हारा हुआ जुआरी आख़री दाव मंगलसूत्र पर ही लगाता है

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Ali Aadil Khan Editor’s Desk

हारा हुआ जुआरी आख़री दाव मंगलसूत्र पर ही लगाता है

जो आज साहिब इ मसनद हैं कल नहीं होंगे – किरायेदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है

आज साहिब जिस तरह के बयानात और भाषणबाज़ी कररहे हैं उसमें अहंम है, Ego है , घमंड है ,,सांप्रदायिक शोला है ,नफ़रत की आग है , द्वेष है , लालच है , मोह है , और इस सबसे ज़्यादा सिंहासन के छिन जाने और हार जाने और सत्ता से बाहर हो जाने का ख़ौफ़ साफ़ झलक रहा है .

हालाँकि उनके पास अभी भी EVM है , ED है , CBI है , चुनाव आयोग है ,विपक्ष के प्रत्याशियों और उनके Supporters को धमकाने केलिए पुलिस है , ताकि 2 – 3 घंटे मतदान रुकवाकर विपक्ष का वोट प्रतिशत घटा दिया जाए , बाक़ी सारी संस्थाएं सर्कार के इशारे पर काम कर रही हैं .लेकिन साहिब सुनो ध्यान से सुनो …..

…..हमेशा तो सिंहासन पर सिकंदर रहा ,न मुग़ल्स , तातारी , तैमूरी , अशोका , महावीरा , और तो और पीर , साधू, संत , पैग़म्बर तक न रहे . तो आप किस खेत की मूली हो साहिब ? जो आज साहिब इ मसनद हैं कल नहीं होंगे – किरायेदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है

मंगल सूत्र और देश की संपत्ति को मुसलमानों में बांटे जाने वाले भाषण के बारे में मोदी और योगी दोनों ही प्रतिस्पर्धा में लगे हुए हैं . शायद ही कोई चुनावी भाषण ऐसा हो जिसमें मुसलमान , हिन्दू , पाकिस्तान , राम मंदिर , श्री राम और साम्प्रदायिकता की बात न होती हो .

साहिब और महाराज मनघड़ंत कहानियां शुरू कर देते हैं मुग़ल योद्धाओं की . 30 से 40 मिनट के भाषण में मुश्किल से 5 या 7 मिनट सर्कार की उपलब्धियों या विकास पर बात कर पाते हैं साहिब और महाराज , बाक़ी सब इधर उधर की सांप्रदायिक कहानियां . एक भाषण में कहानी शुरू की साहिब ने ,  हम SC , ST , OBC और आदिवासी के आरक्षण से मुसलमानों को आरक्षण हरगिज़ नहीं दे सकते नहीं दे सकते नहीं दे सकते ….

आपसे कौन कह रहा है की SC , ST , OBC आदिवासियों के आरक्षण में से मुसलमानों को आरक्षण दिया जाए ………आप छोड़ें मुसलमानों को आरक्षण देने की बात …. आप तो पहले देश के दलित , आदिवासी , OBC और General हिन्दुस्तानी को उसका अपना संवैधानिक , नागरिक अधिकार और मान सम्मान देदें …. इतना काफ़ी है .

किसी ने खूब कहा की हारा हुआ जुआरी आख़री दाव अपनी महिलाओं के मंगलसूत्र पर ही लगाता है . और एक इंटरव्यू में साहिब के गुरु LK अडवाणी जी कह चुके हैं कि सत्ता के छिन जाने का ख़ौफ़ हाकिम से अनैतिक और उलटे पुल्टे काम कराता है सो हो रहे हैं. ज़ाहिर है उनका इशारा अपने शिष्य की तरफ़ ही था .

साहिब ,अब देश का सियासी दृश्य बदल रहा है आप जनहित में अपना नारा भी बदल दें , और कहें …. “अबकी बार जनता की सरकार — सबको सम्मान , न्याय और संवैधानिक अधिकार ” …मगर आपको न्याय , संविधान और नागरिक अधिकारों से क्या सरोकार , यह तो देश के प्रधानमंत्री का Concern होता है और आप तो एक ख़ास वर्ग या समुदाय के PM की हैसियत से बातें करते हो और काम भी .

रोज़ नए जोश के और पूरी ऊर्जा के साथ धुर्वीकरण के नए नए मंत्र पढ़ रहे हैं साहिब .हालंकि विष्णु के अवतार को इस सबकी ज़रूरत नहीं पड़नी चाहिए थी. ऐसा लगता है की देश के लोकतांत्रिक पर्व लोकसभा इलेक्शन को भी अब होली का पर्व बना दिया सियासी पार्टियों ने . बुरा ना मानो चुनाव है , जैसे बुरा न मानो होली है के नाम पर जो चाहो बोल दो चाहे लोगों के मुंह पर गंदे नाले की गार लपेट दो …किसी को भी छेड़ दो , किसी का भी अपमान कर दो ……

हालांकि समता , सम्प्रभुता , समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता की हिफाज़त के लिए लोकतंत्र और संवैधानिक ताने बाने की चादर एक बोसीदा गुदड़ी में तब्दील कर दी गई है . देश में सब कुछ बहुत दयनीय और खतरनाक दिशा में जा रहा है . इसको सामान्य करने में काफी मेहनत करनी होगी …मौखिक रूप से तो आजकी सियासत ने ख़ास तौर से साहिब की टोली ने संविधान को ख़त्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है .

हम संविधान की प्रस्तावना की बात कर रहे हैं , संविधान के सम्पूर्ण प्रारूप यानी complete format की बात नहीं कर रहे . भारतीय संविधान यानी मुल्क के आइन में वर्तमान समय में कुल 470 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियाँ हैं और ये 25 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद थे जो 22 भागों में विभाजित थे और इसमें केवल 8 अनुसूचियाँ थीं।….आगे बढ़ने से पहले संविधान की प्रस्तावना को समझना आपके लिए बहुत ज़रूरी है .

संविधान की प्रस्तावना क्या है ????: हम, भारत के लोग, भारत को एक संप्रभु , समाजवादी , धर्मनिरपेक्ष , लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने और इसके सभी नागरिकों को सुरक्षित करने का गंभीरता से संकल्प लेते हैं:

सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय , विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास और पूजा की स्वतंत्रता , सभी नागरिकों के बीच स्थिति ,पदोन्नति और किसी भी क्षेत्र में अवसरों की समानता सुनिश्चित करना , हर एक व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने वाली बंधुता ही संविधान की प्रस्तावना है .

और संविधान की इसी प्रस्तावना की शपथ लेकर देश के संवैधानिक अधिकारी , सांसद , विधायक , नयायधीश , मंत्री और प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति अपने पदभार संभालते हैं .

संविधान में संशोधन तो समय समय पर होता रहा है और होता रहेगा . लेकिन संविधान की प्रस्तावना ,,,इसकी रूह है .सत्तापक्ष को इसे ख़तम करने की बेचैनी और जल्दी है .

आपको मालूम है ??? अँगरेज़ साम्राज्य्वादी शासन को सबसे ज़्यादा तकलीफ प्रस्तावना से ही हुई थी ,,,अन्यथा इंडियन पीनल कोड (IPC) और क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) के कई Acts तो ऐसे हैं जो अँगरेज़ हुकूमत के दौर से ही चले आरहे हैं और वो देश में आज़ादी और क्रांति की आवाज़ को कुचलने के लिए बनाये गए थे , और आज भी लागू हैं . शायद ग़ुलाम बनाये रखने के लिए

संविधान की प्रस्तावना के संबंध में चिंता की बात यह है जब संविधान की रूह नहीं बचेगी तो जिस्म बेजाँ रह जायेगा जिसमें से बदबू और बीमारी के सिवा कुछ न मिलेगा . जिसको दफनाना ही बेहतर होगा . आज हमारे यहाँ कुछ ऐसा ही हाल है ….

गोडसे हेडगेवार और गोलवलकर वालों ने अपने लक्ष्य को हासिल किया , लेकिन सवाल यह है कि समाजवादी , गांधीवादी , राष्ट्रवादी और अम्बेडकरवादी कहाँ हैं ? यह चिंता और मंथन का विषय है कि आज चंद लोग ही स्वतंत्रता के मतवालों की समाधियों पर टिमटिमाती लौ को मुख़ालिफ़ हवाओं से बचाने के लिए अपने दामन की ओट किये हुए हैं , जो काफ़ी नहीं है .

भारत के साथ पूरे विश्व में तबाही , नफरत , स्वार्थ और Colonial सोच का माहौल है , सत्ता और ऐशपरस्ती के लालची भेड़ियों ने तो ,देश और दुनिया को ख़तम करने की क़सम खाई है .

और विश्वगुरु नामी जुमला चने का झाड़ है , जिसपर आसानी से किसी को भी चढ़ाया जा सकता है . बहुत चालाकी से विदेशी कंपनियों ने भारत की मंडियों पर क़ब्ज़ा जमा लिया है . हमारी विदेश नीतियों को नाकाम बनाया गया है . और शोर यह है की विदेशों में मोदी जी का डंका बज रहा है , जबकि सच यह है कि विदेश नीतियों की लंका लगी हुई है . हमारा लाल आँख न जाने कहाँ लग गयी मगर छोटी आँखों वाले सभी पडोसी हमें आँख दिखा रहे हैं .

जागो भारत वासियो जागो और दुनिया को सीधी राह दिखने के लिए कमर कसो और देश के अमन को बर्बाद होने से बचा लो . बात सिर्फ चुनाव कि नहीं बल्कि चयन की है ,, आप अपने और नस्लों के लिए अमन चुनते हैं या तबाही और विनाश …. देश और मानवता खतरे में है इसे बचा लो ….अगला लेख देश की आर्थिक हालत पर होगा , आपके हिस्से में कितना माल है \ और कितने के हैं आप क़र्ज़दार इसपर बात होगी …जय हिन्द

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