
Ali Aadil Khan ,Editor’s Desk
कोयला संकट से ईस्ट इंडिया कंपनी क्या है रिश्ता?
लोग भले Diamond , हीरा, सोना और चांदी की चमक की बात करते रहें किन्तु आज कोयले की चमक को उभरते दुनिया देख रही है ,और यह हकीकत भी है सब कुछ तो रौशनी में ही दीखता है ,,,,,,और रौशनी कोयले से बनती है . देश में अलग अलग तरह के संकट उभर रहे हैं , जिनका विमोचन बाबा के पास तो नहीं किन्तु कोयले की खदानों में काम करने वाले मज़दूरों और खेतों में काम करने वाले किसानो के पास ज़रूर हो सकता है , लेकिन आज की सरकार का इन दोनों ही से छत्तीस का आंकड़ा है . अगर धरती से सोना, diamond और हीरे निकलना बंद होजाये तो ज़िंदगी चलती रहेगी , लेकिन अगर पानी , अनाज , फल ,सब्ज़ा , कोयला , नमक , लोहा निकलना बंद होजाये तो ज़िंदगी अजीरन बन जायेगी .
ज़रा सोचो अगर १ माह के लिए देश में बिजली न हो और एक साल खेत से अनाज न उगाया जाए तो देश में क्या होगा जी वही बिजली जो कोयले से बनती है , और वही अनाज जो ज़मीन से उगता है … हालाँकि बिजली बनाने के दुसरे भी सोर्सेज हैं , लेकिन अनाज ,दलहन , तिलहन , फल , सब्ज़ी माध्यम सिर्फ किसान ही है .
कोयला संकट के चलते विद्युत संयंत्रों में बिजली का उत्पादन जबरदस्त तरीके से गिरा है। केवल अगस्त माह के 13 दिनों में ही 30 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन कम हुआ। अगस्त माह से अब तक प्रदेश में 53 करोड़ यूनिट का उत्पादन गिर गया। संकट से निपटने केलिए केंद्र सरकार से कोयले की डिमांड की जा रही है लेकिन फिलहाल कोई मजबूत समाधान नजर नहीं आ रहा है।
दूसरी तरफ देश के केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक Press Conference में देशवासियों से कहा कि–घबराएं नहीं, देश में कोयले की कोई कमी नहीं है. केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने लोगों को कहा है कि बेवजह परेशान ना हों. मंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने का बिल्कुल भी खतरा नहीं है. कोल इंडिया लिमिटेड के पास 24 दिनों की कोयले की मांग के बराबर 43 मिलियन टन का पर्याप्त कोयला स्टॉक है.
उत्तर प्रदेश में मौजूदा समय में मांग के मुकाबले बिजली की आपूर्ति में 3 000 से 4,000 मेगावॉट का अंतर आगया है , जो संकट का रूप धारण करता जा रहा है । उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत निगम की सबसे बड़ी अनपरा परियोजना में कोयले का स्टॉक प्रतिदिन 10 हजार टन कम हो रहा है। अनपरा परियोजना के Executive .Engineer (कोल ट्रांसपोर्ट डिविजन) अजय प्रताप सिंह ने बताया कि अगर कोयले की आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में तुरंत पहल नहीं की गई तो स्थिति और खराब हो जाएगी। लेकिन स्थितियों का खराब होना देश की सियासत को suit करता है , और आपदा में अवसर आसानी से मिल जाते हैं. आपदा में अवसर का फार्मूला भी संकट विमोचन बाबा ने ही दिया है , जिनके होने से सब मुमकिन होजाता है , वैसे बाबा तो मुफ्त में ही बदनाम हैं असल तो कोई और है जो दुनिया को चला रहा है . और बाबा जैसे लोगों को उसी ने मुसल्लत कर दिया है नाफ़रमान जनता पर …….
ख़ैर ….कोयले की कमी की वजह से 2400 मेगावाट से ज्यादा क्षमता की आठ इकाइयां बंद करनी पड़ी हैं। इसमें निजी और JOint Sector की चार और राज्य उत्पादन निगम की भी चार इकाइयां हैं। जो इकाइयां चल रही हैं उन्हें भी कम क्षमता पर चलाया जा रहा है ताकि उत्पादन पूरी तरह ठप न हो।
सभी Sources को मिलाकर बिजली की कुल उपलब्धता 14000-15000 मेगावाट तक पहुंच रही है जबकि प्रतिबंधित मांग 18000-19000 मेगावाट है। मांग और उपलब्धता में 4000-5000 मेगावाट का अंतर होने की वजह से बिजली आपूर्ति का शिड्यूल अस्त–व्यस्त हो गया है। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के शिड्यूल में पांच से छह घंटे की कटौती की जा रही है।
वैसे मुसलमानो को चाहिए की वो कबाब और टिक्का खाना बंद करदें क्योंकि उसमें कोयला भी खर्च होता है और बिजली का पंखा भी चलता है तो कोयला और बिजली की आपूर्ति में संकट के लिए मुस्लमान ज़िम्मेदार आज के नवीन भारत में हो सकता है ,,,, हालांकि गोश्त की मंडियां और दुकानें नौ रात्रों और दशहरा के दिन बंद होती हैं क्योंकि गोश्त खाने वाले ब्रत से होते हैं और मंगल का दिन हनुमान जी और मंगल ग्रह का है आज के दिन हिन्दू समाज के आस्थवादी लोग ब्रत से होते हैं इसलिए मंगल के दिन भी सभी गोश्त की दुकानें बंद होती हैं इसलिए गोश्त की बड़ी खपत देश के बहुसंख्यक पर ही निर्भर करती है .लेकिन फ़िलहाल अपनी गुफ्तगू बिजली संकट पर केंद्रित करते हैं .
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश में बढ़ रहे बिजली संकट को देखते हुए राज्य सरकार से पावर कार्पोरेशन के लिए आर्थिक पैकेज घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य की बात यह भी है इस संकट के दौरान एनर्जी एक्सचेंज 9 रुपये से लेकर 20 रुपये यूनिट तक बिजली बेच रहा है। केंद्र सरकार को इस पर रोक लगानी चाहिए। जल्द से जल्द सरकार को पावर कार्पोरेशन को आर्थिक पैकेज देना चाहिए कोयले और बिजली की खरीद में कठिनाई न हो .
अब अगर बक़ौल केंद्रीय कोयला मंत्री कोयले की कमी नहीं है तो उतर प्रदेश के बिजली utpadan कंपनियों को क्यों नहीं दिया जा रहा है , जबकि Double Engine की सरकार के नाम पर जनता से वोट माँगा गया था , याद है न महाराज आपको ? अब चाहे वो मध्ये प्रदेश में हो या उत्तर प्रदेश में , बिहार में हो या गुजरात में , लाभ तो जनता को होना चाहिए था किन्तु वास्तविकता अलग है ….
क्या आपूर्ति की कमी दिखाकर एक तीर से दो शिकार किये जा रहे हैं , एक तरफ आगामी चुनाव के मद्दे नज़र स्वामी जी ख्याति को धूमिल करना और दूसरी तरफ देश को बताया जा रहा हो की सरकारी कम्पनियाँ बिजली बनाने में नाकाम होरही हैं इसलिए इसको भी निजी कंपनियों को सौंपा जाएगा , कुल मिलाकर देश रफ़्ता रफ़्ता ईस्ट इण्डिया कंपनी वाले दौर में प्रवेश कर रहा है .उसके बाद साम्राजयवाद का बोलबाला है और जनता पूरी तरह से ग़ुलाम . यदि पानी और बिजली भी Private sector के हाथों पहुँच गया तो फिर देश की जनता को गुलामी से कोई नहीं बचा सकता .Health और Education पर प्राइवेट Sector का क़ब्ज़ा है internet और मोबाइल कंपनियों ने पहले ही दुनिया को गुलामी की ज़ंजीरों में जकड़ रखा है .अब सरकार के पास चलाने को क्या बचा सिर्फ सत्ता का सिंघासन और डंडा वो फिलहाल चल ही रहा है ??
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