….आजकल सीखने के नए तरीकों और प्रौद्योगिकी के बारे में जागरूकता बहुत महत्वपूर्ण है, जिस पर उप कुलपति जामिया हमदर्द प्रोफेसर अफशार आलम ने भी जोर दिया……
जामिया हमदर्द के प्रशिक्षण और विकास केंद्र, ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट व हमदर्द ट्रेनिंग व वेलफेयर सोसाइटी के सहयोग से 22 जुलाई 2024 को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षण कर्मचारियों के कौशल को विकसित करना और उन्हें प्रौद्योगिकी के नए तरीकों से अवगत कराना था।
कार्यक्रम की शुरुआत कुरान की तिलावत से हुई। विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग की डीन प्रोफेसर रेशमा नसरीन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आजकल सीखने के नए तरीकों और प्रौद्योगिकी के बारे में जागरूकता बहुत महत्वपूर्ण है, जिस पर उप कुलपति जामिया हमदर्द प्रोफेसर अफशार आलम ने भी जोर दिया।
ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष प्रोफेसर ख्वाजा शाहिद ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम बिजनेस एंड एम्प्लॉयमेंट ब्यूरो, जिसे अब हमदर्द लर्निंग वेलफेयर सोसाइटी कहा जाता है, के सहयोग से संभव हुआ है।
10-दिवसीय कार्यक्रम आईएसटीएम के पूर्व शिक्षकों की मदद से गैर-शिक्षण कर्मचारियों के कौशल को विकसित करने और उन्हें कार्यालय और तकनीकी पाठों में काम करने के नए तरीकों से अवगत कराने पर केंद्रित होगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मानव प्रबंधन पहलू बहुत महत्वपूर्ण हैं।
हमदर्द लर्निंग सेंटर के कार्यकारी सचिव मुफ्ती शौकत ने जामिया हमदर्द में शिक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए स्वर्गीय हकीम अब्दुल हमीद के बलिदान को याद किया। यह प्रशिक्षण भी इसी अभियान का एक हिस्सा है। उन्होंने कश्मीर, औरंगाबाद और मुंबई आदि में हमदर्द नेशनल फाउंडेशन के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
जामिया हमदर्द के रजिस्ट्रार डॉ. एम.ए. सिकंदर ने इसका स्वागत किया और इसकी तैयारी के लिए डॉ. ख्वाजा शाहिद की सराहना की। उन्होंने अपने स्टाफ को कार्यक्रम का पूरा लाभ उठाने की सलाह दी और उनके फीडबैक को ज़रूरी बताया।
अंत में सेंटर फॉर ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट के निदेशक प्रोफेसर सईद अल-निसा ने अतिथियों को धन्यवाद दिया। खासतौर पर इस प्रोग्राम को डिजाइन करने के लिए ख्वाजा शाहिद का।
कार्यक्रम का आयोजन जामिया की असिस्टेंट प्रोफेसर टोमिना चेरियन ने किया और इसके गठन में एजुकेशनल मूवमेंट के महासचिव अब्दुल रशीद और सचिव डॉ. इलियास तथा ऐजाज़ गौरी ने विशेष सहयोग दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के शिक्षण स्टाफ ने भाग लिया।