कलयुग में धार्मिक कार्यों से मिलता है पुण्य- दीपक नंदी- संभागीय आयुक्त
– श्रीकृष्ण का हर शब्द जीवन में धारण करने योग्य- मायापुर दास
– इस्लाम को समझना है, तो गीता का भी अध्यन करना चाहिए :डॉ. हनीफ़ ख़ान शास्त्री
– गीता की शिक्षओं को पाठ्यक्रम में करें शामिल: जी डी पटेल
कोटा,30 मई। संभागीय आयुक्त दीपक नंदी ने कहा है कि कलयुग में धार्मिक व सामाजिक कार्यों में व्यस्त रहने से पुण्य मिलता है। इसी से कलयुग की बुराईयों को कम किया जा सकता है। समाज में पुण्य कार्य करने वाले हमेशा सुखी रहते है। कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो परोपकार व धर्म के काम में लगा हो और बर्बाद हो गया हो।
दीपक नंदी सोमवार को कोटा ज्ञानद्वार एजुकेशन सोसायटी एवं गीता प्रचार अभियान जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गीता पर तीन दिवसीय सेमीनार के समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
इस्लाम का सच्चा अर्थ है, समर्पण और शांति। अर्थात ईश्वर द्वारा रचित नियमों के सामने स्वयं का समर्पण। गीता में भी समर्पण और शांतिमय जीवन जीने को ही सर्वोपरी कहा गया है। ऐसे में श्रीमद् भागवत गीता की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है।
श्री मद्भागवत गीता इस्लाम के कुछ बुनयादी उसूलों की ओर इशारा करती है , और कई ऐसे कर्तव्यों की याद दिलाती है जिनका हुकुम क़ुरआन देता है , हालांकि क़ुरआन एक ईश्वरीय और आसमानी किताब है … लेकिन फिर भी यदि इस्लाम को समझना है, तो उसके लिए गीता का भी अध्यन करना चाहिए :डॉ. हनीफ खान शास्त्री
गीता के दूसरे अध्याय के 59 से 62वें श्लोक में रोज़ा यानी व्रत रखने का तरीका बताया है। ऐसे ही आठवें अध्याय के पांचवें और आठवें श्लोक में नमाज (परमेश्वर को समर्पण) का तरीका भी बताया गया है। पर अफसोस कि देश के 95 फीसदी लोग इस बारे में जानते ही नहीं हैं।हनीफ शास्त्री कहते थे की दुनिया में मुस्लमान गीता के कई उपदेशों पर अमल करते हैं जबकि हिन्दू नहीं करते .
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इस अवसर पर मुख्य अतिथि इस्कोन मंदिर के मायापुर दास महाराज ने कहा कि गीता में भगवान श्री कृष्ण के द्वारा कहा गया हर शब्द जीवन में धारण करने योग्य है। श्रीकृष्ण को अनन्य भाव से याद करें तो कल्याण निश्चित है। गीता प्रचार अभियान जयुपर के संतोष कुमार ने गीता के प्रमुख अध्यायों की श्लोकवार व्याख्या करते हुए बताया कि मोक्ष को अंतिम लक्ष्य नहीं बताया गया है। कर्त्तव्य करने पर ही सभी को अपना अधिकार मिलता है। गीता में जो भगवान ने कहा वही धर्म है।
गीता मर्मज्ञ योगेंद्र शर्मा एवं सुधीर यादव ने भी गीता के विभिन्न श्लोकों की व्यापक मीमांसा की और कुरूक्षैत्र के दृश्य को जीवंत कर दिया। अर्जुन के मनोभावों और श्रीकृष्ण की सीख को रोमांचक अंदाज में प्रस्तुत किया।
इस्कॉन मंदिर के संत गजेंद्र पति प्रभु, रवि द्वारा हरे रामा, हरे कृष्णा भजन पर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। ओम कोठारी प्रबंध संस्थान के सभागार में तीन दिवसीय मंथन में अधिकांश वक्ताओं का विचार था कि गीता की शिक्षाओं को नई पीढ़ी के लिए शिक्षा में शामिल किया जाए जैसा कि गुजरात सरकार ने किया है।
ज्ञानद्वार एजुकेशन सोसायटी की संस्थापक अनिता चौहान ने बताया कि सेमीनार में देश प्रदेश के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने आवासीय एवं गैर आवसीय के रूप में भागीदारी की। तीन दिवसीय आयोजन के अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दे कर सम्मानित किया। उनसे फीडबेक भी प्राप्त किया गया। समारोह का संचालन डॉ सुनीता चौहान ने किया।
संरक्षक जीडी पटेल, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी हरिशंकर भारद्वाज , अभियान से जुड़ी डॉ सुनीता चौहान, पूर्व नगर निगम उपायुक्त एमसी शर्मा, गायत्री परिवार गौशाला के खेमराज यादव कोशिक गायत्री परिवार के यज्ञदत्त हाड़ा,विश्व हिंदू परिषद के वीपी मित्तल,बांके बिहारी मंदिर के राजेंद्र खण्डेलवाल ,नंदिनी सिंह , नम्रता हाड़ा, नीतू राणावत,विशाल भारद्वाज,विनोद गौड़ ॐ कोठारी के नीरज शर्मा, प्रतीक , आदि गणमान्य नगारिकों ने अतिथियों का स्वागत किया। ओम कोटारी प्रबंध संस्थान के निर्देशक डॉ अमित सिंह राठौड़ ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
– अनिता चौहान, संयोजक गीता सेमीनार
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