Editorial & Articles

सियासत का अदालतों में दख़ल इंसाफ़ की फांसी

मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहना सिर्फ इतना बताना है कि बटला हाउस एनकाउंटर आज तक सवालों के घेरों मे है, इस एनकाउंटर की जांच की मांग को लेकर अक्सर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं, विरोध प्रदर्शन का यह सिलसिला उस वक्त शुरु हुआ जब आज़मगढ़ को आतंकगढ़ कहा जाने लगा, आज़मगढ़ से लखनऊ और लखनऊ से दिल्ली तक हर साल इस एनकाउंटर की जांच की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लेकिन इसकी जांच नहीं कराई गई, इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को गोली कैसे लगी इसकी भी जांच नहीं हो सकी, अब निचली अदालत ने मोहन शर्मा की हत्या के लिए आरिज खान को दोषी पाया है।

अगर शिक्षा संस्थान RSS को दे दिए जाएँ तो……

यह अलग बात है की राजनीती के मैदान में आज बीजेपी तथा कांग्रेस एक दुसरे के धुर विरोधी के रूप में देखे जा रहा है , और कांग्रेस को गांधीवादी तथा बीजेपी को सावरकर या गोडसेवादी सोच का प्रचारक और संगरक्षक कहा जा रहा है , और किसी हद तक ऐसा है भी और होने में हर्ज भी क्या है सबको अपनी विचार धारा को प्रचारित करने का अधिकार है, बशर्त यह के इस विचार धारा से देश की एकता , संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा न हो .हमारे संविधान ने हर मज़हब को उसके प्रचार प्रसार की आज़ादी दी है .

मिल्‍लत में खा़मोश तालीमी इंक़लाब की आहट

मसाइल के पैदा होने का सबब अगर जहालत है तो मसाइल का इलाज और हल, इल्‍म और तालीम तालीम को अगर मास्‍टर-की (Master-key) कहा...

2020 BEST SCIENTIST AWARD CONFERRED ON DR. HISHMI JAMIL HUSAIN

He is Commission Member of International Union for Conservation of Nature (IUCN) on Environmental, Economic and Social Policy and Commission on Education and Communication

देश में मुस्लिम सियासी जमातों का इत्तिहाद क्यों है ज़रूरी देश के लिए

यूँ तो पूरे देश में सभी वर्गों , समुदायों और जातियों के बीच एकता और अखंडता ज़रूरी है , तभी देश अखंड बन पायेगा , लेकिन यहाँ हम मुस्लिम सियासी जमातों का मुत्तहिद होना क्यों ज़रूरी इसपर रौशनी डालेंगे . और 100 % यक़ीन से कह सकते हैं अगर इस फॉर्मूले पर अमल हुआ तो हमारा देश विकसित देशों की फेहरिस्त में टॉप पर होगा .

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