क्या किसानो का पल्ला भारी है ?

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Editor’s Desk

कितना दिलचस्प और विचित्र था वो नज़ारा जब देश में बढ़ती साम्प्रदायिकता के बीच एक स्टेज से हर हर महादेव और अल्लाहु अकबर के नारे लग रहे थे .

अल्लाहु अकबर और हर हर महादेव के २ पाटों के बीच पिसती साम्प्रदायिकता की राजनीति में एक तिलमिलाहट तो ज़रूर होगी जो बुझने वाली शमा की भड़कती लौ की तरह पूरा ज़ोर मारेगी लेकिन बुझ जायेगी , भड़कती आग की चिंगारियों से अपने दामन को बचाकर रखना देश की अवाम की ज़िम्मेदारी होगी . याद रहे आपस की एकता और सद्भाव ही हमारे देश के विकास का आधार है , देश ही नहीं पूरी दुनिया के लिए इत्तिहाद का पैग़ाम कामयाबी और तरक़्क़ी का ज़ामिन हैं . और देश के दुश्मन को पराजित करने का हथ्यार भी . किन्तु कुछ सियासी पार्टियां और उनमें भी एक ख़ास पार्टी अपने राजनितिक स्वार्थ और सत्ता के लिए देश में धार्मिक विभाजन कारी नीतियों को लगातार ज़िंदा कर रही है , और यह देश के दुश्मन की योजनाओं को ताक़तवर बना रही है , और यही चाहता है हमारा दुश्मन , कि देश धर्मों , जातियों , वर्गों , समुदायों और क्षेत्रों में बंटा रहे . इस विभाजन की तरफ देश तेज़ी से बढ़ रहा है .

मुज़फ्फर नगर में तारीख़ी किसान रैली में जम्मू , कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और तेलंगाना तक से लाखों किसान जुटे। 5 सितंबर की इस किसान रैली में खाने के 3000 लंगर और 2000 मोबाइल लंगर , 8000 निजी सुरक्षा कर्मियों के बीच देश भर के किसान अपनी जेब से खर्च करके इस महा रैली में पहुंचे ।किसी किसान को किराये पर नहीं बुलाया गया यह इस रैली की सबसे बड़ी सफलता और गुणवत्ता है .

2013 में एक राजनितिक पार्टी ने जिस ज़मीन में साम्प्रदायिकता का बीज बोकर नफरत की खेती तैयार की थी आज उसी ज़मीन में किसानों की महा पंचायत ने एकता और साम्प्रदायिक सद्भाव का बीज डाला है जो जल्द ही देश को अमन ओ शांति और विकास व् उन्नती का चमन तैयार करके देगा।

किन्तु देखना यह है कि ऐसे में जब आज भी अल्लाहु अकबर और हर हर महादेव के नारे एक मंच से से लग रह हों तो नफ़रत, और फूट डालो राज करो की राजनीति करने वाली सियासी पार्टियों का क्या होगा ,और ख़ास तौर से जिस पार्टी का आधार ही नफरत और साम्प्रदायिकता है तो वो बहुत जल्द अमन के आँगन में नफरत और साम्प्रदायिकता की चिंगारी डालकर दंगों या सामाजिक तथा धार्मिक बंटवारे की आग को भड़काने का काम करेगी , जो पहले से ही लगी हुई है । लेकिन ऐसे में सोचना देश की अवाम को ही होगा कि वो किस तरह इस नर्क से जल्द से जल्द बाहर आती है , या फिर कुछ पाखंडियों द्वारा नफरत और द्वेष की इस भट्टी में झुलस कर राख होजाती है ।

NDA सरकार में केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल ने अपने एक भाषण में बताया की अपनी पूजा में ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदुर्रसूलुल्लाह को ज़रूर शामिल करते हैं , वो कहते हैं की ये छोटा सा वाक्य या जुमला मेरे दिल में बैठ गया है , मैं इसको अपनी पूजा मैं ज़रूर शामिल करता हूँ , उन्होंने बताया कि वो जिस समाज में पैदा हुए वहाँ ऐसा माहौल था | और इसी पथ पर चलकर देश विकास शील बन सका ।अब देखना यह है जिस विचार धारा की पार्टी के साथ वो जुड़े हैं वहां तो यह एकदम rejected फार्मूला है जो एक आंख नहीं भाता .तो पीयूष जी को इससे कोई सरोकार नहीं की कौन किस विचार धारा की धारा में बहता है ,,,,, उनको और उन जैसों को तो बस काम अपना बनता भाड़ में जाए जनता वाले फॉर्मूले पर अमल करना ज़्यादा सूट करता है।लेकिन इसको पियूष गोयल की राजनितिक मजबूरी का नाम भी दिया जा सकता है .

खैर चलें आगे बढ़ते हैं और बताते हैं की ईमानदारी और सच जिस भी धंधे में हो वहां इज़्ज़त मिलती है इसकी ताज़ा मिसाल मुज़फ्फर नगर की ऐतिहासिक महा रैली में एक पत्रकार के साथ किसानों के वयवहार से मिलती है जहां कुछ बड़े चैनल्स के पत्रकारों को रैली मैदान से निकाला गया वहीँ कुछ सोशल मीडिया तथा मैं स्त्रैण के पुराने पत्रकारों को गले से लगाया गया . अजीत अंजुम जो एक अरसे से किसान आंदोलन को Cover कर रहे हैं जब वो मुज़फ्फर नगर किसानों की महा पंचायत Cover करने पहुंचे तो उनके बहते पसीनों को एक किसान से देखा नहीं गया और उस किसान ने अजीत के चेहरे से अपने रुमाल से पसीनों को साफ़ किया ये ऐसा मंज़र था जो इससे पहले कभी नहीं देखा गया था , भावुक कर देने वाला यह पल यादगार बना .
उसी रैली में बड़े न्यूज़ चैनल की पत्रकार चित्रा त्रिपाठी को रैली से बाहर खदेड़ा गया तो कुछ को Stage पर आदर से बैठाया गया .

करनाल में Mini सचिवालय के सामने किसानों का आंदोलन को सफल बताय जा रहा है किसान नेताओं का कहना है जो मांगे उनकी थी वो सभी हरयाणा सरकार ने मान ली हैं , इसके बाद किसानो ने अपने तम्बू भी वहां से हटा दिए हैं .हरयाणा सरकार के झुक जाने के बाद किसानों का Moral High है और अब उनका कहना है की हमारी आगे की रणनीति और आंदोलन के कार्यक्रम चलते रहेंगे फ़िलहाल करनाल Mini सचिवालय से हमारा आंदोलन हरयाणा के ग्रह मंत्री के साथ बाद चीत के बाद संपन्न होगया है . किसान मुद्दों पर विश्लेषण करने वाले विश्लेषकों का मानना है , किसान अपने मुद्दों को सरकार के बीच इसी प्रकार हल कराने में रूचि रखते हैं साथ ही केंद्र सरकार और BJP शासिर सरकारें भी जल्द ही किसानो के बीच मतभेद को समाप्त करने की योजना बना रही हैं , जो आगामी विधान सभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा है .

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