उर्दू अध्यापकों की संख्या बढ़ाएं केन्द्र और राज्य सरकारें: डा. सैयद अहमद खान
इस बार चेन्नई में मनाया जाएगा उर्दू दिवस समारोह :डॉ उबैदुल्लाह बेग

दरियागंज नई दिल्ली स्थित कार्यालय में हुई विश्व उर्दू दिवस समारोह समिति की बैठक
नई दिल्ली. विश्व उर्दू दिवस पर मद्रास विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग और अंजुमन अबना ए कदीम के संयुक्त तत्वावधान में 9 नवम्बर को समारोह आयोजित किया जाएगा. इस दिन देश भर के विद्वान उर्दू की बहबूदी के उपाय सुझाने के साथ ही देश की गंगा—जमुनी तहजीब को बचाए रखने पर जोर दिया जाएगा.
ये जानकारी उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन तमिलनाडु एंड कर्नाटक के अध्यक्ष डॉ उबैदुल्लाह बेग की अध्यक्षता में दरियागंज नई दिल्ली स्थित कार्यालय में हुई विश्व उर्दू दिवस समारोह समिति की बैठक में दी गई. इस मौके पर डॉ उबैदुल्ला बेग ने कहा कि 9 नवंबर को विश्व उर्दू दिवस समारोह मद्रास विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग और अंजुमन अबना ए कदीम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आर्गेनाइजेशन मद्रास विश्वविद्यालय उर्दू विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर अमानुल्लाह का शुक्रगुजार है कि उन्होंने विश्व उर्दू दिवस समारोह के लिए सहयोग प्रदान किया है.
उर्दू की दूसरी संस्था वेल्लोर, विश्राम और वानियम बाड़ी के उर्दू अध्यापको ने भी सहयोग का वादा किया है. तमिलनाडु सरकार के उर्दू ब्लॉक एजुकेशनल अफसर बी एम हबीबुर्रहमान ने भी सहयोग का भरोसा दिलाया है. डॉ बेग ने कहा कि उर्दू देश की भाषा है. देश के लोग इसे प्रेम करते हैं. ये भाषा देश में लोकप्रिय भी है, इसलिए इसका भविष्य उज्जवल है.
विश्व उर्दू दिवस समारोह समिति संयोजक डॉ सैयद अहमद खान ने कहा कि 25 साल पहले सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा के रचयिता विश्व विख्यात दार्शनिक अल्लामा इकबाल के जन्मदिन 9 नवंबर को उर्दू दिवस मनाए जाने का प्रभाव विश्व भर में दिख रहा है. डा. सैयद अहमद खान ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि वह उर्दू पढ़ाने वाले उर्दू अध्यापकों की अध्यापकों की संख्या बढ़ाए ताकि उर्दू पढ़ने की इच्छा रखने वालों को बेहतरीन तालीम मिल सके. इसके अलावा केंद्रीय विद्यालयों में उर्दू अध्यापकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए. कक्षा 12वीं तक उर्दू विषय पढ़ाए जाने की व्यवस्था की जाए.
वरिष्ठ पत्रकार मासूम मुरादाबादी ने डॉ उबैदुल्ला को मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में तमिलनाडु और कर्नाटक में भी उर्दू का विकास संभव होगा. बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार से एनसीपीयूएल के पुनर्गठन की मांग की गई. ज्ञात रहे कि पिछले दो सालों से एनसीपीयूएल का पुनर्गठन नहीं किया गया है. इससे उर्दू शिक्षा और उससे सम्बंधित तमाम विषय अनसुलझे पड़े हैं.
इस अवसर पर जफर अनवर शक्करपुर, सैयद एजाज हुसैन, जलालुद्दीन खान खलीलाबादी, इमरान कन्नौजी, इसरार अहमद उज्जैनी, डॉ शकील अहमद मेरठी, डा फहीम मलिक, हकीम आफताब आलम आदि ने भी विचार व्यक्त किए.
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