यहाँ के सामाजिक माहौल से डरे हुए हैं या खुद को unsafe महसूस कर रहे हैं.

हालांकि आज सवाल यह होना चाहिए था कि वर्तमान चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार free एंड fair चुनाव करने के लिए क्या दिशा तैयार कर रहे हैं ? देश के लोकतंत्र और आयोग की छवि को बचाने और चुनाव  को निष्पक्ष बनाने की क्या योजना है ज्ञानेश्वर कुमार की ?

लेकिन चुनाव आयुक्त की प्रेस कांफ्रेंस के बाद खुद उनकी साख खतरे में आ गई है. विपक्ष और ख़ास तौर से कांग्रेस उनकी प्रेस वार्ता पर दर्जनों सवाल दाग़ रही है. चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बीजेपी का प्रवक्ता और सदस्य बता रही है, जैसा उनके हाव भाव और जुमलों के चयन से ज़ाहिर भी हो रहा था.

अगर यह सही है तो फिर इनके आने के बाद फ्री और Fair चुनाव की उम्मीद कैसे की जा सकती है .यानी अब यह मान लिया जाए कि अगर ज्ञानेश कुमार CEC बने रहते हैं तो चुनाव फिर बीजेपी को ही जिताये जायेंगे .

शायद इसी लिए पूरा विपक्ष इस बात की तैयारी में है कि महाभियोग (impeachment) लाया जाए और इनको पद से हटाया जाए. देश में वोट चोर # चल रहा है, प्रधानमंत्री की बनारस सीट सवालों के घेरे में है , मोदी सरकार पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं .

ऐसे में स्वाभाविक है जो भी अपने आकाओं के चरणचुम्बक बने हुए थे या हैं उनको जेल जाने या Corruptions के आरोपों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा . हालांकि यह भी सही है कि सरकार और सत्तापक्ष में 100 % भक्ति या चरणचुम्बन नेता नहीं हैं. 

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असल में सियासत के कई रंग होते हैं , कभी खामोश रहकर वो नचाती है कभी मुखर होकर रुलाती है. मगर लोकतंत्र में जनता…… नेताओं और पार्टियों को ऊँगली पर नचा सकती है , और यह शक्ति संविधान ने देश के नागरिक को दिया है . लेकिन जिस ऊँगली पर नचाना था , सत्तापक्ष ने जनता की उसी ऊँगली को भुखमरी , बेरोज़गारी , अज्ञानता, क्षणिक लालच और नफरत के हथोड़े से कुचल दिया है.लेकिन वक़्त बदलेगा और वक़्त बना ही बदलने के लिये है .

 

ये कह रही है इशारों में गर्दिश-ए-गर्दूं

कि जल्द हम कोई नया इंक़लाब देखेंगे

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दूसरी तरफ सत्तापक्ष के पास मुद्दों की पिटारी में इतने रंग के ज़हरीले सांप हैं कि उनसे लड़ने के लिए सियासी नेवलों की कमी पड़ सकती है .और सबसे ज़हरीला अज़्दहा सत्तापक्ष के पास  साम्प्रदायिकता और धार्मिक नफ़रत का है. इसका ज़हर समाज में बहुत तेज़ी से फैलता है,और मदारी बड़े आराम से धुर्वीकरण करके कई दशक सत्ता भोग लेता है .

1980 के बाद से साम्प्रदायिकता का सांप ही तो है जो देश को डस रहा है . जैसे ही कोई मुद्दा सरकार के खिलाफ गर्माता है , मदारी तुरंत दूसरा मुद्दा उसकेमुक़ाबले में लेकर प्रकट हो जाता है. और आजकी सत्ताधारी पार्टी के पास Social Media से लेकर सड़कों तक लड़ने के लिए अलग अलग सेनाएं हैं.

अब चाहे वो troll Sena हो या कोई और सेना जिनको आप जानते हैं. मगर देश की रक्षा के लिए समर्पित असल सेना फिलहाल इस खेल से दूर है.जबकि राज्यों की पुलिस धार्मिक और जातीय द्वेष से नहीं बच सकी है .

हालांकि कर्नल पुरोहित जैसे देशद्रोही मानसिकता के सैनिक अधिकारी वहां sleeper Cell के रूप में छुपे हुए पाए गए हैं. लेकिन उनकी संख्या भी बहुत कम है  ,,,,,,मगर चिंता उस वक़्त बढ़ गयी जब हालिया दिनों में भारतीय सेना और DRDO जैसे संवेदनशील विभागों में ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारीयों के बारे में समाचार मिला की वो पाकिस्तानी ख़ुफ़िया Agency ISI को भारत की अत्यंत संवेदनशील जानकारियां देते हुए पकडे गए …कुछ नाम मिसाल के तौर पर आपके सामने रख रहे हैं .जैसे  

डीआरडोओ में बतौर वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर ,मुजफ्फरपुर कटरा रजिस्ट्री कार्यालय के क्लर्क रवि चौरसिया , काफ़ी चर्चित नाम ज्योति मल्होत्रा, देवेंद्र सिंह ,भारतीय वायुसेना के देवेंद्र शर्मा , सैन्य कर्मी शांतिमय राणा जो जयपुर अर्टलरी यूनिट में तैनात था इसके अलावा भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह इत्यादि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI को जानकारी देते हुए पकडे गए.

आपकी जानकारी के लिए बता दें की सेना से जुड़े किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर सक्रिय होने के लिए सेना में ही एक सख्त क़ानून है. इसके तहत सैनिकों को अपनी पहचान, पद, तैनाती और अन्य पेशेवर विवरण साझा करने पर पाबंदी है.

यहाँ तक के उन्हें वर्दी में अपनी तस्वीर भी लगाने पर पाबंदी है.इसके बावजूद ये अपराधी Social media पर एक्टिव थे , और ISI Agents के संपर्क में रहते थे.यह सब जानकारी आजतक की website पर अभी भी उपलब्ध है .

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यही जम्हूरियत का नक़्स है जो सत्ता पर

कभी मक्कार बैठे हैं कभी ग़द्दार बैठे हैं

कांग्रेस नेता व् मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने वहां assembly चुनाव से पहले एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा था  कि मध्यप्रदेश में अगर हमारी सरकार बनती है, तो बीजेपी और बजरंग दल से जुड़े उन लोगों के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज किया जाएगा, जिन्होंने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के लिए जासूसी का काम किया है.

दिग्विजय सिंह ने अपने X account पर लिखा था कि , “बजरंग दल व भाजपा के आईटी सेल के पदाधिकारी द्वारा ISI से पैसे लेकर पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हुए मप्र पुलिस ने पकड़ा है”।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में अगर हमारी सरकार बनती है, तो बीजेपी और बजरंग दल से जुड़े उन लोगों के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज किया जाएगा, जिन्होंने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के लिए जासूसी का काम किया.

इसके अलावा भी अगर आप देखें तो देश में बढ़ती अराजकता , आतंकी घटनाएं ,सामाजिक असुरक्षा , धार्मिक नफ़रत , जातिवाद , लूट , नारी अपमान जैसे कृत्य आप आये दिन सुनते ही रहते हैं . 

कुल मिलाकर देश को हर तरफ से कमज़ोर बनाने की साज़िश रची जा रही है .देश को सम्प्रदाय , वर्ग , धर्मों और जातियों के आधार पर बांटा जा रहा है . ख़ास धर्म के ख़िलाफ़ उसको नंबर 2 का नागरिक बनाने की लगातार मुहीम चलाई जा रही है. देश को टुकड़ों में बांटने और खंडित करने की साज़िश चल रही है.

और || देश के खंडित होने या कमज़ोर होने से उनको क्या फ़र्क़ पड़ता है !!  जिनका देश की आज़ादी और क्रान्ति में कोई किरदार ही नहीं है. और उनको भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता जिनको देश में आरजकरा पैदा करने और साम्प्रदायिकता को बढ़ाने की पगार मिलती है.

फ़र्क़ तो उनको पड़ता है जिनके पूर्वजों का देश की आज़ादी के लिए खून बहा है , जिनके पूर्वजों को फांसी के फंदों पर लटकाया गया!! माल्टा की जेलों में रखा गया ,,, काला पानी की सज़ाएं दी गईं . या फिर फ़र्क़ उनको भी पड़ता है जिनके परिवार के लोगों का क़त्ल आज़ाद भारत में किया गया वो आज भी देश की तरक़्क़ी ,एकता और अखंडता के लिए अपना खून पसीना बहा रहे हैं और आज भी साम्राज्य्वादी और पूंजीवादी हुकूमत से लोहा ले रहे हैं.

  सुतून-ए-दार पे रखते चलो सरों के चराग़

जहाँ तलक ये सितम की सियाह रात चले            

अब आप बताएं की क्या देश में चल रही इन साज़िशों के ख़िलाफ़ हमें और आपको मिलकर बात नहीं करनी चाहिए ? क्या बैंक और वोट लूटने वालों को कड़ी सजा नहीं होनी चाहिए ?

अब देखिये हम लोग तो ,,, पूछता भारत , बिंदास बोल ,Black and White शो करने वालों के अंदाज़ में चीख चीखकर कर आपका BLOOD PRESSURE नहीं बढ़ाना चाहते. हम जानते हैं सहज और शालीन भाषा को जनता serious लेती है ?? और इस video को भी आप serious लेकर देश को जागरूक करेंगे ….इस पूरी video पर अपनी राये और Comment ज़रूर दें . अगली video में जल्द हाज़िर हूँगा  . अपना ख्यान  रखिये और मेज़बान अली आदिल खान को दीजिये इजाज़त  … मेरा भारत ज़िंदाबाद शुक्रिया

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